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कुमाऊंनी भाषा के संरक्षण में सामूहिक योगदान जरूरी
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बागेश्वर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डायट में आयोजित पांच दिवसीय हस्तशिल्प बाल पत्रिका कार्यशाला रविवार को संपन्न हो गई। डायट प्राचार्य डॉ शैलेंद्र धपोला ने कुमाऊंनी भाषा के संरक्षण में सामूहिक प्रयास की जरूरत पर जोर दिया।
कार्यशाला में मुख्य संदर्भदाता उदय किरौला ने कहा कि कुमाऊंनी भाषा के संरक्षण व संवर्धन में शिक्षकों का बड़ा योगदान है। शिक्षक ही नई पीढ़ी को संस्कृति से रूबरू करा सकते हैं। उन्होंने कार्यशाला में शब्द निर्माण, पहाड़े, खेल गतिविधि के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला में दीवार पत्रिका का भी विमोचन किया गया।
प्रशिक्षुओं को आंचलिक भाषा, निबंध रचना की जानकारी दी गई। इस दौरान कुमाऊंनी आण प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। वहां प्रधानाचार्य डॉ केवलानंद कांडपाल, डायट प्राचार्य डॉ शैलेंद्र धपोला, बीडी पांडे, संदीप जोशी, डॉ केएस रावत, संजय गुरुरानी, शुभम साह, प्रमोद शर्मा, पंकज कुमार, शैलेंद्र राणा, राहुल, दीपक, अर्चना, पंकज, रजनी आदि थे।
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कार्यशाला में मुख्य संदर्भदाता उदय किरौला ने कहा कि कुमाऊंनी भाषा के संरक्षण व संवर्धन में शिक्षकों का बड़ा योगदान है। शिक्षक ही नई पीढ़ी को संस्कृति से रूबरू करा सकते हैं। उन्होंने कार्यशाला में शब्द निर्माण, पहाड़े, खेल गतिविधि के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला में दीवार पत्रिका का भी विमोचन किया गया।
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प्रशिक्षुओं को आंचलिक भाषा, निबंध रचना की जानकारी दी गई। इस दौरान कुमाऊंनी आण प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। वहां प्रधानाचार्य डॉ केवलानंद कांडपाल, डायट प्राचार्य डॉ शैलेंद्र धपोला, बीडी पांडे, संदीप जोशी, डॉ केएस रावत, संजय गुरुरानी, शुभम साह, प्रमोद शर्मा, पंकज कुमार, शैलेंद्र राणा, राहुल, दीपक, अर्चना, पंकज, रजनी आदि थे।
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