{"_id":"5f64fb858ebc3e4b396634a3","slug":"seven-doctors-transferred-almora-news-hld39743087","type":"story","status":"publish","title_hn":"कमी के बावजूद भी सात डॉक्टरों का दूसरे जिलों में किया गया ट्रांसफर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कमी के बावजूद भी सात डॉक्टरों का दूसरे जिलों में किया गया ट्रांसफर
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अल्मोड़ा। जिला पहले से ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है, लेकिन अब पीजी कर लौटे सात डॉक्टरों का भी जिले से बाहर स्थानांतरण कर दिया गया है। सात डॉक्टरों के स्थानांतरण होने से मरीजों की समस्याएं और भी बढ़ गई है। पहले से ही जिले में 50 फीसदी से भी कम डॉक्टर तैनात हैं। इसके बाद भी डॉक्टरों का स्थानांतरण होने से लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलना मुश्किल हो गया है।
जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। डॉक्टरों की कमी से जिले में मरीजों को कई बार स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। जिले में स्वीकृत पदों के सापेक्ष 50 फीसदी से भी कम डॉक्टर तैनात हैं। जिले में नियमित डॉक्टरों के कुल 286 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 191 पदों पर नियुक्ति हुई है, लेकिन इनमें से भी 39 डॉक्टर पीजी करने बाहर गए हैं, जबकि 20 लंबे समय से अनुपस्थित हैं। अब 132 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। संविदा बांडधारी के रूप में 66 डॉक्टर रखे गए हैं। इनमें से 26 पीजी के लिए गए हैं, 14 अनुपस्थित हैं। सिर्फ 26 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। पहले ही जिला डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा था, लेकिन इधर पीजी कर लौटे सात डॉक्टरों का भी दूसरे जिले में स्थानांतरण कर दिया गया है। सात डॉक्टरों के ट्रांसफर होने से मरीजों को और अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। डॉक्टरों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। जिले में द्वाराहाट से दो, देघाट से एक, ताड़ीखेत से दो, चलनीछीना से एक, लमगड़ा से एक डॉक्टर का तबादला हुआ है। यह सभी डॉक्टर पीजी डिग्री लेकर लौटे थे। इसके बाद उनके स्थानांतरण हो चुके हैं।
नहीं थम रहा गर्भवतियों को रेफर करने का सिलसिला
अल्मोड़ा। महिला अस्पताल में भी डॉक्टरों का कमी बनी रहती है। नियमित डॉक्टर न होने के नाम पर कई बार गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। वहीं लोगों का आरोप है कि कई बार डॉक्टरों के उपस्थित होने के बाद भी वह ऑपरेशन नहीं करते हैं। बृहस्पतिवार को भी दो गर्भवती महिलाओं को अस्पताल से रेफर किया गया था। महिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के कुल पांच पद स्वीकृत हैं, लेकिन इसमें नियमित रूप से एक ही डॉक्टर तैनात हैं, जबकि दो स्त्रीरोग विशेषज्ञ संविदा पर हैं। बृहस्पतिवार को भी अस्पताल में नियमित पद पर स्त्री रोग विशेषज्ञ के अवकाश पर रहने से दो गर्भवती महिलाओं को रेफर किया गया था। तीमारदारों का आरोप है कि बृहस्पतिवार को इनमें से एक स्त्री रोग विशेषज्ञ नगर में ही थी। उन्हें कई बार फोन कर बुलवाया भी लेकिन वह ऑपरेशन करने नहीं पहुंची। ऐसा कई बार होता है जब यहां रहने के बावजूद डॉक्टर ऑपरेशन के लिए अस्पताल नहीं आते।
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पुलिस बुलाने पर जताया आक्रोश
