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तकनीक के बारे में जाना और बीज खरीद ले गए
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
Updated Wed, 08 Apr 2015 11:41 PM IST
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विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का हवालबाग अल्मोड़ा में आयोजित किसान मेले में कई इलाकों से काश्तकार पहुंचे। किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों और उन्नत बीजों के बारे में जानकारी दी गयी।
गंगोलीहाट के सलार गांव के बहादुर सिंह पहली बार किसान मेले में पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि मेले में पहुंचकर कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी ली और बीज खरीदे। गंगोलीहाट की हीरा खाती पहले भी किसान मेले में शामिल हो चुकी हैं। उनका कहना है कि यहां आकर वैज्ञानिकों से नई तकनीकों के बारे में जानकारी मिलती है। किसान मेला काश्तकारों के लिए लाभदायक है।
रैलाकोट निवासी नवीन चंद्र जोशी कहते हैं कि किसानों को मेले में अधिक से अधिक संख्या में भागीदारी करनी चाहिए। वह यहां मिली कृषि तकनीकों की जानकारी गांव के अन्य लोगों तक पहुंचाएंगे। पिथौरागढ़ के बालाकोट गांव से दुर्गा देवी समेत छह किसान मेले में पहुंचे थे। दुर्गा देवी ने बताया कि वह पहली बार मेले में भागीदारी कर रही हैं। वह बीज खरीदकर ले जाएंगी।
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किसान मेले में काश्तकारों ने जंगली सुअरों की भी समस्या रखी। उनका कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुअरों के झुंड खेती को नष्ट कर रहे हैं। वन विभाग और जनप्रतिनिधियों को सुअरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए कारगर कदम उठाने चाहिए।
ताड़ीखेत के मटिला गांव के रमेश भंडारी कहते हैं कि किसानों को उन्नत तकनीक की जानकारी तो दी जा रही है, लेकिन सुअरों के झुंड खेतों को बर्बाद कर रहे हैं। जब तक सुअरों का आतंक खत्म नहीं होगा तब तक नई तकनीक और उन्नत बीजों का भी कोई फायदा मिलने वाला नहीं है।
गंगोलीहाट के सलार गांव के बहादुर सिंह पहली बार किसान मेले में पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि मेले में पहुंचकर कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी ली और बीज खरीदे। गंगोलीहाट की हीरा खाती पहले भी किसान मेले में शामिल हो चुकी हैं। उनका कहना है कि यहां आकर वैज्ञानिकों से नई तकनीकों के बारे में जानकारी मिलती है। किसान मेला काश्तकारों के लिए लाभदायक है।
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रैलाकोट निवासी नवीन चंद्र जोशी कहते हैं कि किसानों को मेले में अधिक से अधिक संख्या में भागीदारी करनी चाहिए। वह यहां मिली कृषि तकनीकों की जानकारी गांव के अन्य लोगों तक पहुंचाएंगे। पिथौरागढ़ के बालाकोट गांव से दुर्गा देवी समेत छह किसान मेले में पहुंचे थे। दुर्गा देवी ने बताया कि वह पहली बार मेले में भागीदारी कर रही हैं। वह बीज खरीदकर ले जाएंगी।
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किसान मेले में काश्तकारों ने जंगली सुअरों की भी समस्या रखी। उनका कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुअरों के झुंड खेती को नष्ट कर रहे हैं। वन विभाग और जनप्रतिनिधियों को सुअरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए कारगर कदम उठाने चाहिए।
ताड़ीखेत के मटिला गांव के रमेश भंडारी कहते हैं कि किसानों को उन्नत तकनीक की जानकारी तो दी जा रही है, लेकिन सुअरों के झुंड खेतों को बर्बाद कर रहे हैं। जब तक सुअरों का आतंक खत्म नहीं होगा तब तक नई तकनीक और उन्नत बीजों का भी कोई फायदा मिलने वाला नहीं है।