{"_id":"688bb66602b170cbc70c85ad","slug":"women-district-president-geeta-pawar-could-not-save-her-own-almora-news-c-232-1-ha11012-131685-2025-08-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Almora News: अपनी ही सीट नहीं बचा सकीं महिला जिलाध्यक्ष गीता पंवार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Almora News: अपनी ही सीट नहीं बचा सकीं महिला जिलाध्यक्ष गीता पंवार
Fri, 01 Aug 2025 12:01 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Fri, 01 Aug 2025 12:01 AM IST
विज्ञापन
रानीखेत (अल्मोड़ा)। पंचायत चुनाव में मोवड़ी जिला पंचायत सीट से मैदान में उतरीं कांग्रेस की महिला जिलाध्यक्ष गीता पवार को इस बार झटका लगा है। संगठन का बड़ा चेहरा मानी जाने वाली पवार अपनी ही सीट नहीं जीत पाईं जिससे न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत साख को नुकसान हुआ है, बल्कि पार्टी संगठन में उनका ओहदा भी कम हो सकता है।
गौरतलब है कि मोवड़ी सीट पर कांग्रेस ने कोई आधिकारिक प्रत्याशी घोषित नहीं किया था लेकिन महिला जिलाध्यक्ष के तौर पर गीता पवार ने सीधे चुनावी मैदान में उतरकर खुद को संगठन का प्रमुख चेहरा प्रस्तुत किया था। बावजूद इसके उन्हें मात्र 1204 मत ही मिल सके और उन्हें बीजेपी की समर्थित प्रत्याशी से 3273 मतों के भारी अंतर से हार का सामना करना पड़ा और वह तीसरे स्थान पर चले गई।
संगठनात्मक झटका, नेतृत्व पर सवाल
रानीखेत। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिलाध्यक्ष स्तर के नेता की सीट से हार पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के लिए साफ संकेत है कि जमीनी स्तर पर पकड़ कमजोर हो रही है। पार्टी के अंदर भी इस हार को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।गौरतलब है, कि जिलाध्यक्ष जैसे अहम पद पर रहते हुए भी हार का सामना करना संगठनात्मक मोर्चे पर बड़ा संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में गीता पवार की भूमिका और पार्टी में उनका प्रभाव कम होता दिखाई दे सकता है। यह परिणाम कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का विषय बन गया है, खासकर तब जब संगठनात्मक चेहरे भी चुनावी मैदान में खुद को साबित नहीं कर पा रहे। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
गौरतलब है कि मोवड़ी सीट पर कांग्रेस ने कोई आधिकारिक प्रत्याशी घोषित नहीं किया था लेकिन महिला जिलाध्यक्ष के तौर पर गीता पवार ने सीधे चुनावी मैदान में उतरकर खुद को संगठन का प्रमुख चेहरा प्रस्तुत किया था। बावजूद इसके उन्हें मात्र 1204 मत ही मिल सके और उन्हें बीजेपी की समर्थित प्रत्याशी से 3273 मतों के भारी अंतर से हार का सामना करना पड़ा और वह तीसरे स्थान पर चले गई।
विज्ञापन
संगठनात्मक झटका, नेतृत्व पर सवाल
रानीखेत। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिलाध्यक्ष स्तर के नेता की सीट से हार पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के लिए साफ संकेत है कि जमीनी स्तर पर पकड़ कमजोर हो रही है। पार्टी के अंदर भी इस हार को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।गौरतलब है, कि जिलाध्यक्ष जैसे अहम पद पर रहते हुए भी हार का सामना करना संगठनात्मक मोर्चे पर बड़ा संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में गीता पवार की भूमिका और पार्टी में उनका प्रभाव कम होता दिखाई दे सकता है। यह परिणाम कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का विषय बन गया है, खासकर तब जब संगठनात्मक चेहरे भी चुनावी मैदान में खुद को साबित नहीं कर पा रहे। संवाद
विज्ञापन