अल्मोड़ा। महिला अस्पताल में पुलिस बुलवाने के मामले में गर्भवती महिलाओं के तीमारदारों में आक्रोश है। बृहस्पतिवार को महिला अस्पताल में दो गर्भवती महिलाओं को रेफर कर दिया गया था। तीमारदारों ने रेफर करने पर आपत्ति जताई, जिसको लेकर अस्पताल प्रशासन ने पुलिस बुलवा ली। तीमारदारों ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा उन्हें धमकाया गया। बाद में यहां से गर्भवती को तुरंत ले जाने के लिए भी कहा गया। महिला अस्पताल और पुलिस प्रशासन के रवैये पर उन्होंने रोष जताया है। लोगों का कहना है कि अक्सर महिला अस्पताल में पुलिस बल बुलवा लिया जाता है, जो गलत है। संवाद
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जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। डॉक्टरों की कमी से जिले में मरीजों को कई बार स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। जिले में स्वीकृत पदों के सापेक्ष 50 फीसदी से भी कम डॉक्टर तैनात हैं। जिले में नियमित डॉक्टरों के कुल 286 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 191 पदों पर नियुक्ति हुई है, लेकिन इनमें से भी 39 डॉक्टर पीजी करने बाहर गए हैं, जबकि 20 लंबे समय से अनुपस्थित हैं। अब 132 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। संविदा बांडधारी के रूप में 66 डॉक्टर रखे गए हैं। इनमें से 26 पीजी के लिए गए हैं, 14 अनुपस्थित हैं। सिर्फ 26 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। पहले ही जिला डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा था, लेकिन इधर पीजी कर लौटे सात डॉक्टरों का भी दूसरे जिले में स्थानांतरण कर दिया गया है। सात डॉक्टरों के ट्रांसफर होने से मरीजों को और अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। डॉक्टरों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। जिले में द्वाराहाट से दो, देघाट से एक, ताड़ीखेत से दो, चलनीछीना से एक, लमगड़ा से एक डॉक्टर का तबादला हुआ है। यह सभी डॉक्टर पीजी डिग्री लेकर लौटे थे। इसके बाद उनके स्थानांतरण हो चुके हैं।
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नहीं थम रहा गर्भवतियों को रेफर करने का सिलसिला
अल्मोड़ा। महिला अस्पताल में भी डॉक्टरों का कमी बनी रहती है। नियमित डॉक्टर न होने के नाम पर कई बार गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। वहीं लोगों का आरोप है कि कई बार डॉक्टरों के उपस्थित होने के बाद भी वह ऑपरेशन नहीं करते हैं। बृहस्पतिवार को भी दो गर्भवती महिलाओं को अस्पताल से रेफर किया गया था। महिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के कुल पांच पद स्वीकृत हैं, लेकिन इसमें नियमित रूप से एक ही डॉक्टर तैनात हैं, जबकि दो स्त्रीरोग विशेषज्ञ संविदा पर हैं। बृहस्पतिवार को भी अस्पताल में नियमित पद पर स्त्री रोग विशेषज्ञ के अवकाश पर रहने से दो गर्भवती महिलाओं को रेफर किया गया था। तीमारदारों का आरोप है कि बृहस्पतिवार को इनमें से एक स्त्री रोग विशेषज्ञ नगर में ही थी। उन्हें कई बार फोन कर बुलवाया भी लेकिन वह ऑपरेशन करने नहीं पहुंची। ऐसा कई बार होता है जब यहां रहने के बावजूद डॉक्टर ऑपरेशन के लिए अस्पताल नहीं आते।
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पुलिस बुलाने पर जताया आक्रोश
अल्मोड़ा। महिला अस्पताल में पुलिस बुलवाने के मामले में गर्भवती महिलाओं के तीमारदारों में आक्रोश है। बृहस्पतिवार को महिला अस्पताल में दो गर्भवती महिलाओं को रेफर कर दिया गया था। तीमारदारों ने रेफर करने पर आपत्ति जताई, जिसको लेकर अस्पताल प्रशासन ने पुलिस बुलवा ली। तीमारदारों ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा उन्हें धमकाया गया। बाद में यहां से गर्भवती को तुरंत ले जाने के लिए भी कहा गया। महिला अस्पताल और पुलिस प्रशासन के रवैये पर उन्होंने रोष जताया है। लोगों का कहना है कि अक्सर महिला अस्पताल में पुलिस बल बुलवा लिया जाता है, जो गलत है। संवाद