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बोर्ड में सरमूल, सौधारा और भद्रतुंगा का नाम न होने से क्षेत्र के लोगों में
Updated Fri, 23 Nov 2018 11:29 PM IST
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कपकोट (बागेश्वर)। पर्यटन विभाग की ओर से भराड़ी और अन्य स्थलों पर लगाए गए साइन बोर्डों में क्षेत्र के प्रमुख तीर्थस्थलों सरमूल, सौधारा और भद्रतुंगा का नाम अंकित न होने से क्षेत्र के लोगों में रोष है। लोगों ने पर्यटन विभाग से इन तीर्थ स्थलों को शीघ्र साइन बोर्डों में अंकित करवाने की मांग की है।
जानकारी के अनुुसार पर्यटन विभाग ने पर्यटकों की सुविधा के लिए भराड़ी और अन्य स्थलों पर साइन बोर्ड लगा रखे हैं। इनमें विभाग ने भराड़ी से उत्तर भाग स्थित विश्व प्रसिद्ध ग्लेशियरों में पिंडारी, कफनी, सुंदरढुंगा, शिखर, भनार और मुुनस्यारी की दूरी अंकित की है। सदानीरा सरयू इसी क्षेत्र के उत्तर भाग के झूनी गांव के सामने की पहाड़ी से निकलती है। सहस्रधारा, भद्रतुंगा और तप्तकुंड के नाम अंकित नहीं हैं। इन स्थलों को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। शासन भी अपने स्तर से प्रयासरत है।
इन तीर्थों के दर्शन के लिए देश के कई हिस्सों से श्रद्धालु जाते हैं। शिव महापुराण के स्कंद पुराण में मुनिश्रेष्ठ वशिष्ठ द्वारा पतितपावनी सरयू को मानसरोवर से लाकर अयोध्या तक ले जाने का वर्णन है। बावजूद इसके साइन बोर्ड में इन तीर्थों के नाम अंकित न होना आश्चर्यजनक है। सरमूल, सौधारा और भद्रतुंग विकास समिति के प्रभारी अध्यक्ष भगवत कोरंगा और सलाहकार दयाल कुमल्टा ने पर्यटन विभाग से बोर्ड में सरमूल, सौधारा और भद्रतुंगा की दूरी भी जल्द अंकित करवाने की मांग की है।
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जानकारी के अनुुसार पर्यटन विभाग ने पर्यटकों की सुविधा के लिए भराड़ी और अन्य स्थलों पर साइन बोर्ड लगा रखे हैं। इनमें विभाग ने भराड़ी से उत्तर भाग स्थित विश्व प्रसिद्ध ग्लेशियरों में पिंडारी, कफनी, सुंदरढुंगा, शिखर, भनार और मुुनस्यारी की दूरी अंकित की है। सदानीरा सरयू इसी क्षेत्र के उत्तर भाग के झूनी गांव के सामने की पहाड़ी से निकलती है। सहस्रधारा, भद्रतुंगा और तप्तकुंड के नाम अंकित नहीं हैं। इन स्थलों को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। शासन भी अपने स्तर से प्रयासरत है।
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इन तीर्थों के दर्शन के लिए देश के कई हिस्सों से श्रद्धालु जाते हैं। शिव महापुराण के स्कंद पुराण में मुनिश्रेष्ठ वशिष्ठ द्वारा पतितपावनी सरयू को मानसरोवर से लाकर अयोध्या तक ले जाने का वर्णन है। बावजूद इसके साइन बोर्ड में इन तीर्थों के नाम अंकित न होना आश्चर्यजनक है। सरमूल, सौधारा और भद्रतुंग विकास समिति के प्रभारी अध्यक्ष भगवत कोरंगा और सलाहकार दयाल कुमल्टा ने पर्यटन विभाग से बोर्ड में सरमूल, सौधारा और भद्रतुंगा की दूरी भी जल्द अंकित करवाने की मांग की है।
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