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आंदोलनकारियों को नई सरकार मांगें पूरी होने की उम्मीद
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
Updated Thu, 06 Apr 2017 10:57 PM IST
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राज्य आंदोलनकारियों को लंबे समय से पहचान और प्रमाण पत्र नहीं मिल सके हैं। उन्होंने अब सूबे की नई सरकार से आश लगाई है। सरकार से आंदोलनकारियों की लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान करनेे की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि मांग शीघ्र पूरी नहीं हुई तो आंदोलन तेज कर दिया जाएगा।
राज्य आंदोलनकारी कल्याण संगठन के जिलाध्यक्ष पूरन पाठक ने कहा कि राज्य बने 16 साल से अधिक का समय हो गया है, लेकिन जिले के 352 आंदोलनकारियों को आज तक पहचान पत्र जारी नहीं हुए हैं। इस मांग को लेकर संगठन लंबे समय से संघर्षरत है। शासन के निर्देश पर प्रशासन सत्यापन और दो बार एलआईयू जांच भी करा चुका है। सत्यापन और एलआईयू जांच में आंदोलनकारियों के राज्य आंदोलन में शामिल होने की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन शासन और प्रशासन की अनदेखी के कारण आंदोलनकारियों को पहचान पत्र जारी नहीं हो सके हैं। कहा कि इसी उपेक्षा के चलते कई आंदोलनकारियों को उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी है।
पाठक ने कहा कि नाराज 2657 आंदोलनकारी परिवारों ने विधानसभा चुनाव में अपने गुस्से का अहसास कराकर ईवीएम पर नोटा के बटन दबाए। जिसका खामियाजा पूर्व सरकार को भोगना पड़ा है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिले में ऐसे ऐसे लोगों को राज्य आंदोलनकारी होने के प्रमाण पत्र जारी कर दिए हैं, जिनका आंदोलन से दूर-दूर तक का वास्ता था ही नहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से आंदोलनकारियों को शीघ्र प्रमाण पत्र दिलाने के लिए कारगर कदम उठाने की मांग की है।
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राज्य आंदोलनकारी कल्याण संगठन के जिलाध्यक्ष पूरन पाठक ने कहा कि राज्य बने 16 साल से अधिक का समय हो गया है, लेकिन जिले के 352 आंदोलनकारियों को आज तक पहचान पत्र जारी नहीं हुए हैं। इस मांग को लेकर संगठन लंबे समय से संघर्षरत है। शासन के निर्देश पर प्रशासन सत्यापन और दो बार एलआईयू जांच भी करा चुका है। सत्यापन और एलआईयू जांच में आंदोलनकारियों के राज्य आंदोलन में शामिल होने की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन शासन और प्रशासन की अनदेखी के कारण आंदोलनकारियों को पहचान पत्र जारी नहीं हो सके हैं। कहा कि इसी उपेक्षा के चलते कई आंदोलनकारियों को उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी है।
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पाठक ने कहा कि नाराज 2657 आंदोलनकारी परिवारों ने विधानसभा चुनाव में अपने गुस्से का अहसास कराकर ईवीएम पर नोटा के बटन दबाए। जिसका खामियाजा पूर्व सरकार को भोगना पड़ा है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिले में ऐसे ऐसे लोगों को राज्य आंदोलनकारी होने के प्रमाण पत्र जारी कर दिए हैं, जिनका आंदोलन से दूर-दूर तक का वास्ता था ही नहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से आंदोलनकारियों को शीघ्र प्रमाण पत्र दिलाने के लिए कारगर कदम उठाने की मांग की है।
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