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अल्मोड़ा में 10 हेक्टेयर जंगल जला
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सोमेश्वर में जंगल की आग बुझाते वन कर्मी
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। फायर सीजन में जिले में जंगल आग में जल रहे हैं। सोमवार को भी जिले में कई स्थानों पर जंगलों में आग भड़की रही। आग से करीब 10 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलने का आकलन है। शाम को तेज हवा चलने पर जंगलों में आग तेजी से फैल गई है। जंगलों की आग से वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। साथ ही क्षेत्र में धुंध छाई है।
सोमवार को सोमेश्वर के खीड़ाकोट, भेटा, अकुवा आदि जंगलों में आग भड़क गई। देखते ही देखते जंगलों में तेजी से आग फैलने लगी। सूचना मिलने पर वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और आग बुझाने में जुटे गए। काफी मशक्कत के बाद भी आग पर काबू नहीं पाया गया। शाम के तहत हवा के झोकों ने आग में घी डालने का काम किया। हवा चलने से आग पूरे जंगलों में तेजी से फैल गई है लेकिन अभी आग पर काबू नहीं पाया गया है। जंगल की आग से 10 हेक्टेयर वन क्षेत्र जल गया है। संवाद
मनरेगा मद से पिरूल हटाने के निर्देश
बागेश्वर। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने वनाग्नि रोकने के लिए मनरेगा मद से जंगलों से पिरूल हटाने का काम करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों से मुखातिब सीएम ने कहा कि वनाग्नि रोकने के लिए उत्तम तकनीक का इस्तेमाल किया जाए। वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं, युवक/महिला मंगल दलों के साथ ही जनप्रतिनिधियों का सहयोग लेने को कहा। वनाग्नि की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए वन अनुसंधान संस्थान, विश्वविद्यालयों के साथ ही अन्य संस्थानों के साथ मिलकर लघु और दीर्घकालीन योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा मित्रों वनाग्नि नियंत्रण में लगाया जाए। कहा कि वनाग्नि से वन संपदा, जीव जंतु को भारी नुकसान होता है। प्राकृतिक जल स्रोत सूख जाते हैं। डीएम विनीत कुमार ने वनाग्नि प्रबंधन और नियंत्रण की जानकारी देते हुए फायर वाचर की संख्या बढ़ाने के लिए बजट की मांग की। वहां पर एसपी अमित श्रीवास्तव, एडीएम चंद्र सिंह इमलाल, डीएफओ हिमांशु बागरी और अन्य अधिकारी मौजूद थे। संवाद
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चौकुनी मौना में वनाग्नि को लेकर हुई गोष्ठी
रानीखेत (अल्मोड़ा)। वन विभाग ने चौकुनी मौना में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर आग लगने के तमाम कारणों पर चर्चा की। उन्होेंने कहा कि गांव में आग लगने की तत्काल सूचना वन विभाग को दी जाए। प्रधान मनोज सिंह ऐरड़ा ने सुझाव दिया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो फायर वाचरों की नियुक्ति करनी जरूरी है। जंगलों में बेतहाशा गिर रहे पिरूल को बेचने का अधिकार भी ग्रामीणों को दिया जाए और इसके लिए स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए। ग्रामीण अपने नाप और सिविल भूमि में ओण अपशिष्ट को वनाग्नि काल में नहीं जाएंगे, इसके लिए 15 जून से आगे की तारीख निर्धारित की गई। ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि वनाग्नि संबंधी बैठकें जनवरी और फरवरी महीने में आयोजित की जानी चाहिए। ठीक वनाग्नि सीजन में बैठकों का कोई औचित्य नहीं है। बैठक में दीप कुमार, रणजीत सिंह, भूपाल सिंह, दिनेश सिंह, आनंद सिंह, अमर सिंह, गोपाल सिंह, लव सिंह, बचे सिंह रावत, मनोज सिंह, नंदन सिंह ,ख्याली दत्त तिवारी के अलावा वन पंचायत सरपंच, वन विभाग के अधिकारी आदि मौजूद रहे।
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सोमवार को सोमेश्वर के खीड़ाकोट, भेटा, अकुवा आदि जंगलों में आग भड़क गई। देखते ही देखते जंगलों में तेजी से आग फैलने लगी। सूचना मिलने पर वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और आग बुझाने में जुटे गए। काफी मशक्कत के बाद भी आग पर काबू नहीं पाया गया। शाम के तहत हवा के झोकों ने आग में घी डालने का काम किया। हवा चलने से आग पूरे जंगलों में तेजी से फैल गई है लेकिन अभी आग पर काबू नहीं पाया गया है। जंगल की आग से 10 हेक्टेयर वन क्षेत्र जल गया है। संवाद
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मनरेगा मद से पिरूल हटाने के निर्देश
बागेश्वर। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने वनाग्नि रोकने के लिए मनरेगा मद से जंगलों से पिरूल हटाने का काम करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों से मुखातिब सीएम ने कहा कि वनाग्नि रोकने के लिए उत्तम तकनीक का इस्तेमाल किया जाए। वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं, युवक/महिला मंगल दलों के साथ ही जनप्रतिनिधियों का सहयोग लेने को कहा। वनाग्नि की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए वन अनुसंधान संस्थान, विश्वविद्यालयों के साथ ही अन्य संस्थानों के साथ मिलकर लघु और दीर्घकालीन योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा मित्रों वनाग्नि नियंत्रण में लगाया जाए। कहा कि वनाग्नि से वन संपदा, जीव जंतु को भारी नुकसान होता है। प्राकृतिक जल स्रोत सूख जाते हैं। डीएम विनीत कुमार ने वनाग्नि प्रबंधन और नियंत्रण की जानकारी देते हुए फायर वाचर की संख्या बढ़ाने के लिए बजट की मांग की। वहां पर एसपी अमित श्रीवास्तव, एडीएम चंद्र सिंह इमलाल, डीएफओ हिमांशु बागरी और अन्य अधिकारी मौजूद थे। संवाद
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चौकुनी मौना में वनाग्नि को लेकर हुई गोष्ठी
रानीखेत (अल्मोड़ा)। वन विभाग ने चौकुनी मौना में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर आग लगने के तमाम कारणों पर चर्चा की। उन्होेंने कहा कि गांव में आग लगने की तत्काल सूचना वन विभाग को दी जाए। प्रधान मनोज सिंह ऐरड़ा ने सुझाव दिया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो फायर वाचरों की नियुक्ति करनी जरूरी है। जंगलों में बेतहाशा गिर रहे पिरूल को बेचने का अधिकार भी ग्रामीणों को दिया जाए और इसके लिए स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए। ग्रामीण अपने नाप और सिविल भूमि में ओण अपशिष्ट को वनाग्नि काल में नहीं जाएंगे, इसके लिए 15 जून से आगे की तारीख निर्धारित की गई। ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि वनाग्नि संबंधी बैठकें जनवरी और फरवरी महीने में आयोजित की जानी चाहिए। ठीक वनाग्नि सीजन में बैठकों का कोई औचित्य नहीं है। बैठक में दीप कुमार, रणजीत सिंह, भूपाल सिंह, दिनेश सिंह, आनंद सिंह, अमर सिंह, गोपाल सिंह, लव सिंह, बचे सिंह रावत, मनोज सिंह, नंदन सिंह ,ख्याली दत्त तिवारी के अलावा वन पंचायत सरपंच, वन विभाग के अधिकारी आदि मौजूद रहे।