{"_id":"5c9a7989bdec221448559614","slug":"151553627529-bageshwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुंवारी, बोरबलड़ा और झूनी जैसे कई गांवों में पहुंचना आसान नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुंवारी, बोरबलड़ा और झूनी जैसे कई गांवों में पहुंचना आसान नहीं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागेश्वर। प्रचार के लिए पर्याप्त समय न होने से प्रत्याशियों का सड़क से 12 से 15 किमी पैदल दूर बसेे कुंवारी, बोरबलड़ा और झूनी जैसे कई गांवों में पहुंचना आसान काम नहीं है।
कपकोट ब्लाक के रिखाड़ी-बदियाकोट सड़क से 15 किमी दूर कुंवारी, 12 किमी बोरबलड़ा और मुनार-तरसाल सड़क से आठ किमी दूर झूनी, कीमू समेत कई गांव आज तक सड़क से नहीं जुड़ सके हैं। कई परिवार पलायन करके भराड़ी, बागेश्वर, अल्मोड़ा और हल्द्वानी के लिए चले गए हैं।
वैसे भी सांसद प्रत्याशी के लिए यातायात विहीन इन गांवों की पदयात्रा कर जनसंपर्क करना खासा चुनौतीपूर्ण हैं। इन गांवों के प्रचार-प्रसार का सारा दारोमदार स्थानीय कार्यकर्ताओं के ही भरोसे ही रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
कपकोट ब्लाक के रिखाड़ी-बदियाकोट सड़क से 15 किमी दूर कुंवारी, 12 किमी बोरबलड़ा और मुनार-तरसाल सड़क से आठ किमी दूर झूनी, कीमू समेत कई गांव आज तक सड़क से नहीं जुड़ सके हैं। कई परिवार पलायन करके भराड़ी, बागेश्वर, अल्मोड़ा और हल्द्वानी के लिए चले गए हैं।
विज्ञापन
वैसे भी सांसद प्रत्याशी के लिए यातायात विहीन इन गांवों की पदयात्रा कर जनसंपर्क करना खासा चुनौतीपूर्ण हैं। इन गांवों के प्रचार-प्रसार का सारा दारोमदार स्थानीय कार्यकर्ताओं के ही भरोसे ही रहेगा।
विज्ञापन