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आपदा की मार से 12 परिवारों ने घर छोड़ा
Updated Tue, 28 Aug 2018 12:07 AM IST
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बागेश्वर। आपदा की मार से 12 और परिवार बेघर हो गए हैं। खतरे को देखते हुए प्रभावित परिवारों ने अपने घर छोड़ कर संबंधियों के यहां शरण ली है। मलबे से इनके आवासीय भवन कभी भी दफन हो सकते हैं। प्रभावितों ने जिपं अध्यक्ष और पूर्व विधायक के साथ डीएम को अपनी व्यथा बताई और विस्थापन की मांग की।
सोमवार को जिपं अध्यक्ष हरीश ऐठानी, पूर्व विधायक कपकोट ललित फर्स्वाण के नेतृत्व में प्रभावितों ने डीएम रंजना राजगुरु से मिलकर व्यथा बताई। बड़ेत के तोक खारबगड़ के ग्रामीणों ने बताया कि पहाड़ी दरकने से भारी मलबा आवासीय क्षेत्र में आ गया है। आंगन और घरों में मलबा भर गया है। इससे आठ परिवारों के आवासीय मकान खतरे की जद में हैं। गडेरा के खलई तोक के ग्रामीणों ने बताया कि चार परिवारों के आवासीय भवनों के पीछे भारी मलबा आ गया है। खतरे को देखते हुए प्रभावितों ने अपने मकान छोड़कर गांव में अपने संबंधियों के घर शरण ली है। मलबे से राशन, कपड़े, बर्तन आदि घरेलू सामान बर्बाद होने की भी आशंका है। प्रभावितों ने खतरे का कारण बने मलबे को हटाने और नुकसान की भरपाई करने की मांग की।
इस बीच जिपं अध्यक्ष ने बड़ेत में सुरक्षा दीवार न बनाने पर चिंता जताई और जिम्मेदार उत्तर भारत पावर कॉरपारेशन पर लापरवाही का आरोप लगाया। इस दौरान दीपक सिंह, कवींद्र सिंह, हयात सिंह, गोविंद सिंह, हरीश सिंह, बिशन सिंह, ईश्वर सिंह, हरपाल सिंह आदि प्रभावित थे। इधर, मल्लादेश गांव के बुडख़ाई तोक में भारी बारिश और भूकटाव से कई नाली कृषि भूमि बह गई है। खेतों में मलबा पसरा हुआ है। कटाव से कई ग्रामीणों की गोशाला ध्वस्त हो चुकी है। आवासीय मकान ध्वस्त होने की कगार पर हैं। प्रभावितों ने डीएम से विस्थापन की मांग की। इस दौरान धन गिरी, हरीश गिरी, प्रेमा देवी, आनंद गिरी आदि थे।
सोमवार को जिपं अध्यक्ष हरीश ऐठानी, पूर्व विधायक कपकोट ललित फर्स्वाण के नेतृत्व में प्रभावितों ने डीएम रंजना राजगुरु से मिलकर व्यथा बताई। बड़ेत के तोक खारबगड़ के ग्रामीणों ने बताया कि पहाड़ी दरकने से भारी मलबा आवासीय क्षेत्र में आ गया है। आंगन और घरों में मलबा भर गया है। इससे आठ परिवारों के आवासीय मकान खतरे की जद में हैं। गडेरा के खलई तोक के ग्रामीणों ने बताया कि चार परिवारों के आवासीय भवनों के पीछे भारी मलबा आ गया है। खतरे को देखते हुए प्रभावितों ने अपने मकान छोड़कर गांव में अपने संबंधियों के घर शरण ली है। मलबे से राशन, कपड़े, बर्तन आदि घरेलू सामान बर्बाद होने की भी आशंका है। प्रभावितों ने खतरे का कारण बने मलबे को हटाने और नुकसान की भरपाई करने की मांग की।
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इस बीच जिपं अध्यक्ष ने बड़ेत में सुरक्षा दीवार न बनाने पर चिंता जताई और जिम्मेदार उत्तर भारत पावर कॉरपारेशन पर लापरवाही का आरोप लगाया। इस दौरान दीपक सिंह, कवींद्र सिंह, हयात सिंह, गोविंद सिंह, हरीश सिंह, बिशन सिंह, ईश्वर सिंह, हरपाल सिंह आदि प्रभावित थे। इधर, मल्लादेश गांव के बुडख़ाई तोक में भारी बारिश और भूकटाव से कई नाली कृषि भूमि बह गई है। खेतों में मलबा पसरा हुआ है। कटाव से कई ग्रामीणों की गोशाला ध्वस्त हो चुकी है। आवासीय मकान ध्वस्त होने की कगार पर हैं। प्रभावितों ने डीएम से विस्थापन की मांग की। इस दौरान धन गिरी, हरीश गिरी, प्रेमा देवी, आनंद गिरी आदि थे।
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