उत्तराखंड स्थित बदरीनाथ मंदिर को खतरा!
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उत्तराखंड के बागेश्वर की कत्यूर घाटी में 12वीं सदी में निर्मित बदरीनाथ मंदिर की छत पर तांबे का छत्र लगाया जाएगा।
पुरातत्व विभाग की ओर से यह कवायद मंदिर की छत पर उगे पीपल के पेड़ से होने वाले संभावित खतरे को देखते हुए की जा रही है। बागेश्वर जिले के गढ़सेर गांव में चंद शासकों द्वारा 800 वर्ष पूर्व निर्मित इस मंदिर में भगवान विष्णु की विशेष कलाकृति वाली प्रतिमा है।
कत्यूर घाटी में चंद शासकों ने नवीं सदी से लेकर 16वीं सदी तक दर्जनों मंदिरों का निर्माण कराया था। इनमें बैजनाथ, बागनाथ मंदिर समूह तो हैं हीं कई मंदिर अलग-अलग स्थानों पर भी हैं। गरुड़ के गढ़सेर गांव में बदरीनाथ मंदिर का निर्माण भी इन्हीं मंदिरों की शैली में किया गया है। वर्तमान में इन ऐतिहासिक मंदिरों की देखरेख का जिम्मा पुरातत्व विभाग के पास है।
पुरातत्व विभाग ने मंदिर का छत्र बदलने की योजना बनाई
कत्यूर घाटी के 12वीं सदी में बनाए गए इस मंदिर की छत पर हाल ही में एक पीपल का पौधा उग आया था। इसकी जड़ों से मंदिर के शीर्ष को खतरा होने की आशंका देखते हुए पुरातत्व विभाग ने मंदिर का छत्र बदलने की योजना बनाई है।
इसके तहत मंदिर के छत पर उगे पीपल के पौधे को निकालने के बाद छत की रिसेटिंग करके उस पर लकड़ी का बिजौरा और तांबे का छत्र लगाया जाएगा। शासन स्तर से धनराशि स्वीकृत होने के बाद पुरातत्व विभाग की ओर से इस कार्य के लिए लोक निर्माण विभाग को कार्यदायी संस्था बनाया गया है। निर्माण कार्य की देखरेख पुरातत्व विभाग स्वयं करेगा।
पुरातत्व प्रभारी चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि बदरीनाथ मंदिर की छत पर बिजौरा लगाने के लिए शासन से 7.34 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं। मंदिर की छत में उगे पीपल के पौधे को निकालने के बाद रिसेटिंग की जाएगी। इसके बाद बिजौरा लगाया जाएगा। छत पर बनने वाले बिजौरे में देवदार की लकड़ी का प्रयोग होगा। इस पर तांबे का छत्र लगाया जाएगा। इसके बाद ऐतिहासिक महत्व के इस मंदिर को कोई खतरा नहीं रहेगा।