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कांग्रेस को गरुड़ में नहीं मिला ब्लाक अध्यक्ष
Updated Sun, 07 Oct 2018 11:18 PM IST
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बागेश्वर। एक-एक नाम पर मंथन करने वाली कांग्रेस ने गरुड़ ब्लॉक अध्यक्ष का नाम घोषित ही नहीं किया। जिलाध्यक्ष की माने तो नाम गलती से छूट गया। माना यह जा रहा है कि विवाद के चलते गरुड़ ब्लॉक अध्यक्ष का चयन नहीं हो सका है।
हाल ही में कांग्रेस ने ब्लॉक, नगर अध्यक्षों के नाम घोषित किए थे। इसी के तहत बागेश्वर के सभी ब्लॉक अध्यक्षों, नगर अध्यक्षों के नाम की सूची प्रदेश अध्यक्ष ने जारी की थी। हाल यह रहा कि कपकोट के पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण के गृह क्षेत्र गरुड़ ब्लॉक अध्यक्ष घोषित ही नहीं किया गया।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष लोकमणि पाठक का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष से बात की गई थी। प्रदेश अध्यक्ष का कहना था कि गलती से नाम छूट गया। पूर्व में ही सभी ब्लॉक अध्यक्षों के नाम तय कर दिए गए थे। एक-दो दिन में गरुड़ ब्लॉक अध्यक्ष के नाम की घोषणा हो जाएगी।
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कांग्रेस जिलाध्यक्ष के दावे के विपरीत हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। माना जा रहा है कि विवाद के चलते नाम घोषित नहीं किया गया। पूर्व में भी गरुड़ ब्लॉक अध्यक्ष को लेकर विवाद सामने आ चुका है। गरुड़ में ब्लॉक अध्यक्ष के कई दावेदार होने के कारण अक्सर घोषणा में विवाद होता रहा है। अब माना जा रहा है कि गरुड़ ब्लॉक अध्यक्ष का पद किसी अनुसूचित जाति के दावेदार को सौंपा जा सकता है। बागेश्वर जिले के लिए जारी की गई सूची में इस वर्ग को प्रतिनिधित्व न मिलने का मामला पहले ही उठ चुका है।
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हाल ही में कांग्रेस ने ब्लॉक, नगर अध्यक्षों के नाम घोषित किए थे। इसी के तहत बागेश्वर के सभी ब्लॉक अध्यक्षों, नगर अध्यक्षों के नाम की सूची प्रदेश अध्यक्ष ने जारी की थी। हाल यह रहा कि कपकोट के पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण के गृह क्षेत्र गरुड़ ब्लॉक अध्यक्ष घोषित ही नहीं किया गया।
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कांग्रेस जिलाध्यक्ष लोकमणि पाठक का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष से बात की गई थी। प्रदेश अध्यक्ष का कहना था कि गलती से नाम छूट गया। पूर्व में ही सभी ब्लॉक अध्यक्षों के नाम तय कर दिए गए थे। एक-दो दिन में गरुड़ ब्लॉक अध्यक्ष के नाम की घोषणा हो जाएगी।
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कांग्रेस जिलाध्यक्ष के दावे के विपरीत हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। माना जा रहा है कि विवाद के चलते नाम घोषित नहीं किया गया। पूर्व में भी गरुड़ ब्लॉक अध्यक्ष को लेकर विवाद सामने आ चुका है। गरुड़ में ब्लॉक अध्यक्ष के कई दावेदार होने के कारण अक्सर घोषणा में विवाद होता रहा है। अब माना जा रहा है कि गरुड़ ब्लॉक अध्यक्ष का पद किसी अनुसूचित जाति के दावेदार को सौंपा जा सकता है। बागेश्वर जिले के लिए जारी की गई सूची में इस वर्ग को प्रतिनिधित्व न मिलने का मामला पहले ही उठ चुका है।