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कोसी बचाने के लिए चनौदा में जुटे वैज्ञानिक

Thu, 08 Jun 2017 10:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा। Updated Thu, 08 Jun 2017 10:32 PM IST
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 Scientists gathered in Chanoda to save Kosi
छानी ल्वेसाल में जल स्त्रोत का निरीक्षण करते विशेषज्ञ और अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला

 दिनों दिन सूख रही कोसी और उसकी सहायक नदियों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में जीबी पंत हिमालय संस्थान, पीएसआई, कुमाऊं विवि के वैज्ञानिकों अलावा जिले के संबंधित विभागों के अधिकारियों और अन्य विशेषज्ञों ने कोसी के उद्गम स्थल के निकट चनौदा में बैठक करके नदी को रिचार्ज करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।             वैज्ञानिकों का मानना है कि कोसी नदी को बचाने के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा। विशेषज्ञों ने वर्षा के जल को धरती के अंदर पहुंचाने के लिए यांत्रिक ट्रीटमेंट को भी जरूरी बताया, साथ ही मनरेगा और वन विभाग समेत अन्य विभागों के सहयोग से चाल-खाल, खंतियां बनाने पर जोर दिया। 

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जिलाधिकारी सविन बंसल की पहल पर चनौदा में जुटे वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने कोसी और उसकी सहायक नदियों को रिचार्ज करने के लिए कई सुझाव दिए। वैज्ञानिकों ने कोसी नदी के जल स्तर को बढ़ाने के लिए सहायक नदियों में छोटे-छोटे तटबंध बनाने के साथ राज्य योजना से मनरेगा और वन विभाग समेत अन्य विभागों के सहयोग से चाल-खाल, खंतियां आदि बनाने पर जोर दिया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में धारे-नौलों को पुनर्जीवित करने के लिए अभियान चलाने की भी बात कही। कुविवि एसएसजे परिसर के भूगोल विभाग के प्रो. जेएस रावत ने वर्षा के जल को धरती के अंदर पहुंचाने के लिए यांत्रिक ट्रीटमेंट को भी जरूरी बताया। उन्होंने बताया कि नदी को पुनर्जीवित करने के लिए नदी के उद्गम स्थल के 200 मीटर की परिधि में झाड़ियों के अलावा नैपियर घास लगाने का काम शुरू किया जाए। इस इलाके में बांज के जंगल इसके लिए उपयुक्त साबित हो सकते हैं। 
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जिलाधिकारी सविन बंसल ने राज्य योजना से मनरेगा और वन विभाग समेत अन्य विभागों के सहयोग से चाल-खाल, खंतिया बनाने पर भी कार्य करने की बात कही। इससे पहले जीबी पंत संस्थान कोसी कटारमल के वरिष्ठ वैज्ञानिक किरीट कुमार, कुविवि एसएसजे परिसर के प्रो. जेएस रावत, लोक विकास संस्था के रवि चौपड़ा समेत जिलाधिकारी सविन बंसल, वन विभाग की टीम ने चनौदा में कोसी नदी के उद्गम स्थल का निरीक्षण किया। सभी ने कोसी और उसकी सहायक नदियों का जल स्तर कम होने को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने छानी ल्वेशाल के बांज के जंगल में स्थित जल स्रोत का भी निरीक्षण किया। इस स्रोत का पानी कोसी नदी में जाता है। उन्होंने स्रोत के आसपास पौधरोपण करने पर जोर दिया। निरीक्षण के दौरान उक्त लोगों के अलावा डीएफओ एसआर प्रजापति, लक्ष्मी आश्रम की नीमा, डेविड, पीसी तिवारी, दयाकृष्ण कांडपाल ने विचार रखे। इस मौके पर एसडीएम विवेक रॉय, तहसीलदार खुशबू आर्या, मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह, जिला उद्यान अधिकारी भावना जोशी, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता नवीन सिंघल, लघुडाल के नेबू लाल आदि मौजूद रहे।

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