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बसनल गांव के किसान गैरोला ने पत्नी के साथ मिलकर मिशाल कायम की
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चौखुटिया के बसनल गांव में अपने खेत से सब्जियां तोड़ते कैलाश गैरोला। अमर उजाला
- फोटो : ALMORA
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चौखुटिया (अल्मोड़ा)। ग्राम पंचायत भैल्टगांव के बसनलगांव निवासी किसान ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर जैविक खेती से गोभी, टमाटर, शिमला मिर्च व धनियां आदि का उत्पादन कर मिसाल कायम की है। इससे उनकी आमदनी में भी इजाफा हुआ है।
बसनल गांव निवासी कैलाश गैरोला ने बताया कि करीब आठ साल पहले दिल्ली में नौकरी छोड़कर वापस गांव आए। दो साल पहले आजीविका परियोजना कार्यकर्ताओं के सुझाव पर परंपरागत गेहूं धान की जगह अपनी आठ नाली भूमि में जैविक खेती की। खेतों में गोबर के अलावा इफ्को की जैविक खादें सागरिका व तरल जैव उर्वरक का प्रयोग किया। पौधों में नाइट्रोजन की कमी को दूर करने के लिए यूरिया की जगह जैविक विकल्प 181818 का इस्तेमाल किया।
गैरोला ने बताया कि इस सीजन में पचास हजार की सब्जियां बिक गई हैं। सालभर में एक लाख से डेढ़ लाख तक आमदनी हो जाती है। सब्जियां चौखुटिया व मासी बाजार में बेचते हैं। इसमें पत्नी राधा देवी सहयोग करती हैं। परियोजना को संचालित करने वाली आईएफएफडीसी के परियोजना समन्वयक देश दीपक यादव व केंद्र समन्वयक दीपक शर्मा बताते हैं कि गैराला को आजीविका के माध्यम से 45 प्रतिशत छूट पर लिफ्टिंग पंप दिया गया है। साथ ही उनके पॉली हाउस के निकट सब्जी संग्रह केंद्र भी बनाया गया है।
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ऐसे करते हैं जंगली जानवरों से बचाव
चौखुटिया(अल्मोड़ा)। आजीविका परियोजना से मिली तार बाड़ कैलाश गैरोला की फसलों के लिए वरदान साबित हो रही है। वे गांव में गठित समूह के सचिव भी हैं समूह को छह माह में तार का 180 रुपये का भुगतान करते हैं।
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बसनल गांव निवासी कैलाश गैरोला ने बताया कि करीब आठ साल पहले दिल्ली में नौकरी छोड़कर वापस गांव आए। दो साल पहले आजीविका परियोजना कार्यकर्ताओं के सुझाव पर परंपरागत गेहूं धान की जगह अपनी आठ नाली भूमि में जैविक खेती की। खेतों में गोबर के अलावा इफ्को की जैविक खादें सागरिका व तरल जैव उर्वरक का प्रयोग किया। पौधों में नाइट्रोजन की कमी को दूर करने के लिए यूरिया की जगह जैविक विकल्प 181818 का इस्तेमाल किया।
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गैरोला ने बताया कि इस सीजन में पचास हजार की सब्जियां बिक गई हैं। सालभर में एक लाख से डेढ़ लाख तक आमदनी हो जाती है। सब्जियां चौखुटिया व मासी बाजार में बेचते हैं। इसमें पत्नी राधा देवी सहयोग करती हैं। परियोजना को संचालित करने वाली आईएफएफडीसी के परियोजना समन्वयक देश दीपक यादव व केंद्र समन्वयक दीपक शर्मा बताते हैं कि गैराला को आजीविका के माध्यम से 45 प्रतिशत छूट पर लिफ्टिंग पंप दिया गया है। साथ ही उनके पॉली हाउस के निकट सब्जी संग्रह केंद्र भी बनाया गया है।
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चौखुटिया(अल्मोड़ा)। आजीविका परियोजना से मिली तार बाड़ कैलाश गैरोला की फसलों के लिए वरदान साबित हो रही है। वे गांव में गठित समूह के सचिव भी हैं समूह को छह माह में तार का 180 रुपये का भुगतान करते हैं।