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दो तस्करों को तीन-तीन साल का कठोर कारावास
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Fri, 27 May 2016 12:53 AM IST
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कार्ट का आदेश
- फोटो : अमर उजाला
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अर्चना सागर ने भालू की दो पित्ती की थैली के साथ पकड़े गए नेपाली समेत दो आरोपियों को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में दोषी पाते हुए तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
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राम सिंह पुत्र खीम सिंह निवासी वनगांव छेती नेपाल ने पौड़ी जिले के जैनदरिया के जंगल में मादा भालू और उसके बच्चे को मारकर भालू की पित्तियां निकाली। अर्जुन सिंह पुत्र साकम सिंह ग्राम खेतोली थलीसैंण पौड़ी गढ़वाल के साथ मिलकर पित्तियां बेचने के लिए वे ऊपरईखाल से सराईखेत को आ रहे थे। मुखबिर की सूचना पर जौरासी रेंज के वन कर्मियों ने 26 जून 2012 को सराईखेत के पास दोनों को भालू की दो पित्ती के साथ पकड़ लिया।
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वन क्षेत्रधिकारी चंदन गिरि गोस्वामी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ वाद दायर किया। अभियोजन की ओर से अधिवक्ता पीसी तिवारी और वन विभाग के कोर्ट प्रभारी भगवती प्रसाद जोशी ने पैरवी की। अभियोजन की ओर से रेंजर चंदन गिरि गोस्वामी, वन दरोगा कौस्तुबानंद उप्रेती, वन रक्षक दिनेश जोशी, विवेचना अधिकारी उप प्रभागीय वनाधिकारी रानीखेत वीके सिंह को न्यायालय में परीक्षित कराया गया।
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पत्रावली में प्रस्तुत अभिलेखों, बयानों और दोनों पक्षों की बहस सुनी। न्यायालय में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में दोनों आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ। न्यायालय ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में दोनों आरोपियों को तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। इधर अल्मोड़ा वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी एसआर प्रजापति ने मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के प्रयासों की सराहना की है।