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Almora News: पभ्या गांव के लिए नहीं बन पाई सड़क, डोली उठाने केलिए भी नहीं मिलते युवा

Sun, 05 Oct 2025 11:55 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Sun, 05 Oct 2025 11:55 PM IST
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The road to Pabya village has failed to be built, and young men are not even available to carry the palanquin.
पभ्या गांव। स्रोत: ग्रामीण
अल्मोड़ा। आजादी के 78 साल बाद भी अल्मोड़ा के सीमावर्ती गांव पभ्या में विकास नहीं पहुंच पाया है। इस कारण गांव से लगातार पलायन हो रहा है। करीब पांच वर्ष पूर्व इस गांव में 60 परिवार रहते थे। पलायन के बाद इनकी संख्या 30 रह गई है। आलम यह है कि जब किसी बीमार या बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाना पड़ता है तो डोली उठाने के लिए युहा नहीं मिल पाते हैं। इसके बाद भी विकास के दावे करने वाली सरकार और जनप्रतिनिधियों को ग्रामीणों का दर्द नहीं दिख रहा है।
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पहाड़ जितने खूबसूरत होते हैं उतना ही कठिन यहां का जीवन भी होता है। अल्मोड़ा जिले के सीमावर्ती गांव पभ्या खेती, किसानी और बागवानी की दृष्टि से समृद्ध है। लंबे समय से यहां के लोग गांव के लिए सड़क का निर्माण करने की मांग कर रहे हैं बावजूद इसके आजादी के 78 वर्ष बाद भी उनकी मांग पूरी नहीं हो पाई है। भले ही इन वर्षों में हमने चांद की सैर कर ली हो। हैरानी की बात है कि मात्र 4.5 किमी लंबी सड़क के निर्माण का प्रस्ताव लोनिवि कार्यालय अल्मोड़ा में धूल फांक रहा है। गांव में कोई बुजुर्ग, बच्चा, महिला अगर बीमार होते हैं तो उन्हें डोली में बैठाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। कई बार तो डोली उठाने के लिए युवा नहीं मिल पाते हैं क्योंकि गांव के अधिकतर युवा रोजगार के लिए महानगरों में काम कर रहे हैं। इस मामले में डीएम आलोक कुमार पांडेय ने कहा कि गांव के लिए जल्द सड़क बने, इसके पूरे प्रयास किए जाएंगे।
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गांव में बचे हैं बुजुर्ग और महिलाएं
पभ्या गांव में केवल बुजुर्ग, महिला और बच्चे ही बचे हुए हैं। उन्हें अपने बीमारी का इलाज कराने के लिए 4. 30 किलोमीटर का रास्ता तय कर अस्पताल तक पहुंचना पड़ता है। वह भी घने जंगलों के बीच से हर वक्त जंगली जानवरों के हमले का खतरा बना रहता है।
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बोले ग्रामीण-
पभ्या गांव के लिए लंबे समय से सड़क का निर्माण करने की मांग की जा रही है। इसके बाद भी सड़क के निर्माण के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। कई बार स्थानीय सांसद और विधायक से भी गुहार लगा दी है। - केडी भट्ट, सेवानिवृत्त कमांडेंट
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आजादी के 78 वर्ष में गांव के लिए सड़क न बन पाना अपने आप में अचंभा है। गांव के अधिकतर लोग पलायन कर चुके हैं। युवा महानगरों में रोजगार कर रहे हैं। कई बार गर्भवती और बीमार बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाने के लिए डोली उठाने के लिए भी व्यक्ति नहीं मिलते। - खीमानंद जोशी, ग्रामीण
सड़क के इंतजार में आंखें पथरा गई हैं। कब सड़क बनेगी, इसका कोई अता-पता नहीं है। गांव में सब परेशान हैं। सड़क बन जाती तो बुढ़ापे में पैदल न चलना पड़ता। - दुर्गा देवी, बुजुर्ग महिला
इनसेट कोट-
पीएमजीएसवाई योजना के तहत जिस गांव ही आबादी 100 भी है वहां सड़क पहुंच जाएगी। पूरे प्रदेश में इसके सर्वेक्षण हो गए हैं। इस योजना के तहत पभ्या को भी शामिल किया जाएगा। - अजय टम्टा, केंद्रीय सड़क परिवहन राज्यमंत्री भारत सरकार

इनसेट कोट-
अल्मोड़ा विधानसभा का दूरस्थ गांव पभ्या तक सड़क पहुंचाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। शासन से स्वीकृति दिलाकर कार्य किया जाएगा। ग्रामीणों की मांग आवश्यक है उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा। - मनोज तिवारी, विधायक अल्मोड़ा
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