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हिमालय के विकास और उन्नति के लिए भविष्य के लक्ष्य निर्धारित करें: रावत
Tue, 24 Jun 2025 11:40 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Tue, 24 Jun 2025 11:40 PM IST
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जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान में आयोजित बैठक में मंचासीन अतिथि। स्वयं
अल्मोड़ा। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी-कटारमल में वैज्ञानिक सलाहकार समिति (एसएसी) की मंगलवार को 33वीं समीक्षा बैठक हुई। समिति के अध्यक्ष और कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीएस रावत ने हिमालयी क्षेत्र के प्रमुख मुद्दों पर गहन विचार विमर्श कर हिमालय के विकास और उन्नति के लिए भविष्य के लक्ष्य निर्धारित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिमालय एक बहुत बड़ा क्षेत्र है। इसके विकास के लिए संस्थान के पास नई चुनौतियां और संभावनाएं हैं। संस्थान इस दिशा में प्रयासरत है और अपने लक्ष्यों के अनुरूप कार्य कर रहा है।
उन्होंने विगत वर्षों में संस्थान के किए गए शोध और विकास कार्यों के लिए संस्थान के वैज्ञानिकों और शोधार्थियों की सराहना की। संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील नौटियाल ने संस्थान और इसके क्षेत्रीय केंद्रों के हिमालयी क्षेत्रों में किए जा रहे विभिन्न शोध व विकास संबंधित कार्यों पर प्रस्तुतीकरण दिया। संस्थान के चारों केंद्राध्यक्षों, क्षेत्रीय केंद्र प्रमुखों और केंद्र से संबद्ध वैज्ञानिकों ने संस्थान के बीते पांच वर्षों से चलाए जा रहे परिवर्तनकारी परियोजनाओं के तहत विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों में किए जा रहे शोध एवं विकासात्मक कार्यों को स्लाइड शो के माध्यम से प्रस्तुत किया।
समिति के अध्यक्ष और विषय विशेषज्ञ नेशनल इंस्टीट्यूट आफ डिजास्टर मैनेजमेंट नई दिल्ली के डिविज़न हेड प्रो अनिल के गुप्ता, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जम्मू कश्मीर के प्रो. आर उमा शंकर, नेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबल कोस्टल मैनेजमेंट चेन्नई के निदेशक डाॅ. पूर्वजा रामचंद्रन सहित अन्य विशेषज्ञों ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट का अनुमोदन किया। संस्थान के पिछले पांच वर्षों में किए गए परियोजना कार्यों की उपलब्धियां और अगले पांच वर्षों की प्रस्तावित परियोजनाओं की रूपरेखा पर चर्चा की गई।
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ये रहे मौजूद
वहां संस्थान के वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्य डाॅ. आईडी भट्ट, डाॅ. संदीपन मुखर्जी, डाॅ. शिवरंजिनी एस, डाॅ. पारोमिता घोष, महेंद्र सिंह लोधी, डाॅ. राजेश जोशी, डाॅ. के चंद्रशेखर, आरके सिंह, देवेंद्र कुमार, डाॅ. ललित गिरी आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने विगत वर्षों में संस्थान के किए गए शोध और विकास कार्यों के लिए संस्थान के वैज्ञानिकों और शोधार्थियों की सराहना की। संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील नौटियाल ने संस्थान और इसके क्षेत्रीय केंद्रों के हिमालयी क्षेत्रों में किए जा रहे विभिन्न शोध व विकास संबंधित कार्यों पर प्रस्तुतीकरण दिया। संस्थान के चारों केंद्राध्यक्षों, क्षेत्रीय केंद्र प्रमुखों और केंद्र से संबद्ध वैज्ञानिकों ने संस्थान के बीते पांच वर्षों से चलाए जा रहे परिवर्तनकारी परियोजनाओं के तहत विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों में किए जा रहे शोध एवं विकासात्मक कार्यों को स्लाइड शो के माध्यम से प्रस्तुत किया।
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समिति के अध्यक्ष और विषय विशेषज्ञ नेशनल इंस्टीट्यूट आफ डिजास्टर मैनेजमेंट नई दिल्ली के डिविज़न हेड प्रो अनिल के गुप्ता, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जम्मू कश्मीर के प्रो. आर उमा शंकर, नेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबल कोस्टल मैनेजमेंट चेन्नई के निदेशक डाॅ. पूर्वजा रामचंद्रन सहित अन्य विशेषज्ञों ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट का अनुमोदन किया। संस्थान के पिछले पांच वर्षों में किए गए परियोजना कार्यों की उपलब्धियां और अगले पांच वर्षों की प्रस्तावित परियोजनाओं की रूपरेखा पर चर्चा की गई।
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ये रहे मौजूद
वहां संस्थान के वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्य डाॅ. आईडी भट्ट, डाॅ. संदीपन मुखर्जी, डाॅ. शिवरंजिनी एस, डाॅ. पारोमिता घोष, महेंद्र सिंह लोधी, डाॅ. राजेश जोशी, डाॅ. के चंद्रशेखर, आरके सिंह, देवेंद्र कुमार, डाॅ. ललित गिरी आदि मौजूद रहे।