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107/116 की प्रक्रिया में दी बड़ी राहत
Bageshwar
Updated Sun, 05 Oct 2014 05:34 AM IST
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बागेश्वर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डा. ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में लोगाें को अकारण, अचानक और अनावश्यक रूप से धारा 107/116 दंड प्रक्रिया संहिता से परेशान किए जाने के मामले में भारी राहत प्रदान की है।
जानकारी के अनुसार कपकोट निवासी रबर एक्सपोर्ट कंपनी तमिलनाडु के तकनीकी प्रबंधक पद से शांति प्रसाद वर्मा अवकाश ग्रहण करने के बाद घर आए तो पता चला कि उनकी भूमि पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। उन्होंने एसडीएम कपकोट को भूमि खाली कराए और शांति व्यवस्था बनाए रखने को प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें जांच करने पर दोनों पक्षों का धारा 107/116 के तहत चालान कर दिया और 15 हजार रुपये के दो जमानती प्रस्तुत करने का नोटिस भेज दिया। नोटिस के विरुद्ध वर्मा ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में एक रिवीजन प्रस्तुत कर अनुरोध कर कहा कि परगना मजिस्ट्रेट का आदेश निरस्त किया जाए।
जिला जज ने रिवीजन को स्वीकार कर परगना मजिस्ट्रेट कपकोट द्वारा पारित नोटिस को निरस्त कर दिया और आदेश दिया कि धारा 107/116 दंप्रसं एक इस प्रकार की प्रारंभिक उपचारात्मक व्यवस्था है कि भावी सार्वजनिक शांतिभंग होने से रोकी जा सके। इसके लिए कार्यपालक मजिस्ट्रेट को किसी प्रकार की शांतिभंग होने की सूचना किसी भी स्रोत से मिलने पर कारण बताओ नोटिस देना होगा कि क्यों न पक्षकार को एक अवधि के लिए परिशांति कायम रखने के लिए बंधपत्र या जमानत ली जाए। मामले की पैरवी एडवोकेट गोविंद सिंह भंडारी ने की।
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जानकारी के अनुसार कपकोट निवासी रबर एक्सपोर्ट कंपनी तमिलनाडु के तकनीकी प्रबंधक पद से शांति प्रसाद वर्मा अवकाश ग्रहण करने के बाद घर आए तो पता चला कि उनकी भूमि पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। उन्होंने एसडीएम कपकोट को भूमि खाली कराए और शांति व्यवस्था बनाए रखने को प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें जांच करने पर दोनों पक्षों का धारा 107/116 के तहत चालान कर दिया और 15 हजार रुपये के दो जमानती प्रस्तुत करने का नोटिस भेज दिया। नोटिस के विरुद्ध वर्मा ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में एक रिवीजन प्रस्तुत कर अनुरोध कर कहा कि परगना मजिस्ट्रेट का आदेश निरस्त किया जाए।
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जिला जज ने रिवीजन को स्वीकार कर परगना मजिस्ट्रेट कपकोट द्वारा पारित नोटिस को निरस्त कर दिया और आदेश दिया कि धारा 107/116 दंप्रसं एक इस प्रकार की प्रारंभिक उपचारात्मक व्यवस्था है कि भावी सार्वजनिक शांतिभंग होने से रोकी जा सके। इसके लिए कार्यपालक मजिस्ट्रेट को किसी प्रकार की शांतिभंग होने की सूचना किसी भी स्रोत से मिलने पर कारण बताओ नोटिस देना होगा कि क्यों न पक्षकार को एक अवधि के लिए परिशांति कायम रखने के लिए बंधपत्र या जमानत ली जाए। मामले की पैरवी एडवोकेट गोविंद सिंह भंडारी ने की।
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