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काहे का संत, विस्थापितों की जमीन भी निगल गया आसाराम
अमर उजाला, नई टिहरी
Updated Thu, 12 Sep 2013 11:46 PM IST
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कथावाचक आसाराम के आश्रमों की वैधता की जांच पड़ताल तहसील प्रशासन ने पूरी कर ली है। जांच में दोनों ही आश्रमों का निर्माण स्वामित्व से ज्यादा भूमि पर होना पाया गया।
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चवालखेत वाले आश्रम का तो नक्शा भी पास नहीं है। दोनों ही आश्रमों का आरबीओ एक्ट के तहत चालान किया गया है।
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वैधता पर उठे सवाल
टिहरी बांध विस्थापितों की भूमि पर टिहरी के सी ब्लॉक तथा चवालखेत में बने मे आसाराम के आश्रमों की वैधता पर उठे सवाल के बाद प्रशासन ने जांच की तो स्थिति साफ हो गई।
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सी ब्लॉक के आश्रम के नाम 150 वर्ग मीटर और 100 वर्ग मीटर के दो प्लांट आवंटित हैं। 250 वर्ग मीटर में ही भवन निर्माण का नक्शा भी पास है।
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यादा कब्जा पाया गया
गुरुवार को जब तहसील प्रशासन ने सी ब्लॉक आश्रम के भूमि की नाप की तो 50 वर्ग मीटर अधिक भूमि पर ज्यादा कब्जा पाया गया। चवालखेत में 18 नाली भूमि की आश्रम के नाम रजिस्ट्री है।
नाप में 18.5 नाली भूमि पर कब्जा पाया गया। यहां वन विभाग की .05 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा पाया गया। आंवटित भूमि से अधिक भूमि पर निर्माण करने और चवालखेत में बिना नक्शा पास के भवन निर्माण करने पर दोनों आश्रमों का चालान काटा गया ।
...आसाराम के आश्रम को सील करने की तैयारी
एसडीएम पारितोष वर्मा ने बताया कि आरबीओ एक्ट के तहत दोनों आश्रमों को नोटिस भेज दिया गया है।