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पहले झूठे वादे नहीं करते थे नेता
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बागेश्वर। पहले नेता चुनाव के दौरान झूठे आश्वासन देने से बचते थे। जो आश्वासन देते थे उसे जीतने के बाद हर हाल में पूरा भी करते थे। जीवन में मतदान का बड़ा महत्व है। इसे जरूर करना चाहिए लेकिन इसे अपने विवेक से ही करना चाहिए। यह कहना है बागेश्वर ब्लाक के दोफाड़ गांव के दिवंगत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रताप सिंह कालाकोटी की 104 साल की पत्नी यशोदा देवी का।
वह कहती हैं देश की आजादी के बाद गांवों में सड़क, बिजली, पानी, स्कूल और अस्पताल आदि सुविधाएं उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती थी। चुनाव प्रचार में राजनैतिक दलों के कार्यकर्ता आते थे बात सिर्फ विकास की ही होती थी। तब कार्यकर्ताओं की भी बड़ी इज्जत होती थी, उनके रहने खाते की व्यवस्था भी करते थे। मतदाता भी उनकी बातों पर यकीन कर उन्हीं के पक्ष में मतदान करते थे। आज प्रत्याशी कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज के साथ आते हैं तमाम आश्वासन दे जाते हैं लेकिन होता कुछ नहीं।
कुछ मतदाता लालच में आकर ठीक मतदान की पहली शाम बदल जा रहे हैं। जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। नेताओं का हाल यह हो गया है कि वह भ्रमण के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों से मिलना तो दूर उन्हें सार्वजनिक समारोहों में बुलाना भी उचित नहीं समझ रहे हैं।
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वह कहती हैं देश की आजादी के बाद गांवों में सड़क, बिजली, पानी, स्कूल और अस्पताल आदि सुविधाएं उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती थी। चुनाव प्रचार में राजनैतिक दलों के कार्यकर्ता आते थे बात सिर्फ विकास की ही होती थी। तब कार्यकर्ताओं की भी बड़ी इज्जत होती थी, उनके रहने खाते की व्यवस्था भी करते थे। मतदाता भी उनकी बातों पर यकीन कर उन्हीं के पक्ष में मतदान करते थे। आज प्रत्याशी कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज के साथ आते हैं तमाम आश्वासन दे जाते हैं लेकिन होता कुछ नहीं।
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कुछ मतदाता लालच में आकर ठीक मतदान की पहली शाम बदल जा रहे हैं। जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। नेताओं का हाल यह हो गया है कि वह भ्रमण के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों से मिलना तो दूर उन्हें सार्वजनिक समारोहों में बुलाना भी उचित नहीं समझ रहे हैं।
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