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खनन करने पहुंची जेसीबी वापस भेजकर ही माने ग्रामीण
Updated Fri, 09 Feb 2018 11:18 PM IST
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बागेश्वर। कमस्यारघाटी के रावतसेरा स्थित कुलूर नदी में खनन कार्य का विरोध दूसरे दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों के भारी विरोध को देखते हुए कांडा के तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर वार्ता का प्रयास किया। ग्रामीणों के नहीं मानने पर पट्टाधारक को जेसीबी वापस भेजनी पड़ी।
बृहस्पतिवार को खनन के लिए कुलूर नदी में पहुंची जेसीबी को रावतसेरा, धारी, मध्या, भयूं, खैलकोट जग्यूड़ा, कफाली, भंडारीसेरा के ग्रामीणों ने रोक दिया था। ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए शुक्रवार को तहसीलदार मैनपाल सिंह ने मौके पर पहुंचकर पट्टाधारकों की मौजूदगी में ग्रामीणों से वार्ता की, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। तहसीलदार के निर्देश पर पट्टाधारक द्वारा जेसीबी वापस करने के बाद ही ग्रामीण शांत हुए। वहीं तहसीलदार ने कहा कि ग्रामीणों की जब तक सहमति नहीं बनती है, पट्टाधारक को खनन कार्य शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहां ग्राम प्रधान रावतसेरा लीला रावत, सुरेश राम, सुरेश रावत, गिरधारी सिंह, कुंदन डसीला, पवन रावत, सुरेश राठौर आदि थे।
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बृहस्पतिवार को खनन के लिए कुलूर नदी में पहुंची जेसीबी को रावतसेरा, धारी, मध्या, भयूं, खैलकोट जग्यूड़ा, कफाली, भंडारीसेरा के ग्रामीणों ने रोक दिया था। ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए शुक्रवार को तहसीलदार मैनपाल सिंह ने मौके पर पहुंचकर पट्टाधारकों की मौजूदगी में ग्रामीणों से वार्ता की, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। तहसीलदार के निर्देश पर पट्टाधारक द्वारा जेसीबी वापस करने के बाद ही ग्रामीण शांत हुए। वहीं तहसीलदार ने कहा कि ग्रामीणों की जब तक सहमति नहीं बनती है, पट्टाधारक को खनन कार्य शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहां ग्राम प्रधान रावतसेरा लीला रावत, सुरेश राम, सुरेश रावत, गिरधारी सिंह, कुंदन डसीला, पवन रावत, सुरेश राठौर आदि थे।
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