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Almora News: तीन साल से फर्जी हस्ताक्षर कर सेवानिवृत्त वन कर्मी के खाते से निकाल रहा था रुपये, दबोचा
Tue, 11 Apr 2023 11:35 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Tue, 11 Apr 2023 11:35 PM IST
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अल्मोड़ा। नगर के एक बैंक में फर्जी तरीके से सेवानिवृत्त वन कर्मी के खाते से रुपये निकालने का मामला सामने आया है। आरोपी ने अलग-अलग दिन में वन कर्मी के खाते से जाली हस्ताक्षर कर 65 हजार रुपये निकाल लिए। लालच में उसने तीसरी बार फिर से रुपये निकालने की कोशिश की तो पकड़ा गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
मामला नगर स्थित केनरा बैंक का है। लमगड़ा निवासी नंदन सिंह मेर ने तीन मार्च 2020 को बैंक पहुंचकर धारानौली निवासी सेवानिवृत्त वन कर्मी के खाते से निकासी पर्ची में उसके फर्जी हस्ताक्षर कर 20 हजार रुपये निकाल लिए। 19 माह तक शांत रहने के बाद वह फिर से लालच में आकर बैंक पहुंच गया। 4 दिसंबर 2022 को फिर से उसने फर्जी हस्ताक्षर कर निकासी पर्ची भरी और बैंक कर्मियों ने उस पर विश्वास कर उसे 45 हजार रुपये दे दिए।
बीते सोमवार को वह फिर से बैंक पहुंचा और 45 हजार रुपये की निकासी पर्ची भर कैशियर को थमाई। कंप्यूटर और निकासी पर्ची में हस्ताक्षर का मिलान न होने पर बैंक कर्मी ने जब उससे पूछताछ की और पासबुक मांगी तो वह वहां से भागने लगा लेकिन लेकिन गेट पर खड़े सुरक्षा कर्मी ने उसे पकड़ लिया। मामले में बैंक प्रबंधन अशोक सिंह बिष्ट ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस की पूछताछ में जालसाज ने अपनी कारस्तानी के राज उगले। कोतवाल राजेश यादव ने बताया कि आरोपी के खिलाफ धारा 467, 468 और 471 के तहत केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है।
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वन कर्मी ने हस्ताक्षर कर कूड़ेदान में फेंक दी थी जमा पर्ची, आरोपी ने उठाया फायदा
अल्मोड़ा। पुलिस के मुताबिक तीन साल पूर्व बैंक पहुंचे सेवानिवृत्त वन कर्मी की एक गलती का आरोपी से फायदा उठाते हुए उसे काफी चपत लगाई। सेवानिवृत्त कर्मचारी जब एक दिन बैंक पहुंचा और उसने रुपये निकालने के लिए निकासी पर्ची भरी। हस्ताक्षर करने के बाद उसमें कुछ गलती होने पर उसने पर्ची को बैंक के भीतर रखे कूड़ेदान में डाल दिया। आरोपी ने वह पर्ची निकाली और उसमें दर्ज हस्ताक्षर की नकल करते हुए नई पर्ची भर रुपये की निकासी कर ली। संवाद
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बैंक प्रबंधन भी उठ रहे हैं सवाल
अल्मोड़ा। आरोपी दो बार बगैर पास बुक के निकासी पर्ची में फर्जी हस्ताक्षर कर बैंक पहुंचा और वह अपनी चाल में कामयाब रहा। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान बैंक कर्मियों ने बगैर पास बुक के ही उसे भुगतान कर दिया। यदि पास बुक मंगाई जाती तो उसमें लगी फोटो से आरोपी के फर्जीवाड़े का राज खुल जाता और सेवानिवृत्त वन कर्मी को नुकसान नहीं झेलना पड़ता। संवाद
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मामला नगर स्थित केनरा बैंक का है। लमगड़ा निवासी नंदन सिंह मेर ने तीन मार्च 2020 को बैंक पहुंचकर धारानौली निवासी सेवानिवृत्त वन कर्मी के खाते से निकासी पर्ची में उसके फर्जी हस्ताक्षर कर 20 हजार रुपये निकाल लिए। 19 माह तक शांत रहने के बाद वह फिर से लालच में आकर बैंक पहुंच गया। 4 दिसंबर 2022 को फिर से उसने फर्जी हस्ताक्षर कर निकासी पर्ची भरी और बैंक कर्मियों ने उस पर विश्वास कर उसे 45 हजार रुपये दे दिए।
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बीते सोमवार को वह फिर से बैंक पहुंचा और 45 हजार रुपये की निकासी पर्ची भर कैशियर को थमाई। कंप्यूटर और निकासी पर्ची में हस्ताक्षर का मिलान न होने पर बैंक कर्मी ने जब उससे पूछताछ की और पासबुक मांगी तो वह वहां से भागने लगा लेकिन लेकिन गेट पर खड़े सुरक्षा कर्मी ने उसे पकड़ लिया। मामले में बैंक प्रबंधन अशोक सिंह बिष्ट ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस की पूछताछ में जालसाज ने अपनी कारस्तानी के राज उगले। कोतवाल राजेश यादव ने बताया कि आरोपी के खिलाफ धारा 467, 468 और 471 के तहत केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है।
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वन कर्मी ने हस्ताक्षर कर कूड़ेदान में फेंक दी थी जमा पर्ची, आरोपी ने उठाया फायदा
अल्मोड़ा। पुलिस के मुताबिक तीन साल पूर्व बैंक पहुंचे सेवानिवृत्त वन कर्मी की एक गलती का आरोपी से फायदा उठाते हुए उसे काफी चपत लगाई। सेवानिवृत्त कर्मचारी जब एक दिन बैंक पहुंचा और उसने रुपये निकालने के लिए निकासी पर्ची भरी। हस्ताक्षर करने के बाद उसमें कुछ गलती होने पर उसने पर्ची को बैंक के भीतर रखे कूड़ेदान में डाल दिया। आरोपी ने वह पर्ची निकाली और उसमें दर्ज हस्ताक्षर की नकल करते हुए नई पर्ची भर रुपये की निकासी कर ली। संवाद
बैंक प्रबंधन भी उठ रहे हैं सवाल
अल्मोड़ा। आरोपी दो बार बगैर पास बुक के निकासी पर्ची में फर्जी हस्ताक्षर कर बैंक पहुंचा और वह अपनी चाल में कामयाब रहा। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान बैंक कर्मियों ने बगैर पास बुक के ही उसे भुगतान कर दिया। यदि पास बुक मंगाई जाती तो उसमें लगी फोटो से आरोपी के फर्जीवाड़े का राज खुल जाता और सेवानिवृत्त वन कर्मी को नुकसान नहीं झेलना पड़ता। संवाद