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सूर्य ग्रहण में मंदिरों के कपाट रहे बंद, ग्रहण हटने के बाद हुई आरती

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 25 Oct 2022 11:57 PM IST
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The doors of the temples remained closed during the solar eclipse, after the eclipse was removed, the aarti took place
बागेश्वर में सूर्य ग्रहण के समय बंद हुए बागनाथ मंदिर के कपाट। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
अल्मोड़ा। सूर्य ग्रहण के दौरान विश्व प्रसिद्ध जागेश्वर धाम समेत अन्य मंदिरों के कपाट बंद रहे। शाम को ग्रहण हटने के बाद मंदिरों में साफ-सफाई के बाद आरती हुई।
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सूर्य ग्रहण शुरू होने से करीब 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो गया था। सूर्य ग्रहण में विश्व प्रसिद्ध जागेश्वर धाम सहित जिले के सभी मंदिरों के कपाट बंद रहे। जागेश्वर धाम के महामंत्युजय मंदिर के पुजारी शुभम भट्ट ने बताया कि विश्व प्रसिद्ध जागेश्वर धाम के कपाट ग्रहण के चलते ढाई बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक बंद रहे। ग्रहण के दौरान जिले के अन्य मंदिरों के कपाट भी बंद रहे। शाम को ग्रहण हटने के बाद मंदिरों में साफ-सफाई कर पूजा और आरती हुई। जागेश्वर धाम में भी शाम को महाआरती हुई। सूर्य ग्रहण के दौरान कई लोगों ने तिल, नींबू और पका हुआ केला बहते हुए जल में समर्पित किया। सूर्य ग्रहण के बाद लोगों ने मसूर दाल, लाल कपड़ा, तांबे के पात्र, गेहूं और लाल फल का दान किया। यह दान उत्तम माना गया है। मान्यता है कि ग्रहण के बाद इन चीजों का दान करने से कुंडली में मौजूद ग्रहों के सभी दोष दूर होते हैं और शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
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आज होगी गोवर्धन पूजा, भाई दूज कल
अल्मोड़ा। इस बार दिवाली के बाद सूर्य ग्रहण पड़ने के कारण मंगलवार को गोवर्धन पूजा नहीं हुई। जागेश्वर धाम के महामंत्युजय मंदिर के पुजारी शुभम भट्ट ने बताया 26 अक्तूबर को गोवर्धन पूजा होगी जबकि 27 अक्तूबर को भैया दूज पर्व मनाया जाएगा।
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सूर्य ग्रहण के समय बंद रहे बागनाथ मंदिर के कपाट
बागेश्वर। सूर्य ग्रहण के दौरान जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों के कपाट बंद रहे। बागनाथ धाम में ग्रहण शुरू होने से पूर्व मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे। ग्रहण के दौरान महिलाओं ने सरयू नदी किनारे भजन कीर्तन किए। ग्रहण के बाद मंदिर के पट खोले गए।

आंशिक सूर्य ग्रहण की शुरुआत से पूर्व बागनाथ मंदिर प्रबंधन समिति और सेवादारों ने मंदिर के कपाट बंद कर दिए थे। दीपावली के बाद की सुनसानी के चलते मंदिर में अधिक श्रद्धालु नहीं थे। नगर की कुछ महिलाओं ने सरयू नदी किनारे बैठकर ग्रहण से शांति के लिए भजन कीर्तन किए। साधु-संतों ने भी इस दौरान जप आदि धार्मिक कार्य किए। लोगों ने घरों में भी ग्रहण की शांति के लिए पूजा की और ब्राह्मणों को दान दिया। संवाद
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