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वनाग्नि से ग्लेशियर को पहुंचेगा नुकसान
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The glacier will be affected by forest fire
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अल्मोड़ा। इस साल उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने की काफी घटनाएं हो चुकीं हैं। आग पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है। इससे वन्य जीवों, पेड़ पौधों का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। जंगलों में आग अगर यूं ही धधकती रही तो ग्लेशियरों को भी काफी नुकसान पहुंच सकता है। इनके पिघलने में तेजी आ सकती है।
अल्मोड़ा के कोसी कटारमल स्थित जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान जंगल में आग की घटनाओं पर नजर बनाए हुए है। यहां के वैज्ञानिकों का कहना है कि जंगल की आग से जीव जंतुओं को तो नुकसान पहुंचता ही है, उच्च हिमालयी क्षेत्रों तक भी इसका असर पड़ता है। वैज्ञानिकों के अनुसार आग लगने से पर्यावरण में काले कार्बन की मात्रा काफी बढ़ जाती है। तापमान बढ़ जाता है, ग्लेशियर तेजी से पिघलने लगते हैं। इस साल सर्दियों में हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी वैसे ही कम हुई है और तापमान सामान्य से ज्यादा चल रहा है। फायर सीजन के दो माह भी नहीं हुए हैं और जंगलों में आग की घटनाएं रिकॉर्ड तोड़ रहीं हैं।
निश्चित रूप से जंगलों में लगी आग हिमालय के लिए नुकसानदायक साबित होगी। इससे ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने का खतरा है।- डॉ. जेेसी कुनियाल, वैज्ञानिक, जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान, अल्मोड़ा।
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पिछले दस वर्षों में उत्तराखंड में वनाग्नि की घटनाएं
साल जंगल जले (हेक्टेयर में)
2021 1297.43 (अक्टूबर से 4 अप्रैल तक)
2020 155.89 (जून तक)
2019 1654
2018 4480.04
2017 1244.64
2016 4437.75
2015 701.61
2014 930.33
2013 384.05
2012 2823.09
2011 231.75
2010 1610.82
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अल्मोड़ा के कोसी कटारमल स्थित जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान जंगल में आग की घटनाओं पर नजर बनाए हुए है। यहां के वैज्ञानिकों का कहना है कि जंगल की आग से जीव जंतुओं को तो नुकसान पहुंचता ही है, उच्च हिमालयी क्षेत्रों तक भी इसका असर पड़ता है। वैज्ञानिकों के अनुसार आग लगने से पर्यावरण में काले कार्बन की मात्रा काफी बढ़ जाती है। तापमान बढ़ जाता है, ग्लेशियर तेजी से पिघलने लगते हैं। इस साल सर्दियों में हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी वैसे ही कम हुई है और तापमान सामान्य से ज्यादा चल रहा है। फायर सीजन के दो माह भी नहीं हुए हैं और जंगलों में आग की घटनाएं रिकॉर्ड तोड़ रहीं हैं।
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निश्चित रूप से जंगलों में लगी आग हिमालय के लिए नुकसानदायक साबित होगी। इससे ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने का खतरा है।- डॉ. जेेसी कुनियाल, वैज्ञानिक, जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान, अल्मोड़ा।
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पिछले दस वर्षों में उत्तराखंड में वनाग्नि की घटनाएं
साल जंगल जले (हेक्टेयर में)
2021 1297.43 (अक्टूबर से 4 अप्रैल तक)
2020 155.89 (जून तक)
2019 1654
2018 4480.04
2017 1244.64
2016 4437.75
2015 701.61
2014 930.33
2013 384.05
2012 2823.09
2011 231.75
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