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सुबह तड़के तक आबादी में गुर्राता रहा तेंदुआ
Updated Sun, 07 Oct 2018 11:25 PM IST
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बागेश्वर। तेंदुए ने एक बार फिर नगर में दस्तक दी है। नुमाईशखेत में आधी रात तक तेंदुआ घरों की छत पर गुर्राने के साथ ही चहलकदमी करता रहा। क्षेत्रवासियों ने पटाखे फोड़कर तेंदुए को भगाने की नाकाम कोशिश भी की। रात भर छत पर तेंदुए की मौजूदगी से लोग सहमे रहे। आबादी में डटे तेंदुए के नदीगांव का आदमखोर होने की आशंका भी जताई जा रही है।
एक बार फिर शनिवार रात को तेंदुआ नुमाईशखेत में उतर आया। तेंदुए को देख क्षेत्रवासियों में खलबली मच गई। रात ढाई बजे तक तेंदुआ घरों की छतों के साथ ही नुमाईशखेत मैदान में गुर्राता रहा। तेंदुए की गुर्राहट सुनकर लावारिस जानवरों में भी दहशत फैल गई। देर रात तक आवारा जानवर शोर मचाते रहे। डर के मारे लोग रात भर ठीक से सो नहीं सके। तेंदुए के आदमखोर होने की आशंका भी जताई जा रही है। बता दें कि नदी गांव का तेंदुआ अब तक खुला घूम रहा है। इस बीच आबादी में तेंदुए की आवाजाही से खतरा और बढ़ गया है। क्षेत्रवासियों ने तेंदुए को जल्द पकड़ने, ढेर करने की मांग दोहराई है।
शाम होते ही तेंदुए का खतरा खड़ा हो जाता है। बच्चों को घर से बाहर भेजने मेें डर लग रहा है। विभाग ने अभी तक तेंदुओं की आबादी में आवाजाही रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
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- प्रेमा उपाध्याय, नुमाईशखेत।
पिछले एक माह से तेंदुआ आबादी में नजर आ रहा है। दहशत के बीच घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। सुरक्षा देने में विभाग असफल साबित हुआ है।
- किरन जोशी, नुमाईशखेत।
जंगल में भोजन के अभाव के चलते तेंदुए आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। वन विभाग वन्य जीवों की तादाद घटने का जिम्मेदार है। हमलों को टालने के लिए जंगल में खाद्य श्रंखला मजबूत होनी चाहिए।
- गीता उपाध्याय, नुमाईशखेत।
तेंदुआ लगातार घर तक आ रहा है। छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी है। विभाग की लापरवाही ही तेंदुओं के हमलों की जिम्मेदार है। इससे निपटने के लिए जल्द ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
- माया साह, नुमाईशखेत।
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एक बार फिर शनिवार रात को तेंदुआ नुमाईशखेत में उतर आया। तेंदुए को देख क्षेत्रवासियों में खलबली मच गई। रात ढाई बजे तक तेंदुआ घरों की छतों के साथ ही नुमाईशखेत मैदान में गुर्राता रहा। तेंदुए की गुर्राहट सुनकर लावारिस जानवरों में भी दहशत फैल गई। देर रात तक आवारा जानवर शोर मचाते रहे। डर के मारे लोग रात भर ठीक से सो नहीं सके। तेंदुए के आदमखोर होने की आशंका भी जताई जा रही है। बता दें कि नदी गांव का तेंदुआ अब तक खुला घूम रहा है। इस बीच आबादी में तेंदुए की आवाजाही से खतरा और बढ़ गया है। क्षेत्रवासियों ने तेंदुए को जल्द पकड़ने, ढेर करने की मांग दोहराई है।
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शाम होते ही तेंदुए का खतरा खड़ा हो जाता है। बच्चों को घर से बाहर भेजने मेें डर लग रहा है। विभाग ने अभी तक तेंदुओं की आबादी में आवाजाही रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
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- प्रेमा उपाध्याय, नुमाईशखेत।
पिछले एक माह से तेंदुआ आबादी में नजर आ रहा है। दहशत के बीच घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। सुरक्षा देने में विभाग असफल साबित हुआ है।
- किरन जोशी, नुमाईशखेत।
जंगल में भोजन के अभाव के चलते तेंदुए आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। वन विभाग वन्य जीवों की तादाद घटने का जिम्मेदार है। हमलों को टालने के लिए जंगल में खाद्य श्रंखला मजबूत होनी चाहिए।
- गीता उपाध्याय, नुमाईशखेत।
तेंदुआ लगातार घर तक आ रहा है। छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी है। विभाग की लापरवाही ही तेंदुओं के हमलों की जिम्मेदार है। इससे निपटने के लिए जल्द ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
- माया साह, नुमाईशखेत।