{"_id":"5cc5f74cbdec22075c1155e2","slug":"51556477772-bageshwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोहन का सलिंग, संतोष का सरयू बगड़ में हुआ अंतिम संस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोहन का सलिंग, संतोष का सरयू बगड़ में हुआ अंतिम संस्कार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागेश्वर। मछली मारने के लिए नदी में छोड़े करंट की चपेट में आने से मारे गए दोनों युवकों का रविवार को पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिए। परिजनों ने दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया है।
पुलिस के मुताबिक संतोष कुमार (28) पुत्र शंकर लाल निवासी सुमगढ़ और मोहन सिंह (30) पुत्र चंचल सिंह निवासी सलिंग ने शनिवार को मछली मारने के लिए नदी में करंट छोड़ा था। बाद में इसी करंट की चपेट में आने से दोनों युवकों की मौत हो गई थी। सूचना पर पहुंची कपकोट थाना पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। इधर रविवार को पोस्टमार्टम बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। संतोष का अंतिम संस्कार सरयू बगड़ में ही कर दिया गया।
उधर मोहन सिंह का शव जैसे ही सलिंग पहुंचा तो हर किसी की आंख नम हो गई। बाद में सलिंग में मोहन का अंतिम संस्कार किया गया। कपकोट पुलिस के मुताबिक अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है, रिपोर्ट मिलने के बाद नशे में होने, मौत की सटीक वजहों का पता चल सकेगा।
विज्ञापन
नदी में करंट फैलाने वालों को सबक सिखाएगा वन विभाग
बागेश्वर। मछली मारने के लिए नदी में करंट छोड़ने की घटना पर वन विभाग सख्त हो गया है। वन विभाग अब टीम बनाकर जगह-जगह छापामारी करेगा। इस तरह की हरकत को अंजाम देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
बागेश्वर में कई जगह पर नदी में करंट फैलाकर मछलियां मारने का खेल होता है। इसको लेकर वन विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है।
डीएफओ बलवंत सिंह शाही ने सभी रेंज अफसरों को निर्देश दिए है कि फील्ड कर्मी जंगलों में गश्त के दौरान इस तरह की हरकतों पर भी निगरानी करेंगे। यदि कोई नदी में कारतूस, करंट के जरिए मछलियों को मारते पकड़ा गया तो उसके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। वहीं आरक्षित वन क्षेत्र में इस तरह की घटना दर्ज होने पर गंभीर धाराओं में केस हो सकता है। डीएफओ बलवंत सिंह शाही ने बताया कि वन टीमें बनाकर छापामारी अभियान चलाया जाएगा। नदी में करंट फैलाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई जाएगी।
इनको नहीं किसी का डर
बागेश्वर। नदियों से मछली मारने से अभी भी युवा बाज नहीं आ रहे हैं। 24 घंटे पहले मछली मारने के लिए नदी में छोड़े करंट की चपेट में आने से हुई मौतों के बाद भी लोगों ने सबक नहीं लिया। वहीं पुलिस, प्रशासन और वन विभाग की लापरवाही से भी इनके हौसले बुलंद है। रविवार को भी सरयू और गोमती नदी में कांटा लगाकर, ब्लीचिंग पाउडर डाल कर मछलियों को मारने का खेल जारी है।
:
जय और वीरू की तरह थी मोहन-संतोष की जोड़ी
मोहन और संतोष दोनों बेहद जिगरी दोस्त थे। साथ में रहना घूमना किया करते थे। साथ जीने मरने की कसमें खाते थे। इनकी दोस्ती को देखकर लोग भी बातें भी करते थे। संतोष के दिल्ली से आने पर मोहन बेहद खुश था। इसी खुशी में दोनों ने पार्टी करने की सोची और मछली पकड़ने के लिए नदी में चले गए। दोनों दोस्तों के एक साथ चले जाने पर आज सबकी जुबां उनकी दोस्ती की कहानी थी।
विज्ञापन
पुलिस के मुताबिक संतोष कुमार (28) पुत्र शंकर लाल निवासी सुमगढ़ और मोहन सिंह (30) पुत्र चंचल सिंह निवासी सलिंग ने शनिवार को मछली मारने के लिए नदी में करंट छोड़ा था। बाद में इसी करंट की चपेट में आने से दोनों युवकों की मौत हो गई थी। सूचना पर पहुंची कपकोट थाना पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। इधर रविवार को पोस्टमार्टम बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। संतोष का अंतिम संस्कार सरयू बगड़ में ही कर दिया गया।
विज्ञापन
उधर मोहन सिंह का शव जैसे ही सलिंग पहुंचा तो हर किसी की आंख नम हो गई। बाद में सलिंग में मोहन का अंतिम संस्कार किया गया। कपकोट पुलिस के मुताबिक अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है, रिपोर्ट मिलने के बाद नशे में होने, मौत की सटीक वजहों का पता चल सकेगा।
विज्ञापन
नदी में करंट फैलाने वालों को सबक सिखाएगा वन विभाग
बागेश्वर। मछली मारने के लिए नदी में करंट छोड़ने की घटना पर वन विभाग सख्त हो गया है। वन विभाग अब टीम बनाकर जगह-जगह छापामारी करेगा। इस तरह की हरकत को अंजाम देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
बागेश्वर में कई जगह पर नदी में करंट फैलाकर मछलियां मारने का खेल होता है। इसको लेकर वन विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है।
डीएफओ बलवंत सिंह शाही ने सभी रेंज अफसरों को निर्देश दिए है कि फील्ड कर्मी जंगलों में गश्त के दौरान इस तरह की हरकतों पर भी निगरानी करेंगे। यदि कोई नदी में कारतूस, करंट के जरिए मछलियों को मारते पकड़ा गया तो उसके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। वहीं आरक्षित वन क्षेत्र में इस तरह की घटना दर्ज होने पर गंभीर धाराओं में केस हो सकता है। डीएफओ बलवंत सिंह शाही ने बताया कि वन टीमें बनाकर छापामारी अभियान चलाया जाएगा। नदी में करंट फैलाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई जाएगी।
इनको नहीं किसी का डर
बागेश्वर। नदियों से मछली मारने से अभी भी युवा बाज नहीं आ रहे हैं। 24 घंटे पहले मछली मारने के लिए नदी में छोड़े करंट की चपेट में आने से हुई मौतों के बाद भी लोगों ने सबक नहीं लिया। वहीं पुलिस, प्रशासन और वन विभाग की लापरवाही से भी इनके हौसले बुलंद है। रविवार को भी सरयू और गोमती नदी में कांटा लगाकर, ब्लीचिंग पाउडर डाल कर मछलियों को मारने का खेल जारी है।
:
जय और वीरू की तरह थी मोहन-संतोष की जोड़ी
मोहन और संतोष दोनों बेहद जिगरी दोस्त थे। साथ में रहना घूमना किया करते थे। साथ जीने मरने की कसमें खाते थे। इनकी दोस्ती को देखकर लोग भी बातें भी करते थे। संतोष के दिल्ली से आने पर मोहन बेहद खुश था। इसी खुशी में दोनों ने पार्टी करने की सोची और मछली पकड़ने के लिए नदी में चले गए। दोनों दोस्तों के एक साथ चले जाने पर आज सबकी जुबां उनकी दोस्ती की कहानी थी।