फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   badrinath temple in bageshwar in danger

उत्तराखंड स्थित बदरीनाथ मंदिर को खतरा!

Fri, 11 Mar 2016 10:10 PM IST
भक्त दर्शन पांडेय/ अमर उजाला, बागेश्वर
भक्त दर्शन पांडेय/ अमर उजाला, बागेश्वर Updated Fri, 11 Mar 2016 10:10 PM IST
विज्ञापन
badrinath temple in bageshwar in danger
बागेश्वर में बद्रीनाथ मंदिर - फोटो : amar ujala

उत्तराखंड के बागेश्वर की कत्यूर घाटी में 12वीं सदी में निर्मित बदरीनाथ मंदिर की छत पर तांबे का छत्र लगाया जाएगा।

विज्ञापन


पुरातत्व विभाग की ओर से यह कवायद मंदिर की छत पर उगे पीपल के पेड़ से होने वाले संभावित खतरे को देखते हुए की जा रही है। बागेश्वर जिले के गढ़सेर गांव में चंद शासकों द्वारा 800 वर्ष पूर्व निर्मित इस मंदिर में भगवान विष्णु की विशेष कलाकृति वाली प्रतिमा है।

कत्यूर घाटी में चंद शासकों ने नवीं सदी से लेकर 16वीं सदी तक दर्जनों मंदिरों का निर्माण कराया था। इनमें बैजनाथ, बागनाथ मंदिर समूह तो हैं हीं कई मंदिर अलग-अलग स्थानों पर भी हैं। गरुड़ के गढ़सेर गांव में बदरीनाथ मंदिर का निर्माण भी इन्हीं मंदिरों की शैली में किया गया है। वर्तमान में इन ऐतिहासिक मंदिरों की देखरेख का जिम्मा पुरातत्व विभाग के पास है।

विज्ञापन

पुरातत्व विभाग ने मंदिर का छत्र बदलने की योजना बनाई

badrinath temple in bageshwar in danger
बागेश्वर में बद्रीनाथ मंदिर - फोटो : amar ujala

कत्यूर घाटी के 12वीं सदी में बनाए गए इस मंदिर की छत पर हाल ही में एक पीपल का पौधा उग आया था। इसकी जड़ों से मंदिर के शीर्ष को खतरा होने की आशंका देखते हुए पुरातत्व विभाग ने मंदिर का छत्र बदलने की योजना बनाई है।

इसके तहत मंदिर के छत पर उगे पीपल के पौधे को निकालने के बाद छत की रिसेटिंग करके उस पर लकड़ी का बिजौरा और तांबे का छत्र लगाया जाएगा। शासन स्तर से धनराशि स्वीकृत होने के बाद पुरातत्व विभाग की ओर से इस कार्य के लिए लोक निर्माण विभाग को कार्यदायी संस्था बनाया गया है। निर्माण कार्य की देखरेख पुरातत्व विभाग स्वयं करेगा।

पुरातत्व प्रभारी चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि बदरीनाथ मंदिर की छत पर बिजौरा लगाने के लिए शासन से 7.34 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं। मंदिर की छत में उगे पीपल के पौधे को निकालने के बाद रिसेटिंग की जाएगी। इसके बाद बिजौरा लगाया जाएगा। छत पर बनने वाले बिजौरे में देवदार की लकड़ी का प्रयोग होगा। इस पर तांबे का छत्र लगाया जाएगा। इसके बाद ऐतिहासिक महत्व के इस मंदिर को कोई खतरा नहीं रहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed