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ग्रामीणों ने लिया नशा उन्मूलन के लिए हर संभव संघर्ष करने का संकल्प
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
Updated Thu, 24 Nov 2016 11:04 PM IST
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ताड़ीखेत ब्लाक के गांवों में शराब उन्मूलन की शपथ लेते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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नशा हटाओ, पलायन रोको, पहाड़ बचाओ पदयात्रा का ताड़ीखेत विकासखंड के कारचूली, पापड़ा सहित कई गांवों में भव्य स्वागत हुआ। इस मौके पर ग्रामीणों ने नशा उन्मूलन के लिए हर संभव संघर्ष करने का संकल्प जताया।
ग्रामीणों ने कहा कि शराब ने छोटे छोटे बच्चों तक को अपनी चपेट में ले लिया है। इससे उनका भविष्य बर्बाद हो रहा है। यात्रा के संयोजक डा. प्रमोद नैनवाल ने प्रदेश में पूर्ण रूप से शराब बंदी करने की मांग उठाई। कहा कि शराब के बढ़ते प्रचलन ने पहाड़ का मुकुट समझे जाने वाले पहाड़ को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। सरकारों का ध्यान इस ओर कतई नहीं है। दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा पलायन का है।
इसके चलते पहाड़ पूरी तरह से खाली होने के कगार पर हैं। जहां 100 परिवार निवास करते थे, आज वहां सिर्फ 10 परिवार रह गए हैं। बचे लोग खेती किसानी से विमुख हो रहे हैं। जंगली जानवरों के आतंक ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। पहाड़ के इस मुद्दे को न तो क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि उठा रहे हैं और ना ही सरकार का ध्यान इस तरफ है। उन्होंने पूरे प्रदेश में शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई। उनके साथ नीरज तिवारी सहित तमाम लोग मौजूद थे।
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ग्रामीणों ने कहा कि शराब ने छोटे छोटे बच्चों तक को अपनी चपेट में ले लिया है। इससे उनका भविष्य बर्बाद हो रहा है। यात्रा के संयोजक डा. प्रमोद नैनवाल ने प्रदेश में पूर्ण रूप से शराब बंदी करने की मांग उठाई। कहा कि शराब के बढ़ते प्रचलन ने पहाड़ का मुकुट समझे जाने वाले पहाड़ को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। सरकारों का ध्यान इस ओर कतई नहीं है। दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा पलायन का है।
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इसके चलते पहाड़ पूरी तरह से खाली होने के कगार पर हैं। जहां 100 परिवार निवास करते थे, आज वहां सिर्फ 10 परिवार रह गए हैं। बचे लोग खेती किसानी से विमुख हो रहे हैं। जंगली जानवरों के आतंक ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। पहाड़ के इस मुद्दे को न तो क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि उठा रहे हैं और ना ही सरकार का ध्यान इस तरफ है। उन्होंने पूरे प्रदेश में शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई। उनके साथ नीरज तिवारी सहित तमाम लोग मौजूद थे।
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