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Almora News: जिले में गहराया जल संकट, कम पड़ गए टैंकर
Sun, 07 Apr 2024 11:53 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sun, 07 Apr 2024 11:53 PM IST
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बागेश्वर के मंडलसेरा में हैंडपंप से पानी भरतीं, कपड़े धोती महिलाएं। संवाद
- फोटो : Samvad
सोमेश्वर, तोली, बल्टा, लमगड़ा में टैंकर, डंपर, पिकअप से पानी बांटकर पहुंचाई लोगों को राहत
अल्मोड़ा। जिले के विभिन्न हिस्सों में गर्मी बढ़ने के साथ ही जल संकट गहरा गया है। हालात यह हैं कि नलों में जलापूर्ति ठप है और पानी बांटने के लिए टैंकर कम पड़ गए हैं। पिकअप, डंपर का अधिग्रहण कर इनके माध्यम से पानी बांटना पड़ रहा है।
जिले के तोली, सोमेश्वर, बल्टा, लमगड़ा क्षेत्र में पेयजल योजनाओं के जवाब देने से जलापूर्ति ठप रही। जल स्रोतों का जलस्तर घटने से योजनाओं से जलापूर्ति नहीं हुई और नल सूखे रहे। लोग घंटों नल से जल टपकने का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी। मजबूरन उन्हें प्राकृतिक जल स्रोतों की दौड़ लगानी पड़ी।
जल संस्थान के पास सिर्फ तीन टैंकर
अल्मोड़ा। जिले में हर साल गर्मियों में जल संकट गंभीर समस्या बनता है। टैंकरों से पानी बांटने की परंपरा सालों से चली आ रही है। हैरानी की बात यह है कि जल संस्थान के पास पर्याप्त टैंकर उपलब्ध नहीं हैं।
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कोट- स्रोतों का जलस्तर घटने से समस्या आई है। टैंकर, पिकअप, डंपर से पानी बांटा जा रहा है। प्रभावित लोगों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना संस्थान की जिम्मेदारी है। संस्थान लोगों की समस्या के प्रति गंभीरता से काम कर रहा है।
विरेंद्र सिंह मेहता, जेई, जल संस्थान, अल्मोड़ा।
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अल्मोड़ा। जिले के विभिन्न हिस्सों में गर्मी बढ़ने के साथ ही जल संकट गहरा गया है। हालात यह हैं कि नलों में जलापूर्ति ठप है और पानी बांटने के लिए टैंकर कम पड़ गए हैं। पिकअप, डंपर का अधिग्रहण कर इनके माध्यम से पानी बांटना पड़ रहा है।
जिले के तोली, सोमेश्वर, बल्टा, लमगड़ा क्षेत्र में पेयजल योजनाओं के जवाब देने से जलापूर्ति ठप रही। जल स्रोतों का जलस्तर घटने से योजनाओं से जलापूर्ति नहीं हुई और नल सूखे रहे। लोग घंटों नल से जल टपकने का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी। मजबूरन उन्हें प्राकृतिक जल स्रोतों की दौड़ लगानी पड़ी।
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जल संस्थान के पास सिर्फ तीन टैंकर
अल्मोड़ा। जिले में हर साल गर्मियों में जल संकट गंभीर समस्या बनता है। टैंकरों से पानी बांटने की परंपरा सालों से चली आ रही है। हैरानी की बात यह है कि जल संस्थान के पास पर्याप्त टैंकर उपलब्ध नहीं हैं।
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कोट- स्रोतों का जलस्तर घटने से समस्या आई है। टैंकर, पिकअप, डंपर से पानी बांटा जा रहा है। प्रभावित लोगों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना संस्थान की जिम्मेदारी है। संस्थान लोगों की समस्या के प्रति गंभीरता से काम कर रहा है।
विरेंद्र सिंह मेहता, जेई, जल संस्थान, अल्मोड़ा।