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विश्व जल दिवस: सूखने के कगार पर पहुंची स्याल्दे की विनोद नदी, सीएम धामी ने की थी घोषणा; मामला DPR तक सीमित
Sat, 22 Mar 2025 01:46 PM IST
हीरा मेहरा
दर्शन जोशी, संवाद
दर्शन जोशी, संवाद
Published by: हीरा मेहरा
Updated Sat, 22 Mar 2025 01:46 PM IST
सार
स्याल्दे क्षेत्र की जीवनदायिनी विनोद नदी सूखने के कगार पर पहुंच चुकी है। इस नदी में करीब 14 क्यूसेक पानी बहता था, मगर धीरे-धीरे यह घटकर 7 क्यूसेक के करीब आ चुका है।
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विनोद नदी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विश्व जल दिवस पर पहाड़ की उन नदियों की चिंता करना भी जरूरी है जिनका जल स्तर घट रहा है। इन्हीं नदियों में स्याल्दे क्षेत्र की जीवनदायिनी विनोद नदी भी शुमार है जो सूखने के कगार पर पहुंच चुकी है। इस नदी में करीब 14 क्यूसेक पानी बहता था, मगर धीरे-धीरे यह घटकर 7 क्यूसेक के करीब आ चुका है।
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दैड़ा बिनसर (पौड़ी गढ़वाल) से निकलने वाली विनोद नदी पर निर्भर क्षेत्र की बड़ी योजनाओं में सदे-महरगांव पेयजल योजना, तिमली-चचरोटी पेयजल योजना, छिनगाड़ पेयजल योजना, सुरमोली-भरसोली सिंचाई योजना, घटगाड़-वसलन सिंचाई योजना, देघाट सिंचाई योजना, पत्थरखोला-तिमली सिंचाईं योजना शामिल हैं। इनके अलावा कई छोटी-छोटी पेयजल योजनाएं हैं।
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यह नदी क्षेत्र की करीब 10 हजार की आबादी को पानी पिलाती है। खेतों को सींचती है। इस बार पेयजल का संकट पैदा हो गया है। करीब 10 सालों के अंतराल में जल स्तर आधे से भी कम हो चुका है। पेयजल संकट से बचाने के लिए मुख्यमंत्री ने झील का निर्माण करने की घोषणा की थी। मगर मामला डीपीआर तक सीमित है।
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