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जिंदगी पर बन आए ऐसे नियम तो न बनाओ 

Thu, 28 Apr 2016 10:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा। Updated Thu, 28 Apr 2016 10:47 PM IST
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So do not make the rules that came into life
रानीखेत जरूरी बाजार में इस तरह से गिरताऊ बने हुए हैं रिहायशी भवन। - फोटो : अमर उजाला

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पर्यटन नगरी में ब्रिटिशकाल में निर्मित जीर्ण भवनों की मरम्मत का कार्य नहीं हो पा रहा है। यदि कभी भूकंप या तूफान आ गया तो छावनी क्षेत्र में कई पुराने मकान ताश के पत्तों की तरह बिखर सकते हैं। छावनी परिषद में भवनों की मरम्मत संबंधी मानक जटिल होने के कारण एक दर्जन से अधिक मकान अब काफी जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। इन भवनों में कई लोग रह भी रहे हैं और हल्की बारिश में ही उनकी रूह कांप उठती है। 
भूकंप की दृष्टि से रानीखेत क्षेत्र जोन चार में आता है। छावनी क्षेत्र अंतर्गत सदरबाजार, जरूरी बाजार, खड़ी बाजार, आबकारी क्षेत्र में कई भवन जीर्णशीर्ण हालत में हैं। इन भवनों की उम्र 150 से 200 साल पुरानी बताई जाती है। मरम्मत नहीं होने से अधिकांश भवनों की छतें तथा मकानों में लगी लकड़ी की खिड़की और चौखटें सड़-गल चुकी हैं। लकड़ी से निर्मित कई भवनों की लकड़ियां तक जर्जर हो चली हैं। कई मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें तक हैं, जो भूकंप तो दूर आंधी-तूफान के झटके सहने की हालत में नहीं दिखते। इन भवनों में रह रहे लोगों का कहना है कि वर्षों से छावनी परिषद में मरम्मत के लिए प्रपत्र लगाए गए हैं, लेकिन मरम्मत की इजाजत आज तक नहीं मिली है। 
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नियमित रूप से भवनों की मरम्मत की इजाजत दी जाती है। इसके लिए म्यूटेशन, लीज नवीनीकरण आदि औपचारिकताएं पूरी होनी चाहिए। किराएदार को मरम्मत की इजाजत नहीं दी जा सकती। अधिकांश पुराने भवनों में इसी तरह की समस्या आड़े आ रही हैं।
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- एमवीएन रेड्डी, मुख्य अधिशासी अधिकारी, कैंट बोर्ड रानीखेत। 

नगर में जीर्णशीर्ण हो चले भवन वास्तव में परेशानी का सबब बने हुए हैं। छावनी परिषद के समक्ष जीर्णशीर्ण हो चले भवनों को ध्वस्त करने की मांग की गई है। भवन स्वामियों से भी म्यूटेशन आदि के प्रपत्र भी कैंट में जमा कराने को कहा गया है। 

 
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