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बागेश्वर में 10 फीसदी प्रवासियों को मिला काम
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बागेश्वर में 10 फीसदी प्रवासियाें को मिला काम
कोरोना काल में हुआ रिवर्स पलायन 60 हजार से अधिक प्रवासियों ने किया पहाड़ का रुख
संवाद न्यूज एजेंसी
बागेश्वर। बागेश्वर में बाहरी प्रदेशों से लौटे 10 प्रतिशत प्रवासियों को ही रोजगार मिल गया है। इससे रिवर्स पलायन की कवायद को मजबूती मिली है। जिले में कोरोना काल के दौरान 60662 प्रवासी लौटे हैं, जिनमें बाहरी प्रदेशों के 29628 और राज्य के अन्य जिलों से आए 31034 प्रवासी शामिल हैं।
इनमें से कुछ 6085 ने सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपना व्यवसाय शुरू कर दिया है। बाहरी क्षेत्रों में छोटा-मोटा काम करने वाले साढ़े चार हजार से अधिक प्रवासी मनरेगा में मजदूरी कर अपनी रोजीरोटी चला रहे हैं।
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प्रवासियों के लिए करोड़ों का ऋण स्वीकृत
जिला उद्योग केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार 245 प्रवासियों ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से उद्योग स्थापित करने करने के लिए आवेदन किए हैं। इनमें से 4 करोड़ 69 लाख 32 हजार रुपये राशि के 169 आवेदनों को जिला स्तरीय चयन समिति ने स्वीकृति प्रदान कर बैंकों को ऋण उपलब्ध कराने के लिए भेज दिया है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत 6 करोड़ 31 लाख 79 हजार रुपये के 138 आवेदनों को स्वीकृति प्रदान की गई है। शेष में कार्यवाही गतिमान है।
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कृषि और पशुपालन की ओर भी बढ़ा रुझान
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण की परियोजना निदेशक शिल्पी पंत ने बताया है कि 95 प्रवासियों ने उद्यान, 192 ने कृषि, 341 ने पशुपालन, 90 ने मत्स्य, 32 ने डेयरी उद्योग के लिए आवेदन किया है। 324 ने ग्राम्या और 113 ने महिला समूहों से जुड़ने के लिए आवेदन किया है। इन सभी लोगों को नियोजित किया जा रहा है। जिला विकास अधिकारी केएन तिवारी ने बताया है कि अब तक 4515 प्रवासियों को मनरेगा में काम दिया जा रहा है।
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कुवैत से लौटे हरीश ने गांव में खोला रेस्टोरेंट
बागेश्वर जिले में विदेश से लौटे लोग भी गांव में स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाने लगे हैं। बागेश्वर के नौगांव निवासी हरीश सिंह बीते 10 वर्षों से कुवैत में रेस्टोरेंट में काम करते थे। लॉकडाउन के कारण रोजगार छिनने से घर लौट गए। उन्होंने अगस्त माह में अपनी जमा पूंजी से नौगांव में ही रेस्टोरेंट खोल लिया। हरीश का कहना है कि अब वह नौकरी के लिए कहीं नहीं जाएंगे।
फोटो 30 बीजीएस 02 पी
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कोरोना काल में हुआ रिवर्स पलायन 60 हजार से अधिक प्रवासियों ने किया पहाड़ का रुख
संवाद न्यूज एजेंसी
बागेश्वर। बागेश्वर में बाहरी प्रदेशों से लौटे 10 प्रतिशत प्रवासियों को ही रोजगार मिल गया है। इससे रिवर्स पलायन की कवायद को मजबूती मिली है। जिले में कोरोना काल के दौरान 60662 प्रवासी लौटे हैं, जिनमें बाहरी प्रदेशों के 29628 और राज्य के अन्य जिलों से आए 31034 प्रवासी शामिल हैं।
इनमें से कुछ 6085 ने सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपना व्यवसाय शुरू कर दिया है। बाहरी क्षेत्रों में छोटा-मोटा काम करने वाले साढ़े चार हजार से अधिक प्रवासी मनरेगा में मजदूरी कर अपनी रोजीरोटी चला रहे हैं।
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प्रवासियों के लिए करोड़ों का ऋण स्वीकृत
जिला उद्योग केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार 245 प्रवासियों ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से उद्योग स्थापित करने करने के लिए आवेदन किए हैं। इनमें से 4 करोड़ 69 लाख 32 हजार रुपये राशि के 169 आवेदनों को जिला स्तरीय चयन समिति ने स्वीकृति प्रदान कर बैंकों को ऋण उपलब्ध कराने के लिए भेज दिया है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत 6 करोड़ 31 लाख 79 हजार रुपये के 138 आवेदनों को स्वीकृति प्रदान की गई है। शेष में कार्यवाही गतिमान है।
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कृषि और पशुपालन की ओर भी बढ़ा रुझान
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण की परियोजना निदेशक शिल्पी पंत ने बताया है कि 95 प्रवासियों ने उद्यान, 192 ने कृषि, 341 ने पशुपालन, 90 ने मत्स्य, 32 ने डेयरी उद्योग के लिए आवेदन किया है। 324 ने ग्राम्या और 113 ने महिला समूहों से जुड़ने के लिए आवेदन किया है। इन सभी लोगों को नियोजित किया जा रहा है। जिला विकास अधिकारी केएन तिवारी ने बताया है कि अब तक 4515 प्रवासियों को मनरेगा में काम दिया जा रहा है।
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कुवैत से लौटे हरीश ने गांव में खोला रेस्टोरेंट
बागेश्वर जिले में विदेश से लौटे लोग भी गांव में स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाने लगे हैं। बागेश्वर के नौगांव निवासी हरीश सिंह बीते 10 वर्षों से कुवैत में रेस्टोरेंट में काम करते थे। लॉकडाउन के कारण रोजगार छिनने से घर लौट गए। उन्होंने अगस्त माह में अपनी जमा पूंजी से नौगांव में ही रेस्टोरेंट खोल लिया। हरीश का कहना है कि अब वह नौकरी के लिए कहीं नहीं जाएंगे।
फोटो 30 बीजीएस 02 पी