{"_id":"5d73c8bfce40a74755a1769b2a965d65","slug":"the-reduction-in-the-cost-of-combating-inflation-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खर्च में कटौती से महंगाई का मुकाबला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खर्च में कटौती से महंगाई का मुकाबला
ब्यूरो/अमर उजाला, अल्मोड़ा।
Updated Thu, 19 Feb 2015 11:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार का नया बजट करीब है। बढ़ती महंगाई और रोजगार नहीं बढ़ने से लोगों को परिवार का गुजारा करना मुश्किल पड़ रहा है। जिस दर से महंगाई बढ़ रही है उस अनुपात में आय नहीं बढ़ने से रोजमर्रा की जरूरतों में कटौती कर काम चलाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
धारानौला मार्ग निवासी 72 वर्षीय सनाउल्ला अंसारी जूते का फड़ लगाकर परिवार का गुजारा करते हैं। उनके परिवार में दो लोग कमाने वाले हैं। जबकि परिवार में 11 सदस्य हैं। महीने में छह हजार रुपए का राशन, तीन हजार रुपए की सब्जी और दो हजार रुपए दूध में खर्च होते हैं। बिजली का दो माह का बिल दो हजार रुपए बैठता है। गैस का खर्चा अलग। वीरशिवा में पढ़ने वाले दो पोतों की साल भर की फीस पर करीब अस्सी हजार और कालेज पढ़ने वाली तीन बेटियों की फीस पर भी काफी खर्च हो जाता है। इसके अलावा दवा में ही हर माह करीब हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। परिवार का हर माह का खर्चा औसतन 20 हजार रुपए से अधिक है जबकि कमाई इतनी नहीं होती। सनाउल्ला कहते हैं कि आय सीमित है और खर्च अधिक है। बजट को बनाए रखने के लिए त्योहारों समेत अन्य खर्चों में कटौती करनी पड़ती है तब जाकर बड़ी मुश्किल से गुजारा हो पाता है। अब नए बजट में सरकार राशन और रोजमर्रा काम आने वाली चीजों के दाम घटा दे तो कुछ राहत मिल सकती है।
विज्ञापन
आय बढ़ने के आंकड़े में दम नहीं
अल्मोड़ा। जीडीपी बढ़ने के साथ ही सरकार देश में प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी होने का दावा कर रही है, लेकिन महंगाई से आम जनता परेशान है। सरसों गांव में डेरी चलाने वाले शिवराज सिंह बिष्ट कहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग प्रति माह चार से पांच हजार रुपए की आय से किसी तरह गुजारा कर रहे हैं लेकिन सरकार हमारी आय को 11 हजार रुपये प्रदर्शित कर रही है। सरकार के आंकड़ों में भले ही लोगों की आय बढ़ रही है पर लोगों को आजीविका चलाना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का अभाव है। रोजगार के अभाव में लोगों की आजीविका नहीं चल पा रही है। पलायन बढ़ रहा है। महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है।
विज्ञापन
अपेक्षा के अनुरूप कम नहीं हुई महंगाई
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल के नौ माह पूरे हो गए हैं। चुनाव के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से सुशासन लाने, महंगाई घटाने, काला धन वापस लाने तथा भ्रष्टाचार मिटाने सहित तमाम वादे किए थे। बार एसोसिएशन रानीखेत के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद पांडे का कहना है महंगाई में खास कमी नहीं आई है। काले धन को लेकर सरकार ने कुछ पहल जरूर की है। उनका कहना है कि मोदी सरकार को अभी कुछ और वक्त मिलना चाहिए। पांडे का कहना है कि प्रधानमंत्री ने काला धन वापस लाने की पहल शुरू कर देश में सुशासन लाने की तरफ सकारात्मक कदम उठाया है। इस कार्य में विदेशी कानून भी आड़े आ रहा है। नौ माह के कार्यकाल में अपेक्षा के अनुरूप महंगाई नहीं घटी है। उन्होंने कहा कि बीते दिनों अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम घटे हैं इसीलिए देश में भी तेल के दामों में कमी आई है। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में तत्काल परिवर्तन नहीं होता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समय देने की दरकार है। भविष्य में अच्छे परिणाम आने की उम्मीद है।