फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Scientists from GB Pant Institute of Environment get Indian patent

Almora News: जीबी पंत पर्यावरण संस्थान के वैज्ञानिकों को मिला भारतीय पेटेंट

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2026 11:06 PM IST
विज्ञापन
Scientists from GB Pant Institute of Environment get Indian patent
अल्मोड़ा। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी के वैज्ञानिकों को पियोनिया इमोडी रोयल (चंद्रा) से चिकित्सीय ग्लाइकोसाइड और पोलीफीनोल यौगिकों के निष्कर्षण की प्रक्रिया शोध शीर्षक पर ''''भारतीय पेटेंट'''' कार्यालय की ओर से पेटेंट प्रदान किया गया है।
विज्ञापन

औषधीय पादपों के निष्कर्षण के लिए, रासायनिक विलायक जैसे मेथेनॉल, एसीटोन, इथाइल ईथर, आदि का प्रयोग किया जाता है। लेकिन ये विलायक, विषैले, अत्यधिक वाष्पशील तथा पर्यावरण के लिए हानिकारक होते हैं। संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से एक ऐसा विलायक तैयार किया है जो पर्यावरण के अनुकूल है। जिसे नेचुरल डीप यूटेक्टिक विलायक (एनएडीईएस) के रूप में जाना जाता है। इस विलायक की मुख्य बात यह है कि इसे 21वीं शताब्दी का प्राकृतिक विलायक कहा जाता है। वैज्ञानिकों ने इस निष्कर्षण प्रक्रिया में अत्याधुनिक और ताप-रहित क्रिया अल्ट्रासोनिक-एसिस्टेड एक्सट्रक्टेड (यूएई) को एनएडीईएस के साथ उपयोग किया है। ग्लाइकोसाइड (पेयोनिफ्लोरीन तथा एल्बीफ्लोरीन) और पॉलीफीनॉल (एस्कार्बिक एसिड, कैटेचिन तथा गैलिक एसिड) की यील्ड (मात्रा) की तुलना पारंपरिक रासायनिक विलायकों से की है।
विज्ञापन

इस यूएई-एनएडीईएस प्रक्रिया में इन प्राकृतिक तत्वों की मात्रा ज्यादा पाई गई है। इसके साथ ही इस तकनीक से प्राप्त अर्क (एक्स्ट्रेक्ट) में हाइपोग्लाइसेमिक गतिविधि ब्लड शुगर या शर्करा के स्तर को कम करने की क्षमता भी काफी अधिक दर्ज की गई है जो इसे मधुमेह के इलाज के लिए और अधिक प्रभावी बनाती है। विशेष रूप से पेयोनिफ्लोरीन और एल्बीफ्लोरीन अपने सूजन-रोधी, दर्द निवारक और न्यूरोप्रोटेक्टिव गुणों के कारण जाने जाते हैं, जिनकी फार्मास्युटिकल और कॉस्मेटिक उद्योगों में आधुनिक दवाओं के निर्माण में उपयोग किया जा रहा है। कुल मिलाकर यूएई-एनएडीईएस इन कंपाउडों की मात्रा बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण अनुकूलित भी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

औषधीय वनस्पतियों के वैज्ञानिक उपयोग और संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है यह शोध
यह शोध हिमालयी औषधीय वनस्पतियों के वैज्ञानिक उपयोग और संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पियोनिया इमोडी लंबे समय से पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में एंटी ऑक्सीडेंट एवं विभिन्न चिकित्सीय गुणों के कारण उपयोग किया जा रहा है । इसी के मद्देनजर शोध प्रक्रियाओं की ओर से विकसित की गई यह नवीन निष्कर्षण तकनीक एक हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल प्रक्रिया पर आधारित है, जिसमें विषैले कार्बनिक विलायकों के स्थान पर प्राकृतिक एवं सुरक्षित विलायकों का उपयोग किया गया है। यह तकनीक औषधीय यौगिकों की बेहतर प्राप्ति और उनके अधिक प्रभावी उपयोग को संभव बनाते हुए भविष्य में औषधि, न्यूट्रास्यूटिकल, हर्बल तथा स्वास्थ्य उत्पादों के विकास के लिए नए अवसर प्रदान करेगी। यह शोध कार्य संस्थान के कार्यकारी निदेशक एवं केंद्र प्रमुख डॉ. आईडी भट्ट के निर्देशन में संस्थान के शोधार्थियों डॉ. बसंत सिंह, डॉ. लक्ष्मण सिंह तथा डॉ. पुष्पा केवलानी ने संपन्न किया है।

--------------
यह शोध न केवल हिमालयी जैव विविधता के संरक्षण को सुदृढ़ करेगा, बल्कि औषधीय, न्यूट्रास्यूटिकल, हर्बल, फार्मास्युटिकल एवं स्वास्थ्य उद्योगों के लिए भी नई संभावनाएं विकसित करेगा। आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से पारंपरिक औषधीय पौधों के जैव सक्रिय यौगिकों का वैज्ञानिक प्रमाणीकरण एवं मूल्य संवर्धन संभव हो सकेगा।

डॉ. आईडी भट्ट, निदेशक जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी अल्मोड़ा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed