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एक और आदमखोर तेंदुए को लखपत ने किया ढेर
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Sat, 13 Oct 2018 11:43 PM IST
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आदमखोर तेंदुए का शिकार कर लौटते लखपत सिंह और सहयोगी।
- फोटो : अमर उजाला
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क्षेत्र में आतंक का पर्याय बने आदमखोर तेंदुए को आखिरकार शिकारी लखपत सिंह ने एक गोली में ढेर कर दिया। तेंदुए को मार गिराने के लिए शिकारी लखपत सिंह 10 दिन से मोर्चा संभाले हुए थे। तेंदुए के दांत और नाखून पूरी तरह घिस गए थे। इसी आधार पर शिकारी और वनाधिकारियों ने मारे गए तेंदुए के आदमखोर होने का दावा किया है।
गरुड़ ब्लॉक के इतर बागेश्वर नगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी लंबे समय से तेंदुए का आतंक छाया था। नौ सितंबर को नदी गांव में तेंदुआ एक मासूम का मार चुका था। 27 सितंबर को तेंदुए को आदमखोर घोषित करते हुए ट्रेंक्यूलाइज करने या फिर मार गिराने के आदेश जारी हुए थे। तब से शिकारी लखपत और वन कर्मी आदमखोर को ढेर करने के फिराक में थे।
बृहस्पतिवार रात द्यांगण में तेंदुए ने एक घायल खच्चर को शिकार बनाया। इसका पता चलते ही शुक्रवार दोपहर शिकारी लखपत और वन कर्मियों ने आरे बाईपास के पास मचान बनाया। इसके बाद लखपत और सहयोगी हरीश सिंह ने मचान पर 315 बोर की राइफल के साथ मोर्चा संभाल लिया।
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शुक्रवार देर शाम जैसे ही तेंदुआ खच्चर के अधखाए शव के पास आया, शिकारी लखपत ने उसे निशाने पर लेकर ट्रिगर दबा दिया। गोली लगते ही तेंदुआ मौके से भाग निकला। शनिवार सुबह आरे बाईपास के पास उसका शव मिला।
पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. हिमांशु पाठक और डॉ. ज्योति ने बताया कि तेंदुए की उम्र तकरीबन 12 से 14 साल रही होगी।
उसके सिर, गले पर पुुराने और गहरे जख्म मिले हैं। तेंदुए के दांत और सभी पंजों के नाखून पूरी तरह घिस चुके थे। इसे देखते हुए शिकारी के साथ ही डीएफओ आरके सिंह ने तेंदुए के आदमखोर होने का पुख्ता दावा किया। बाद में वन विभाग के परिसर में ही तेंदुए का शव जला दिया गया। तेंदुआ करीब आठ फीट लंबा और ढाई फीट ऊंचा था।
लखपत ने 52वें आदमखोर का किया शिकार
नदीगांव के आदमखोर को ढेर करने के साथ ही लखपत सिंह के खाते में 52 तेंदुओं का शिकार दर्ज हो चुका है। इससे पहले लखपत ने गरुड़ के हरिनगरी गांव के आदमखोर को मार कर अर्द्धशतक पूरा किया था। इसके बाद अल्मोड़ा के सोमेश्वर का आदमखोर उनका 51वां निशाना बना था।
शनिवार को आदमखोर के मारे जाने की पुष्टि के साथ ही लखपत ने 52वां शिकार पूरा करने की उपलब्धि हासिल की। शौकिया शिकारी लखपत पेशे से शिक्षक हैं। उनका कहना है कि उन्हें वन्य जीवों को मारना अच्छा नहीं लगता, लेकिन मानव जीवन की रक्षा के लिए हथियार चलाते हैं।
अभी और भी हैं क्षेत्र में तेंदुुए
मुख्य नगर से सटे बिलौना और मेहनरबूंगा के बीच शनिवार दोपहर घास काट रही महिलाओं को तेंदुआ नजर आया। तेंदुआ सरयू नदी के एक डेल्टा पर पत्थर के टीले पर बैठा था। तेंदुआ भी महिलाओं को देख चुका था। खतरा भांपकर महिलाओं ने घास के गठ्ठर छोड़कर वापस घर की ओर दौड़ लगा दी। पूर्व प्रधान रमेश राज ने वन विभाग को सूचना दी। ब्यूरो
तेंदुए के हमले के घायल की सुध नहीं
