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कपूरी-भंडारीगांव नहर आंशिक चलने से से फसलें सूखी
Updated Sat, 07 Jul 2018 12:05 AM IST
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बागेश्वर। सुदूर कमस्यारघाटी की कपूरी-भंडारीगांव नहर के आंशिक चलने से खरीफ की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग से नहर में हेड से टेल तक पानी चलाने की कई बार मांग की लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने मांग पूरी करने को कहा है।
दिवंगत त्रिलोक सिंह डसीला के अथक प्रयासों से 1981-82 में बनी नहर से दस हजार नाली भूमि की सिंचाई होती है। 2006, 2010 की आपदा में बगराटी के समीप नहर ध्वस्त हो गई थी। नहर में तब से पानी नहीं चल रहा है। नहर में जेठीगाड़ तक पानी नहीं पहुंचने से धान की फसल सूखने लगी है।
नहर की देखरेख के लिए बेलदार तक नहीं है। किसानों का कहना है कि पानी नहीं आने से फसल बर्बाद हो रही है। उन्होंने नहर में शीघ्र पानी नहीं चलने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। वहां बीडीसी सदस्य कुंदन बोरा, जीवन डसीला, नारायण सिंह, मोहन जोशी, गणेश बोरा, आनंद सिंह, बालम सिंह, प्रताप सिंह आदि थे।
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दिवंगत त्रिलोक सिंह डसीला के अथक प्रयासों से 1981-82 में बनी नहर से दस हजार नाली भूमि की सिंचाई होती है। 2006, 2010 की आपदा में बगराटी के समीप नहर ध्वस्त हो गई थी। नहर में तब से पानी नहीं चल रहा है। नहर में जेठीगाड़ तक पानी नहीं पहुंचने से धान की फसल सूखने लगी है।
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नहर की देखरेख के लिए बेलदार तक नहीं है। किसानों का कहना है कि पानी नहीं आने से फसल बर्बाद हो रही है। उन्होंने नहर में शीघ्र पानी नहीं चलने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। वहां बीडीसी सदस्य कुंदन बोरा, जीवन डसीला, नारायण सिंह, मोहन जोशी, गणेश बोरा, आनंद सिंह, बालम सिंह, प्रताप सिंह आदि थे।
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