{"_id":"5b6887114f1c1bb8538b73a8","slug":"71533576977-bageshwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शंभू नदी पर बना बांध टूटा, राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शंभू नदी पर बना बांध टूटा, राहत
Updated Mon, 06 Aug 2018 11:06 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बागेश्वर। आपदाग्रस्त कुंवारी गांव के लिए खतरा बने जिस बांध से निपटने के लिए सरकारी मशीनरी पांच साल तक नाकाम रही। बारिश के पानी के तेेज बहाव से यह बांध खुद ब खुद टूट गया है। इससे आपदा प्रभावितों को बड़ी राहत मिली है। गांव पर मंडरा रहा भूस्खलन और भूकटाव का बड़ा खतरा टल गया है।
वर्ष 2013 की आपदा में कुंवारी गांव की तलहटी पर शंभू नदी में भारी बोल्डर के साथ ही मलबा गिरा था। इससे नदी पर तकरीबन 150 मीटर लंबा और 60 मीटर चौड़ा पानी का बांध बन गया था। बांध का पानी गांव की सरहद को लगातार काट रहा था। इससे भूस्खलन और पूरे गांव के धंसने का खतरा पैदा हो गया था। इस बीच आपदा प्रभावित क्षेत्र के दौरे पर आए जीएसआई के दो वैज्ञानिकों के दल ने बांध को गांव के लिए बड़ा खतरा बताया था। लेकिन काफी प्रयास के बाद भी प्रशासन और कार्यदायी संस्थाओं के अभियंता इस बांध से पार पाने का उपाय नहीं खोज पा रहे थे।
यह बांध पानी के तेज बहाव के बीच स्वयं टूट गया है। सोमवार को प्रशासन की टीम जब मौके पर कुंवारी गांव पहुंची तो ग्रामीणों ने उसे बांध के टूटने की सूचना दी। यह बांध कब टूटा प्रशासन को इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा है। प्रशासन के अनुसार पानी का तेज वेग बांध के बोल्डर और मलबे को भी बहाकर ले गया। इससे आपदा ग्रस्त कुंवारी गांव को बड़ी राहत मिली। गांव पर मंडरा रहा एक और प्राकृतिक आपदा का खतरा टल गया। पिछले दिनों हुई भारी बारिश के बाद बांध पानी से लबालब भर चुका था। बारिश के पानी के भारी दबाव के बीच बांध टूटने के बाद प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है।
विज्ञापन
कोट
शंभू नदी का बांध टूट गया है। इससे आपदाग्रस्त गांव पर बना बड़ा खतरा टल गया है। अब तक बांध से निपटने का उपाय नहीं सूझ रहा था। इससे प्रभावितों के साथ ही प्रशासन को भी राहत की सांस मिली है।
रवींद्र सिंह, एसडीएम, कपकोट
वर्ष 2013 की आपदा में कुंवारी गांव की तलहटी पर शंभू नदी में भारी बोल्डर के साथ ही मलबा गिरा था। इससे नदी पर तकरीबन 150 मीटर लंबा और 60 मीटर चौड़ा पानी का बांध बन गया था। बांध का पानी गांव की सरहद को लगातार काट रहा था। इससे भूस्खलन और पूरे गांव के धंसने का खतरा पैदा हो गया था। इस बीच आपदा प्रभावित क्षेत्र के दौरे पर आए जीएसआई के दो वैज्ञानिकों के दल ने बांध को गांव के लिए बड़ा खतरा बताया था। लेकिन काफी प्रयास के बाद भी प्रशासन और कार्यदायी संस्थाओं के अभियंता इस बांध से पार पाने का उपाय नहीं खोज पा रहे थे।
विज्ञापन
यह बांध पानी के तेज बहाव के बीच स्वयं टूट गया है। सोमवार को प्रशासन की टीम जब मौके पर कुंवारी गांव पहुंची तो ग्रामीणों ने उसे बांध के टूटने की सूचना दी। यह बांध कब टूटा प्रशासन को इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा है। प्रशासन के अनुसार पानी का तेज वेग बांध के बोल्डर और मलबे को भी बहाकर ले गया। इससे आपदा ग्रस्त कुंवारी गांव को बड़ी राहत मिली। गांव पर मंडरा रहा एक और प्राकृतिक आपदा का खतरा टल गया। पिछले दिनों हुई भारी बारिश के बाद बांध पानी से लबालब भर चुका था। बारिश के पानी के भारी दबाव के बीच बांध टूटने के बाद प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है।
विज्ञापन
कोट
शंभू नदी का बांध टूट गया है। इससे आपदाग्रस्त गांव पर बना बड़ा खतरा टल गया है। अब तक बांध से निपटने का उपाय नहीं सूझ रहा था। इससे प्रभावितों के साथ ही प्रशासन को भी राहत की सांस मिली है।
रवींद्र सिंह, एसडीएम, कपकोट