अल्मोड़ा। वनाग्नि से संबंधित बैठक में एडीएम बीएल फिरमाल ने वनों को वनाग्नि से रोकने के लिए ग्राम स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति वनाग्नि के प्रति जागरूक करने, फायर सीजन में वनों में आग लगाने वाले शरारती तत्वों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सिविल वनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम प्रधान और पटवारी की होगी।
उन्होंने कहा कि जंगलों में आग लगने के प्रमुख कारणों में नई घास के लिए सूखी घास को जलाना, जंगलों में आने-जाने वाले लोगों द्वारा जली बीड़ी, सिगरेट को फेंकना, लकड़ी तस्करों द्वारा पेड़ की जड़ों पर आग लगाकर पेड़ गिरना और बिखरी पत्तियों को जलाना है। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को गांवों में जागरूकता गोष्ठी कर कृषि, उद्यान एवं विकास विभाग के अधिकारियों को भी अनिवार्य रूप से प्रतिभाग कराने को कहा। उन्होंने बताया कि 15 फरवरी से 15 जून तक वनाग्नि नियंत्रण अभियान चलेगा। डीएफओ महातिम यादव ने वनाग्नि से निपटने के लिए सभी विभागों से सहयोग करने को कहा। बैठक में डीएफओ सिविल सोयम केएस रावत, प्रभागीय वनाधिकारी भूमि एवं वन संरक्षण रानीखेत उमेश चंद्र जोशी, उप प्रभागीय वनाधिकारी भूपाल सिंह बिष्ट, वन क्षेत्राधिकारी संचिता वर्मा, अधिशासी अभियंता विजय कुमार, ईओ पालिका श्याम सुंदर, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी मनोहर लाल, दीपक तिवारी समेत अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।