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राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल सनगाड़ में तीन साल से डाक्टर नहीं
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धरमघर (बागेश्वर)। आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए सरकार तमाम योजनाएं तैयार करने की बात कह रही है मगर जमीनी स्तर पर हालात उलट ही है। कांडा तहसील के सुदूरवर्ती राजकीय आयुुर्वेदिक चिकित्सालय में तीन साल से डॉक्टर हीं नहीं है। अस्पताल एकमात्र फार्मासिस्ट के भरोसे है। ग्रामीणों को इलाज के लिए 60 किमी. दूर बागेश्वर और 35 किमी दूर बेड़ीनाग की दौड़ लगानी पड़ रही है।
कांडा तहसील के सनगाड़ गांव में आयुर्वेदिक चिकित्सालय की स्थापना 2010 में हो गई थी। सनगाड़ के साथ ही बास्ती, द्वारी, थूमा, सिमगड़ी, सनेती, बैैकोड़ी और मझेड़ा के ग्रामीण इलाज के लिए इस ही अस्पताल पर निर्भर हैं। यहां तैनात डॉक्टर का 15 नवंबर 2015 को तबादला हो गया था।
तब से यह पद खाली चल रहा है। फार्मेसिस्ट अनूप कंडारी पर ही अस्पताल का सारा दारोमदार है। यहां वार्ड ब्वॉय और दो पंचकर्म सहायक हैं। ग्रामीणों ने कहा कि आयुर्वेद की दवाइयां देर से फायदा करती हैं लेकिन इनके सेवन से बीमारी जड़ से ही समाप्त हो जाती है, साइड इफेक्ट भी नहीं होता है। डॉक्टर नहीं होने के कारण अस्पताल में अब गिने चुने लोग ही आते हैं। अधिकतर लोगों को बागेश्वर और बेड़ीनाग की दौड़ लगानी पड़ रही है इसमें उनका काफी समय और धन बर्बाद हो रहा है। ग्रामीणों ने शासन से अस्पताल में जल्द डॉक्टर की तैनाती की मांग की है।
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अस्पताल की समस्याएं संज्ञान में हैं। डॉक्टर की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। आयोग से डॉक्टर मिलने पर तैनाती हो जाएगी।
- डॉ. देवेंद्र सिंह नेगी, जिला आयुर्वेद और यूनानी अधिकारी बागेश्वर।
राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय सनगाड़ में डॉक्टर की शीघ्र तैनाती के लिए देहरादून जाकर मुख्यमंत्री से बात करूंगा।
- बलवंत भौर्याल, विधायक विधानसभा क्षेत्र बागेश्वर।
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कांडा तहसील के सनगाड़ गांव में आयुर्वेदिक चिकित्सालय की स्थापना 2010 में हो गई थी। सनगाड़ के साथ ही बास्ती, द्वारी, थूमा, सिमगड़ी, सनेती, बैैकोड़ी और मझेड़ा के ग्रामीण इलाज के लिए इस ही अस्पताल पर निर्भर हैं। यहां तैनात डॉक्टर का 15 नवंबर 2015 को तबादला हो गया था।
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तब से यह पद खाली चल रहा है। फार्मेसिस्ट अनूप कंडारी पर ही अस्पताल का सारा दारोमदार है। यहां वार्ड ब्वॉय और दो पंचकर्म सहायक हैं। ग्रामीणों ने कहा कि आयुर्वेद की दवाइयां देर से फायदा करती हैं लेकिन इनके सेवन से बीमारी जड़ से ही समाप्त हो जाती है, साइड इफेक्ट भी नहीं होता है। डॉक्टर नहीं होने के कारण अस्पताल में अब गिने चुने लोग ही आते हैं। अधिकतर लोगों को बागेश्वर और बेड़ीनाग की दौड़ लगानी पड़ रही है इसमें उनका काफी समय और धन बर्बाद हो रहा है। ग्रामीणों ने शासन से अस्पताल में जल्द डॉक्टर की तैनाती की मांग की है।
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अस्पताल की समस्याएं संज्ञान में हैं। डॉक्टर की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। आयोग से डॉक्टर मिलने पर तैनाती हो जाएगी।
- डॉ. देवेंद्र सिंह नेगी, जिला आयुर्वेद और यूनानी अधिकारी बागेश्वर।
राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय सनगाड़ में डॉक्टर की शीघ्र तैनाती के लिए देहरादून जाकर मुख्यमंत्री से बात करूंगा।
- बलवंत भौर्याल, विधायक विधानसभा क्षेत्र बागेश्वर।