{"_id":"5a2c1c4b4f1c1ba7668b907a","slug":"151512840267-bageshwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानवाधिकार हनन के मामलों में पहाड़ भी पीछे नहीं: भट्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मानवाधिकार हनन के मामलों में पहाड़ भी पीछे नहीं: भट्ट
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:54 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागेश्वर। मानवाधिकार हनन के मामलों में पर्वतीय क्षेत्र भी पीछे नहीं है। जनता को न्याय दिलाने के लिए गंभीर मामलों को न्यायालय में ले जाया जाता है। यह बात पीयूसीएल (पीपुल्स यूनियन सिविल लिबर्टी) के प्रदेश उपाध्यक्ष एनबी भट्ट ने कही।
अमर उजाला से बातचीत में भट्ट ने बताया कि बागेश्वर जिले में मानवाधिकार हनन के चार गंभीर मामले संज्ञान में आए। इनमें से 1995 में डोबा क्षेत्र की बारात में हुई हत्या, 1998 में दफौट क्षेत्र में पुलिस द्वारा किया गया पूर्व फौजी का एनकाउंटर, जिला मुख्यालय के नजदीकी गांव में बच्ची के साथ रेप और 1999 में एक एड्स पीड़ित के साथ किए गए दुर्व्यवहार के मामले प्रमुख रूप से शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि एड्स पीड़ित व्यक्ति के साथ न केवल जानवरों जैसा व्यवहार किया गया, बल्कि उसे जानवरों को बांधने वाले गोठ में रखा गया था। जानकारी मिलने पर उस व्यक्ति को गोठ से बाहर निकालकर चिकित्सा के प्रबंध किए गए। उन्होंने बताया कि मानवाधिकार के उक्त तीन मामलों को हाइकोर्ट में ले जाकर पीड़ितों को न्याय दिलाया गया।
विज्ञापन
प्रदेश उपाध्यक्ष भट्ट ने बताया कि हाल ही में सरकार ने शराब के लिए स्टेट हाइवे को जिला हाइवे घोषित कर दिया था। इस मामले में भी पीयूसीएल की ओर से हाइकोर्ट में याचिका दायर की गई। बागेश्वर के 11 ग्राम पंचायतों को जनता के विरोध के बावजूद पालिका में शामिल किया गया है।
यह मानवाधिकार का उल्लंघन है। इस पर भी उन्होंने हाइकोर्ट में याचिका दायर की है। मानवाधिकार हनन से संबंधित मामले सामने आने पर पीयूसीएल स्वयं क्षेत्र में पहुंचकर संज्ञान लेता है।
विज्ञापन
अमर उजाला से बातचीत में भट्ट ने बताया कि बागेश्वर जिले में मानवाधिकार हनन के चार गंभीर मामले संज्ञान में आए। इनमें से 1995 में डोबा क्षेत्र की बारात में हुई हत्या, 1998 में दफौट क्षेत्र में पुलिस द्वारा किया गया पूर्व फौजी का एनकाउंटर, जिला मुख्यालय के नजदीकी गांव में बच्ची के साथ रेप और 1999 में एक एड्स पीड़ित के साथ किए गए दुर्व्यवहार के मामले प्रमुख रूप से शामिल हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि एड्स पीड़ित व्यक्ति के साथ न केवल जानवरों जैसा व्यवहार किया गया, बल्कि उसे जानवरों को बांधने वाले गोठ में रखा गया था। जानकारी मिलने पर उस व्यक्ति को गोठ से बाहर निकालकर चिकित्सा के प्रबंध किए गए। उन्होंने बताया कि मानवाधिकार के उक्त तीन मामलों को हाइकोर्ट में ले जाकर पीड़ितों को न्याय दिलाया गया।
विज्ञापन
प्रदेश उपाध्यक्ष भट्ट ने बताया कि हाल ही में सरकार ने शराब के लिए स्टेट हाइवे को जिला हाइवे घोषित कर दिया था। इस मामले में भी पीयूसीएल की ओर से हाइकोर्ट में याचिका दायर की गई। बागेश्वर के 11 ग्राम पंचायतों को जनता के विरोध के बावजूद पालिका में शामिल किया गया है।
यह मानवाधिकार का उल्लंघन है। इस पर भी उन्होंने हाइकोर्ट में याचिका दायर की है। मानवाधिकार हनन से संबंधित मामले सामने आने पर पीयूसीएल स्वयं क्षेत्र में पहुंचकर संज्ञान लेता है।