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आग से होती है बहुत हानि, न करें मनमानी
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कपकोट। सरस्वती शिशु मंदिर भराड़ी में वनाग्नि सुरक्षा को लेकर गोष्ठी का आयोजन किया गया। बैठक में बच्चों को जंगलों में आग से होने वाले नुकसान और बचाव के तरीके बताए गए। बच्चों को वनाग्नि सुरक्षा के पोस्ट कार्ड भी बांटे गए।
वन विभाग की टीम सोमवार को शिशु मंदिर पहुंची। टीम ने बच्चों को बताया कि जंगलों से हमको ईंधन, शुद्ध हवा, पानी आदि मिलता है। जीवनदायिनी ऑक्सीजन भी हमें पेड़ों से मिलती हैं इसलिए जंगलों को आग से बचाना चाहिए। उन्होंने बताया कि माचिस की जलती तीली, बीड़ी-सिगरेट फेंकने, खाना पकाने के लिए चूल्हे के जलते उपले फेंकने आदि से आग लगती है। इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है।
वन्य जीव पशु, पक्षी की मौत हो जाती है। हम सभी को जंगलों को आग से बचाना चाहिए। इस बाबत बच्चों को वनाग्नि जागरूकता के पोस्टकार्ड भी बांटे गए। बच्चों को अभिभावकों को भी आग से बचाने के लिए प्रेरित करने की अपील की। इस दौरान नंदा बल्लभ तिवारी, दिनेश चंद्र, भूपेंद्र सिंह कोरंगा, सतीश चंद्र मिश्रा, भावना शर्मा, भावना कोरंगा, राजेंद्र सिंह गढ़िया, हयात सिंह आदि थे।
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नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर बताया वनाें का महत्व
गरुड़(बागेश्वर)। वनों को आग से से बचाने को वन विभाग गंभीर है। विभाग ने स्कूल में नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन कर जागरूकता अभियान शुरू किया। विभाग ने जीआईसी गरुड़, रवाईखाल और इंटर कालेज गागरीगोल में कार्यशाला कर बच्चों को वनों को आग से बचाने के लिए जागृत किया। कार्यशालाओं में डीएफओ बीएस शाही ने कहा कि वनों को आग से बचाने में छात्र छात्राओं का हमेशा योगदान रहा।
उन्होंने छात्र छात्राओं से वनों को आग से बचाने के हर संभव सहयोग देने को कहा। वन रेंजर गढ़खेत हरीश खर्कवाल और वन रेंजर बैजनाथ जीएस बिष्ट ने वन पंचायत सरपंचों, महिला मंगल दलों, ग्राम प्रधानों और स्वयंसेवी संगठनों से वनों को आग से बचाने में सहयोग देने को कहा। कार्यशालाओं में वन विभाग ने बच्चों को उत्तराखंड वन हमेशा तुमर दगड़ कार्ड बांटे।
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वन विभाग की टीम सोमवार को शिशु मंदिर पहुंची। टीम ने बच्चों को बताया कि जंगलों से हमको ईंधन, शुद्ध हवा, पानी आदि मिलता है। जीवनदायिनी ऑक्सीजन भी हमें पेड़ों से मिलती हैं इसलिए जंगलों को आग से बचाना चाहिए। उन्होंने बताया कि माचिस की जलती तीली, बीड़ी-सिगरेट फेंकने, खाना पकाने के लिए चूल्हे के जलते उपले फेंकने आदि से आग लगती है। इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है।
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वन्य जीव पशु, पक्षी की मौत हो जाती है। हम सभी को जंगलों को आग से बचाना चाहिए। इस बाबत बच्चों को वनाग्नि जागरूकता के पोस्टकार्ड भी बांटे गए। बच्चों को अभिभावकों को भी आग से बचाने के लिए प्रेरित करने की अपील की। इस दौरान नंदा बल्लभ तिवारी, दिनेश चंद्र, भूपेंद्र सिंह कोरंगा, सतीश चंद्र मिश्रा, भावना शर्मा, भावना कोरंगा, राजेंद्र सिंह गढ़िया, हयात सिंह आदि थे।
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नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर बताया वनाें का महत्व
गरुड़(बागेश्वर)। वनों को आग से से बचाने को वन विभाग गंभीर है। विभाग ने स्कूल में नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन कर जागरूकता अभियान शुरू किया। विभाग ने जीआईसी गरुड़, रवाईखाल और इंटर कालेज गागरीगोल में कार्यशाला कर बच्चों को वनों को आग से बचाने के लिए जागृत किया। कार्यशालाओं में डीएफओ बीएस शाही ने कहा कि वनों को आग से बचाने में छात्र छात्राओं का हमेशा योगदान रहा।
उन्होंने छात्र छात्राओं से वनों को आग से बचाने के हर संभव सहयोग देने को कहा। वन रेंजर गढ़खेत हरीश खर्कवाल और वन रेंजर बैजनाथ जीएस बिष्ट ने वन पंचायत सरपंचों, महिला मंगल दलों, ग्राम प्रधानों और स्वयंसेवी संगठनों से वनों को आग से बचाने में सहयोग देने को कहा। कार्यशालाओं में वन विभाग ने बच्चों को उत्तराखंड वन हमेशा तुमर दगड़ कार्ड बांटे।