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भुजान के पास सिहर उठते हैं चालक और यात्री
Sun, 23 Jun 2019 11:37 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन
अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Sun, 23 Jun 2019 11:37 PM IST
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कनवाणी की इसी पहाड़ी से बरसात में गिरते हैं पत्थर।
- फोटो : AMAR UJALA
बरसात का मौसम शुरू होते ही रानीखेत-हल्द्वानी हाईवे पर भुजान के पास पहुंचते ही वाहन चालकों और यात्रियों में दहशत भर जाती है। इसका कारण है कनवाणी की पहाड़ी से होने वाली पत्थरों की बारिश। पिछले साल एक केमू बस के ऊपर पत्थर गिरे, एक दर्जन से अधिक सवारी बाल-बाल बचे। करीब दो से तीन सौ मीटर की खड़ी पहाड़ी से गिरने वाले पत्थरों की रोकथाम के लिए विभाग भी अक्षम साबित हो रहा है। हालांकि नीचे स्लाइडिंग जोन में एडीवी नैनीताल द्वारा कुछ कार्य जरूर हुए हैं।
रानीखेत-हल्द्वानी हाईवे पर भुजान के पास कनवाणी की पहाड़ी डेंजर जोन के रूप में चिन्ह्ति है। अब बरसात शुरू होने वाली है, हर बरसात में इस डेंजर पहाड़ी से पत्थरों की बारिश शुरू हो जाती है। जिस कारण आने जाने वाले वाहन चालक और यात्रियों में दहशत रहती है। एक साल पहले ही यहां एक केमू की बस पहाड़ी से गिर रहे पत्थरों की चपेट में आ गई थी, चालक की सूझबूझ से एक दर्जन से अधिक यात्रियों की बमुश्किल जान बची थी।
काेट
कनवाणी की पहाड़ काफी खतरनाक है। दो से तीन सौ मीटर की खड़ी ऊंचाई से पत्थर गिरते हैं। इस पहाड़ी का पहले हमारी टीम निरीक्षण कर चुकी है, पत्थरों की रोकथाम यहां संभव नहीं हैं। ट्रीटमेंट करते हैं तो बड़े पत्थरों के खिसकने का डर है। हां स्लाडिंग एरिया में चौड़ीकरण आदि कार्य एडीवी ने किए हैं।
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केएल वर्मा, अधिशासी अभियंता, पीडब्लूडी रानीखेत।
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रानीखेत-हल्द्वानी हाईवे पर भुजान के पास कनवाणी की पहाड़ी डेंजर जोन के रूप में चिन्ह्ति है। अब बरसात शुरू होने वाली है, हर बरसात में इस डेंजर पहाड़ी से पत्थरों की बारिश शुरू हो जाती है। जिस कारण आने जाने वाले वाहन चालक और यात्रियों में दहशत रहती है। एक साल पहले ही यहां एक केमू की बस पहाड़ी से गिर रहे पत्थरों की चपेट में आ गई थी, चालक की सूझबूझ से एक दर्जन से अधिक यात्रियों की बमुश्किल जान बची थी।
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कनवाणी की पहाड़ काफी खतरनाक है। दो से तीन सौ मीटर की खड़ी ऊंचाई से पत्थर गिरते हैं। इस पहाड़ी का पहले हमारी टीम निरीक्षण कर चुकी है, पत्थरों की रोकथाम यहां संभव नहीं हैं। ट्रीटमेंट करते हैं तो बड़े पत्थरों के खिसकने का डर है। हां स्लाडिंग एरिया में चौड़ीकरण आदि कार्य एडीवी ने किए हैं।
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केएल वर्मा, अधिशासी अभियंता, पीडब्लूडी रानीखेत।