चौरा में घायल तेेंदुए के हमले में घायल हुए अधेड़ ने सुध न लेने का आरोप लगाया है। पीड़ित हल्द्वानी के राजकीय सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती है। घायल तेंदुए के हमले में अधेड़ जगदीश सिंह को 80 टांके आए थे। हालत गंभीर देखकर चिकित्सकों ने हायर सेंटर रेफर किया था। चौरा निवासी जगदीश के परिजनों का कहना है कि विभाग ने अभी तक सुध नहीं ली है। इलाज में कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है।
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गरुड़ ब्लॉक के इतर बागेश्वर नगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी लंबे समय से तेंदुए का आतंक छाया था। नौ सितंबर को नदी गांव में तेंदुआ एक मासूम का मार चुका था। 27 सितंबर को तेंदुए को आदमखोर घोषित करते हुए ट्रेंक्यूलाइज करने या फिर मार गिराने के आदेश जारी हुए थे। तब से शिकारी लखपत और वन कर्मी आदमखोर को ढेर करने के फिराक में थे।
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बृहस्पतिवार रात द्यांगण में तेंदुए ने एक घायल खच्चर को शिकार बनाया। इसका पता चलते ही शुक्रवार दोपहर शिकारी लखपत और वन कर्मियों ने आरे बाईपास के पास मचान बनाया। इसके बाद लखपत और सहयोगी हरीश सिंह ने मचान पर 315 बोर की राइफल के साथ मोर्चा संभाल लिया।
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शुक्रवार देर शाम जैसे ही तेंदुआ खच्चर के अधखाए शव के पास आया, शिकारी लखपत ने उसे निशाने पर लेकर ट्रिगर दबा दिया। गोली लगते ही तेंदुआ मौके से भाग निकला। शनिवार सुबह आरे बाईपास के पास उसका शव मिला।
पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. हिमांशु पाठक और डॉ. ज्योति ने बताया कि तेंदुए की उम्र तकरीबन 12 से 14 साल रही होगी।
उसके सिर, गले पर पुुराने और गहरे जख्म मिले हैं। तेंदुए के दांत और सभी पंजों के नाखून पूरी तरह घिस चुके थे। इसे देखते हुए शिकारी के साथ ही डीएफओ आरके सिंह ने तेंदुए के आदमखोर होने का पुख्ता दावा किया। बाद में वन विभाग के परिसर में ही तेंदुए का शव जला दिया गया। तेंदुआ करीब आठ फीट लंबा और ढाई फीट ऊंचा था।
लखपत ने 52वें आदमखोर का किया शिकार
नदीगांव के आदमखोर को ढेर करने के साथ ही लखपत सिंह के खाते में 52 तेंदुओं का शिकार दर्ज हो चुका है। इससे पहले लखपत ने गरुड़ के हरिनगरी गांव के आदमखोर को मार कर अर्द्धशतक पूरा किया था। इसके बाद अल्मोड़ा के सोमेश्वर का आदमखोर उनका 51वां निशाना बना था।
शनिवार को आदमखोर के मारे जाने की पुष्टि के साथ ही लखपत ने 52वां शिकार पूरा करने की उपलब्धि हासिल की। शौकिया शिकारी लखपत पेशे से शिक्षक हैं। उनका कहना है कि उन्हें वन्य जीवों को मारना अच्छा नहीं लगता, लेकिन मानव जीवन की रक्षा के लिए हथियार चलाते हैं।
अभी और भी हैं क्षेत्र में तेंदुुए
मुख्य नगर से सटे बिलौना और मेहनरबूंगा के बीच शनिवार दोपहर घास काट रही महिलाओं को तेंदुआ नजर आया। तेंदुआ सरयू नदी के एक डेल्टा पर पत्थर के टीले पर बैठा था। तेंदुआ भी महिलाओं को देख चुका था। खतरा भांपकर महिलाओं ने घास के गठ्ठर छोड़कर वापस घर की ओर दौड़ लगा दी। पूर्व प्रधान रमेश राज ने वन विभाग को सूचना दी। ब्यूरो
तेंदुए के हमले के घायल की सुध नहीं
चौरा में घायल तेेंदुए के हमले में घायल हुए अधेड़ ने सुध न लेने का आरोप लगाया है। पीड़ित हल्द्वानी के राजकीय सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती है। घायल तेंदुए के हमले में अधेड़ जगदीश सिंह को 80 टांके आए थे। हालत गंभीर देखकर चिकित्सकों ने हायर सेंटर रेफर किया था। चौरा निवासी जगदीश के परिजनों का कहना है कि विभाग ने अभी तक सुध नहीं ली है। इलाज में कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है।