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नुमाईशखेत में फिर आ धमका तेंदुआ
Updated Sat, 13 Oct 2018 12:00 AM IST
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बागेश्वर। नुमाईशखेत में रात के वक्त एक बार फिर तेंदुए आ धमका। इससे देवी पूजा के पंडाल और दुर्गा महोत्सव के बीच अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते आतंकित लोग घरों में कैद हो गए। काफी देर तक तेंदुआ एक मकान की छत पर गुर्राता रहा। खतरे की आशंका के बीच वन विभाग और पुुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर गश्त शुरू कर दी। देर रात तक शिकारी और वन कर्मी तेंदुए की टोह लेते रहे।
शुक्रवार रात पौने आठ बजे एक बार फिर तेंदुआ नुमाईशखेेत की आबादी में घुस आया। मैदान के पास ही मनोज कपकोटी की छत पर बैठकर गुर्राने लगा। तेंदुए को देखते ही क्षेत्रवासियों में आतंक की लहर दौड़ गई। देखते ही देखते आसपास के लोग घरों में कैद हो गए। दूसरी ओर पास ही चल रही देवी पूजा और दुर्गा महोत्सव में पहुंचे लोगों को तेंदुए के आने का पता चला तो अफरा-तफरी मच गई।
इधर, तेंदुए की आमद की खबर मिलते ही वन विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। तब तक तेंदुआ चंडिका की पहाड़ी की ओर रुख चुका था। देर रात तक शिकारी लखपत सिंह वन कर्मियों के साथ क्षेत्र में तेंदुए की टोह लेते रहे। तेंदुए के आतंक के चलते दुर्गा महोत्सव और रामलीला मंचन भी फीका रहा।
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नदीगांव और द्यांगण में भी आया तेंदुआ
बागेश्वर। नुमाईशखेत के साथ ही देर शाम लगभग एक ही वक्त नदीगांव और द्यांगण में भी तेंदुआ नजर आया। तेंदुए के फिर नजर आते ही आबादी में दशहत की लहर दौड़ गई। लोगों ने पटाखे फोड़कर तेंदुए को भगाया। बता दें कि नौ सितंबर को नदीगांव में आदमखोर एक मासूम को मौत के घाट उतार चुका है। जबकि दो दिन पहले नुमाईशखेत में तेंदुए ने एक मासूम का शिकार करने की कोशिश की थी।
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शुक्रवार रात पौने आठ बजे एक बार फिर तेंदुआ नुमाईशखेेत की आबादी में घुस आया। मैदान के पास ही मनोज कपकोटी की छत पर बैठकर गुर्राने लगा। तेंदुए को देखते ही क्षेत्रवासियों में आतंक की लहर दौड़ गई। देखते ही देखते आसपास के लोग घरों में कैद हो गए। दूसरी ओर पास ही चल रही देवी पूजा और दुर्गा महोत्सव में पहुंचे लोगों को तेंदुए के आने का पता चला तो अफरा-तफरी मच गई।
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इधर, तेंदुए की आमद की खबर मिलते ही वन विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। तब तक तेंदुआ चंडिका की पहाड़ी की ओर रुख चुका था। देर रात तक शिकारी लखपत सिंह वन कर्मियों के साथ क्षेत्र में तेंदुए की टोह लेते रहे। तेंदुए के आतंक के चलते दुर्गा महोत्सव और रामलीला मंचन भी फीका रहा।
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नदीगांव और द्यांगण में भी आया तेंदुआ
बागेश्वर। नुमाईशखेत के साथ ही देर शाम लगभग एक ही वक्त नदीगांव और द्यांगण में भी तेंदुआ नजर आया। तेंदुए के फिर नजर आते ही आबादी में दशहत की लहर दौड़ गई। लोगों ने पटाखे फोड़कर तेंदुए को भगाया। बता दें कि नौ सितंबर को नदीगांव में आदमखोर एक मासूम को मौत के घाट उतार चुका है। जबकि दो दिन पहले नुमाईशखेत में तेंदुए ने एक मासूम का शिकार करने की कोशिश की थी।