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गीली और सड़ी लकड़ियों से शवदाह की चुनौती
Updated Tue, 28 Aug 2018 11:28 PM IST
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बागेश्वर। कुमाऊं की काशी में गीली और सड़ी लकड़ियों से शवदाह की चुनौती खड़ी हो गई है। खुले आसमान के नीचे चले रहे इकलौते लकड़ी डिपो में भीगी और सड़ी-गली लकड़ियां मिल रही हैं। इससे शवदाह में दिक्कत आ रही है। संगम पर अंत्येष्टि पर चिता बमुश्किल जल रही है। अधजली चिता के नदी में बहने का खतरा भी बढ़ गया है।
बागनाथ नगरी के संगम पर बागेश्वर ही नहीं, अल्मोड़ा जिले से भी लोग शवदाह के लिए आते हैं। संगम पर औसतन रोजाना दर्जन भर अधिक अंत्येष्टि होती है। अधिकांश लोग लकड़ी के लिए तहसील रोड स्थित वन विकास निगम के टॉल पर निर्भर है। बागेश्वर में लकड़ी का यह इकलौता टॉल है। बारिश के पानी से लकड़ी के खराब होने की पूरी आशंका के बाद भी निगम का लकड़ी टॉल खुले आसमान के नीचे चल रहा है। बिना छत के लकड़ियां बारिश के पानी की मार झेल रही हैं।
कुछ क्षेत्रवासियों ने बताया कि गीली और खराब लकड़ियों के चलते पूरा शवदाह नहीं हो पा रहा। मजबूरन लोग अधजली चिता नदी में बहा रहे हैं। इसके इतर लकड़ी बेचकर आय जुटाने वाला महकमा अभी तक टॉल के लिए टिनशेड का निर्माण तक नहीं कर सका है। जबकि क्षेत्रवासी सालों से टॉल में टिनशेड निर्माण की मांग कर रहे हैं।
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टिनशेड निर्माण प्रस्तावित है लेकिन अपनी भूमि न होने से अब तक निर्माण नहीं हो पाया। क्षेत्रवासियों की समस्या को देखते हुए नए सिरे से शवदाह गृह का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
- विजेंद्र कुमार, डीएलएम, वन विकास निगम बागेश्वर।
नगर में एकमात्र लकड़ी टॉल पर जिले भर के लोग निर्भर हैं। गीली लकड़ियों से शवदाह चुनौती बन जाता है। वन विकास निगम जल्द निर्माण नहीं करेगा तो आंदोलन करेंगे।
-हरीश सोनी, व्यापार मंडल अध्यक्ष
टॉल से गीली और सड़ी-गली लकड़ियां मिल रही हैं। इससे शवदाह में कठिनाई हो रही है। लंबी मांग के बाद भी वन विकास निगम दुरुस्त जलौनी लकड़ी मुहैया नहीं करा पा रहा है।
-घनानंद जोशी, एडवोकेट
भारी असुविधा को देखते हुए क्षेत्रवासी काफी समय से लकड़ी टॉल में टिनशेड निर्माण की मांग कर रहे हैं लेकिन अभी तक लकड़ी को बारिश से बचाने का बंदोबस्त नहीं किया गया।
-हरीश कालाकोटी, व्यापारी
विकास निगम लकड़ी की एवज में पूरी धनराशि वसूल रहा है लेकिन टॉल से मिल रही लकड़ी जलाने लायक नहीं है। क्षेत्रवासियों को कठिनाईयों के साथ ही आर्थिक चपत भी लग रही है।
-आलोक साह, व्यापारी
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बागनाथ नगरी के संगम पर बागेश्वर ही नहीं, अल्मोड़ा जिले से भी लोग शवदाह के लिए आते हैं। संगम पर औसतन रोजाना दर्जन भर अधिक अंत्येष्टि होती है। अधिकांश लोग लकड़ी के लिए तहसील रोड स्थित वन विकास निगम के टॉल पर निर्भर है। बागेश्वर में लकड़ी का यह इकलौता टॉल है। बारिश के पानी से लकड़ी के खराब होने की पूरी आशंका के बाद भी निगम का लकड़ी टॉल खुले आसमान के नीचे चल रहा है। बिना छत के लकड़ियां बारिश के पानी की मार झेल रही हैं।
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कुछ क्षेत्रवासियों ने बताया कि गीली और खराब लकड़ियों के चलते पूरा शवदाह नहीं हो पा रहा। मजबूरन लोग अधजली चिता नदी में बहा रहे हैं। इसके इतर लकड़ी बेचकर आय जुटाने वाला महकमा अभी तक टॉल के लिए टिनशेड का निर्माण तक नहीं कर सका है। जबकि क्षेत्रवासी सालों से टॉल में टिनशेड निर्माण की मांग कर रहे हैं।
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टिनशेड निर्माण प्रस्तावित है लेकिन अपनी भूमि न होने से अब तक निर्माण नहीं हो पाया। क्षेत्रवासियों की समस्या को देखते हुए नए सिरे से शवदाह गृह का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
- विजेंद्र कुमार, डीएलएम, वन विकास निगम बागेश्वर।
नगर में एकमात्र लकड़ी टॉल पर जिले भर के लोग निर्भर हैं। गीली लकड़ियों से शवदाह चुनौती बन जाता है। वन विकास निगम जल्द निर्माण नहीं करेगा तो आंदोलन करेंगे।
-हरीश सोनी, व्यापार मंडल अध्यक्ष
टॉल से गीली और सड़ी-गली लकड़ियां मिल रही हैं। इससे शवदाह में कठिनाई हो रही है। लंबी मांग के बाद भी वन विकास निगम दुरुस्त जलौनी लकड़ी मुहैया नहीं करा पा रहा है।
-घनानंद जोशी, एडवोकेट
भारी असुविधा को देखते हुए क्षेत्रवासी काफी समय से लकड़ी टॉल में टिनशेड निर्माण की मांग कर रहे हैं लेकिन अभी तक लकड़ी को बारिश से बचाने का बंदोबस्त नहीं किया गया।
-हरीश कालाकोटी, व्यापारी
विकास निगम लकड़ी की एवज में पूरी धनराशि वसूल रहा है लेकिन टॉल से मिल रही लकड़ी जलाने लायक नहीं है। क्षेत्रवासियों को कठिनाईयों के साथ ही आर्थिक चपत भी लग रही है।
-आलोक साह, व्यापारी