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बागवानी से तकदीर बदलने निकले मनोज के अरमानों पर ओलों की मार
Updated Tue, 01 May 2018 10:53 PM IST
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जैविक खेती की ओर किसानों का ध्यान
- फोटो : Getty
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बागेश्वर। नौकरी के बजाय खेती से तकदीर बदलने निकले मनोज के अरमानों पर ओलों की मार पड़ गई। ओलों से न केवल आठ नाली जमीन में बोई गई सब्जियां तहस-नहस हो गईं बल्कि आडू, पुलम, खुबानी सहित अन्य फलदार पेड़ों को भी काफी क्षति पहुंची है। ओलों की मार से इस युवा बागवान को डेढ़ से दो लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
जौलकांडे गांव निवासी मनोज भट्ट ने पॉलीटेक्निक से मेकेनिकल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा लेने के बाद किसी कंपनी में नौकरी करने के बजाय बंजर हो रहे खेतों को ही रोजगार का जरिया बनाने की ठानी। सिंचाई की पर्याप्त सुविधा न होने के बावजूद दो वर्ष पूर्व उन्होंने आठ नाली भूमि में सब्जी, फलदार पौधे लगाकर बागवानी की शुरुआत की। इस वर्ष उन्होंने बड़ी मात्रा में सब्जियां बोई थीं, लेकिन भीषण ओलावृष्टि से खेतों में तैयार हो रही शिमला मिर्च, टमाटर, करेला, लौकी, खीरा, भिंडी और धनिया के पौध तहस-नहस हो गए। पुलम, आडू, खुबानी को भी व्यापक नुकसान हुआ है। ओलों की मार से मनोज को लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये का नुकसान हुआ है। प्रभावित किसान मनोज भट्ट ने प्रशासन से सब्जियों, फलदार पेड़ों को पहुंचे नुकसान का उचित मुआवजा देने की गुहार लगाई है।
आठ नाली जमीन में लगाई सब्जियों के साथ ही फल भी बर्बाद
युवा बागवान मनोज को दो लाख का नुकसान
निराश नहीं हैं मनोज
बागेश्वर। हाड़तोड़ मेहनत के बाद बाजार में सब्जियों का उचित मूल्य पहाड़ के किसानों को नहीं मिलता है। ऊपर से मौसम की मार इस मेहनत को और अधिक बढ़ा कर देती है। इसके बावजूद खेती किसानी कर रहे मनोज भट्ट के हौसले में कोई कमी नहीं आई है। खेती के साथ छोटी सी डेयरी चलाने वाले मनोज का कहना है कि मौसम की मार से हर सीजन में बागवानी को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए वह मुर्गी बाड़ा, बकरी फार्म भी खोलेंगे। युवा किसान मनोज भट्ट का कहना है कि शासन-प्रशासन का सहयोग मिले तो बंजर जमीन में सब्जियों की अच्छी पैदावार कर अन्य युवाओं को भी रोजगार दिया जा सकता है।
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- सब्जी, फलों का बीमा होता है। रबी, खरीफ दोनों सीजन में बीमा किया जाता है। नुकसान होने की सूरत में भुगतान किया जाता है। किसानों को सब्जियों, फलदार पेड़ों का बीमा करना चाहिए।
- कुलदीप जोशी, सहायक उद्यान अधिकारी, बागेश्वर।
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जौलकांडे गांव निवासी मनोज भट्ट ने पॉलीटेक्निक से मेकेनिकल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा लेने के बाद किसी कंपनी में नौकरी करने के बजाय बंजर हो रहे खेतों को ही रोजगार का जरिया बनाने की ठानी। सिंचाई की पर्याप्त सुविधा न होने के बावजूद दो वर्ष पूर्व उन्होंने आठ नाली भूमि में सब्जी, फलदार पौधे लगाकर बागवानी की शुरुआत की। इस वर्ष उन्होंने बड़ी मात्रा में सब्जियां बोई थीं, लेकिन भीषण ओलावृष्टि से खेतों में तैयार हो रही शिमला मिर्च, टमाटर, करेला, लौकी, खीरा, भिंडी और धनिया के पौध तहस-नहस हो गए। पुलम, आडू, खुबानी को भी व्यापक नुकसान हुआ है। ओलों की मार से मनोज को लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये का नुकसान हुआ है। प्रभावित किसान मनोज भट्ट ने प्रशासन से सब्जियों, फलदार पेड़ों को पहुंचे नुकसान का उचित मुआवजा देने की गुहार लगाई है।
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आठ नाली जमीन में लगाई सब्जियों के साथ ही फल भी बर्बाद
युवा बागवान मनोज को दो लाख का नुकसान
निराश नहीं हैं मनोज
बागेश्वर। हाड़तोड़ मेहनत के बाद बाजार में सब्जियों का उचित मूल्य पहाड़ के किसानों को नहीं मिलता है। ऊपर से मौसम की मार इस मेहनत को और अधिक बढ़ा कर देती है। इसके बावजूद खेती किसानी कर रहे मनोज भट्ट के हौसले में कोई कमी नहीं आई है। खेती के साथ छोटी सी डेयरी चलाने वाले मनोज का कहना है कि मौसम की मार से हर सीजन में बागवानी को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए वह मुर्गी बाड़ा, बकरी फार्म भी खोलेंगे। युवा किसान मनोज भट्ट का कहना है कि शासन-प्रशासन का सहयोग मिले तो बंजर जमीन में सब्जियों की अच्छी पैदावार कर अन्य युवाओं को भी रोजगार दिया जा सकता है।
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- सब्जी, फलों का बीमा होता है। रबी, खरीफ दोनों सीजन में बीमा किया जाता है। नुकसान होने की सूरत में भुगतान किया जाता है। किसानों को सब्जियों, फलदार पेड़ों का बीमा करना चाहिए।
- कुलदीप जोशी, सहायक उद्यान अधिकारी, बागेश्वर।