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धरमघर में ही रहेगा कस्तूरा मृग अनुसंधान केंद्र
Updated Sat, 06 Oct 2018 12:26 AM IST
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बागेश्वर। धरमघर स्थित देश का एकमात्र कस्तूरा मृग अनुसंधान संस्थान अब वन विभाग को हस्तांतरित नहीं होगा। न ही यहां से कस्तूरा मृग नैनीताल चिड़ियाघर जाएंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अनुसंधान केंद्र को बंद कर वन विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया रद्द कर दी है।
मंत्रालय ने 1974 में धरमघर के महरूड़ी में 40 नाली भूमि पर कस्तूरा मृग अनुसंधान केंद्र खोला था। इसका उद्देश्य दुर्लभ कस्तूरा का संरक्षण कर प्रजनन कराना और शोध के लिए कस्तूरी मुहैया कराना था। इसके लिए उच्च हिमालयी क्षेत्र से कस्तूरी मृग यहां लाए गए थे। 2004 में मंत्रालय ने केंद्र बंद कर वन विभाग को हस्तांतरित करने का फैसला लिया था। गुजरे सालों में केंद्र के हस्तांतरण की कवायद चलती रही लेकिन राज्य पशु के संरक्षण का सवाल नहीं सुलझ सका। इस बीच कस्तूरा मृृगों को नैनीताल चिड़ियाघर भेजने का प्रस्ताव भी आया। तय हुआ कि केंद्र से दो कस्तूरा चिड़ियाघर भेजे जाएंगे लेकिन अनुसंधान केंद्र सभी कस्तूरा मृगों के संरक्षण पर अड़ा था।
इस बीच मंत्रालय ने अनुसंधान केंद्र बंद करने का फैसला पलट दिया है। अब अनुसंधान केंद्र पूर्ववत संचालित होगा। केंद्र में पहले की तरह ही प्रजनन और उत्पादन से जुड़े अनुसंधान चलते रहेंगे। केंद्र को इसका लिखित आदेश मिला है। मंत्रालय के इस फैसले से केंद्र हटाने का विरोध कर रहे क्षेत्रवासियों को राहत मिली है हालांकि नैनीताल चिड़ियाघर में कस्तूरा मृग भेजने की कवायद को झटका भी लगा है।
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मंत्रालय ने केंद्र के हस्तांतरण का फैसला बदल दिया है। अब केंद्र वन विभाग या फिर किसी और एजेंसी को हस्तांतरित नहीं होगा। हमें इसका लिखित आदेश मिला है। केंद्र में पहले की तरह ही कस्तूरा के प्रजनन और कस्तूरी के उत्पादन का सिलसिला जारी रहेगा।
डॉ. ललित मोहन सिंह नयाल, प्रभारी, अनुसंधान केंद्र
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मंत्रालय ने 1974 में धरमघर के महरूड़ी में 40 नाली भूमि पर कस्तूरा मृग अनुसंधान केंद्र खोला था। इसका उद्देश्य दुर्लभ कस्तूरा का संरक्षण कर प्रजनन कराना और शोध के लिए कस्तूरी मुहैया कराना था। इसके लिए उच्च हिमालयी क्षेत्र से कस्तूरी मृग यहां लाए गए थे। 2004 में मंत्रालय ने केंद्र बंद कर वन विभाग को हस्तांतरित करने का फैसला लिया था। गुजरे सालों में केंद्र के हस्तांतरण की कवायद चलती रही लेकिन राज्य पशु के संरक्षण का सवाल नहीं सुलझ सका। इस बीच कस्तूरा मृृगों को नैनीताल चिड़ियाघर भेजने का प्रस्ताव भी आया। तय हुआ कि केंद्र से दो कस्तूरा चिड़ियाघर भेजे जाएंगे लेकिन अनुसंधान केंद्र सभी कस्तूरा मृगों के संरक्षण पर अड़ा था।
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इस बीच मंत्रालय ने अनुसंधान केंद्र बंद करने का फैसला पलट दिया है। अब अनुसंधान केंद्र पूर्ववत संचालित होगा। केंद्र में पहले की तरह ही प्रजनन और उत्पादन से जुड़े अनुसंधान चलते रहेंगे। केंद्र को इसका लिखित आदेश मिला है। मंत्रालय के इस फैसले से केंद्र हटाने का विरोध कर रहे क्षेत्रवासियों को राहत मिली है हालांकि नैनीताल चिड़ियाघर में कस्तूरा मृग भेजने की कवायद को झटका भी लगा है।
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मंत्रालय ने केंद्र के हस्तांतरण का फैसला बदल दिया है। अब केंद्र वन विभाग या फिर किसी और एजेंसी को हस्तांतरित नहीं होगा। हमें इसका लिखित आदेश मिला है। केंद्र में पहले की तरह ही कस्तूरा के प्रजनन और कस्तूरी के उत्पादन का सिलसिला जारी रहेगा।
डॉ. ललित मोहन सिंह नयाल, प्रभारी, अनुसंधान केंद्र