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अंग्रेजी सेना के आगे कभी नहीं झुके सल्ट के क्रांतिवीर
पंकज मेहरा/अमर उजाला ब्यूरो, मौलेखाल (अल्मोड़ा)।
Updated Sun, 04 Sep 2016 11:55 PM IST
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शहीद स्मारक खुमाड़
- फोटो : अमर उजाला
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पंकज मेहरा
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मौलेखाल (अल्मोड़ा)। आजादी की लड़ाई में सल्ट क्षेत्र के क्रांतिकारियों का बलिदान कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। पांच सितंबर 1942 को आज ही के दिन आजादी की लड़ाई के दौरान खुमाड़ के खीमानंद और उनके भाई गंगा राम समेत बहादुर सिंह, चूड़ामणि शहीद हो गए थे। साथ ही कई क्रांतिकारी घायल हो गए। इनकी याद में खुमाड़ में शहीद स्मारक बना है। सोमवार को सल्ट के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
आजादी की लड़ाई में सल्ट के क्रांतिकारी भी पीछे नहीं रहे। सल्ट क्षेत्र में स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन की आग 1921 से ही सुलगने लगी थी। धीरे-धीरे आंदोलन ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया और अंग्रेजी सेना की सख्ती बेअसर होने लगी। खुमाड़ निवासी क्रांतिकारी पंडित पुरुषोत्तम उपाध्याय और लक्ष्मण सिंह अधिकारी के नेतृत्व में सल्ट क्षेत्र में 1921 से आजादी की जंग ने जोर पकड़ लिया।
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सल्ट के लगभग सभी गांवों में सेनानी मौजूद थे। जिनमें सब कुछ कर गुजरने का जज्बा था। अत्यधिक दुर्गम इलाका होने के कारण यहां ब्रिटिश साम्राज्य का असर खास नहीं था। जबकि राष्ट्रव्यापी आंदोलन की हवा तेजी से पहुंचने लगी। 1931 में मोहान में जंगल आंदोलन के दौरान भारी संख्या में गिरफ्तारियां हुईं। क्रांतिकारियों को कमजोर करने के लिए अंग्रेजी सेना ने क्रांतिकारियों पर जोरदार लाठीचार्ज करवा दिया।
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देश की आजादी के साथ ही अन्य तमाम समानांतर आंदोलनों में सल्ट के लोग भागीदार रहे। 1942 में महात्मा गांधी के भारत छोड़ो और करो या मरो के नारे की प्रतिक्रिया हुई। पांच सितंबर 1942 को एक तरफ रानीखेत से परगना मजिस्ट्रेट जॉनसन दलबल के साथ विद्रोह को कुचलने के लिए खुमाड़ पहुंचा। वहीं खुमाड़ में क्रांतिकारियों और भारी जनसमुदाय की मौजूदगी में सभा चल रही थी।
टकराव के चलते जॉनसन ने सभा स्थल में मौजूद लोगों पर गोलियां चला दी। जिसमें खीमानंद, उनके सगे भाई गंगा राम, बहादुर सिंह, चूड़ामणि चार लोग मौके पर ही शहीद हो गए, जबकि 12 से अधिक क्रांतिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। सल्ट के क्रांतिकारियों की शहादत पर हर साल खुमाड़ स्थित शहीद स्मारक पर पांच सितंबर को शहीद दिवस समारोह आयोजित किया जाता है। जिसमें खुमाड़ के शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
मौलेखाल। देश की आजादी के लिए खुमाड़ के क्रांतिवीरों ने अपना बलिदान दे दिया लेकिन शहीदों की शहादत पर आज भी राजनीति की जाती है। शहीद दिवस समारोह स्थल खुमाड़ में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के नाम पर विभिन्न राजनीतिक दल अलग-अलग मंच लगाते हैं। इन मंचों से राजनीतिक दल शहीदों की कुर्बानी को याद करने के बजाए एक दूसरी पार्टियों पर कटाक्ष ज्यादा करते हैं। आम लोगों का मानना है कि शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए नेताओं को एक मंच पर आना चाहिए।