स्कूल में 10वीं के छात्र की संदिग्ध हालत में जलकर मौत
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लमगड़ा ब्लॉक के अंतर्गत जीआईसी सत्यों में मंगलवार को दसवीं में पढ़ने वाले एक छात्र और अपने घर के इकलौते चिराग की आग से जलकर मौत हो गई। कहा जा रहा है कि खुद ही केरोसिन लेकर गए छात्र ने स्कूल के एक कमरे में उस वक्त अपने शरीर पर केरोसिन डालकर आत्मदाह कर लिया, जब विद्यालय में प्रार्थना सभा हो रही थी। लेकिन, मृत्यु से पहले पुलिस प्रशासन को दिए बयान में उसने नकाबपोशों द्वारा केरोसिन छिड़कर आग लगाने की बात कही है, हालांकि परिवार वालों की तरफ से अभी तक कोई तहरीर नहीं दी गई है।
स्कूल प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक जीआईसी सत्यों में दसवीं का छात्र 15 वर्षीय राकेश कनवाल निवासी रालाकोट मंगलवार को घर से ही एक बोतल में करीब आधा लीटर केरोसिन लेकर आया था। स्कूल पहुंचने के बाद राकेश कक्षा में चला गया। इस बीच सुबह करीब 9.40 बजे सभी छात्र-छात्राएं विद्यालय के प्रांगण में प्रार्थना के लिए चले गए, लेकिन राकेश प्रार्थना स्थल पर नहीं गया और कक्षा में ही रहा। कुछ देर बाद उसके चिल्लाने की आवाज सुनाई पड़ी। शोर सुनकर कुछ शिक्षक और बच्चे वहां पहुंचे तो उनके होश उड़ गए। राकेश के कपड़ों में आग की लपटें उठ रही थीं। उन्होंने चटाई आदि से किसी तरह आग बुझाई, लेकिन तब तक वह बुरी तरह झुलस चुका था। विद्यालय प्रशासन ने तत्काल 108 एंबुलेंस को सूचना दी लेकिन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी। इस पर प्रधानाचार्य दिनेश सिंह रावत और शिक्षकों ने प्राइवेट कार मंगवाकर छात्र को तुरंत बेस अस्पताल अल्मोड़ा भेजा। उसकी नाजुक हालत देखते हुए उसे सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी रेफर कर दिया, वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बेस अस्पातल में ड्यूटी पर तैनात डा. प्रीति पंत के मुताबिक राकेश कनवाल का शरीर करीब 98 प्रतिशत झुलस चुका था।
प्रधानाचार्य दिनेश सिंह रावत ने बताया कि छात्र ब्लैक बोर्ड साफ करने के नाम पर घर से ही केरोसिन लेकर आया था जबकि स्कूल में अब सफेद बोर्ड हैं और इन्हें केरोसिन से साफ नहीं किया जाता। प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने आशंका जताई है कि छात्र किसी वजह से तनाव में था और इसी के चलते उसने आत्मदाह किया। राकेश कनवाल माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी दो बहनें हैं।
लेकिन राकेश के बयानों से पुलिस सकते में
अल्मोड़ा। बुरी तरह झुलसे राकेश कनवाल के मृत्यु पूर्व बयानों से पुलिस को सकते में डाल दिया है। बेस अस्पताल में पुलिस और अन्य लोगों के सामने राकेश ने बयान दिया कि चार नकाबपोश युवक स्कूल में आए और उन्होंने उसके शरीर में केरोसिन डालकर आग लगा दी। जब उससे पूछा गया कि वह घर से मिट्टी तेल लेकर क्यों आया था तो उसका जवाब था कि वह केरोसिन ब्लैक बोर्ड साफ करने के लिए लाया था। कथित नकाबपोशों के बारे में वह कुछ नहीं बता सका। दूसरी तरफ विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकों और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घटना के वक्त स्कूल में नकाबपोश अथवा कोई अन्य नहीं मौजूद नहीं था और आसपास भी कोई संदिग्ध नजर नहीं आया। बताया गया है कि राकेश अपने पड़ोस में किसी महिला से केरोसिन मांग कर लाया था। उसने महिला को बताया कि स्कूल में ब्लैक बोर्ड साफ करने के लिए केरोसिन की जरूरत है।
कोट---
प्रथम दृष्ट्या यह आत्मदाह का मामला लग रहा है। ऐसी जानकारी मिली है कि राकेश को सुबह घर पर भी डांट पड़ी थी। इसके बाद ही उसने यह कदम उठाया। मामले की जांच की जा रही है। इसके निष्कर्षों के आधार पर ही कुछ कहा जा सकेगा। - पी रेणुका देवी, एसएसपी अल्मोड़ा।
ये सवाल अनसुलझे
1. राकेश ने अपने बयान में कहा कि वह ब्लैक बोर्ड साफ करने के लिए केरोसिन खुद ले गया था लेकिन प्रधानाचार्य के अनुसार स्कूल में ब्लैक बोर्ड की बजाय व्हाइट बोर्ड हैं, जिन्हें केरोसिन से साफ नहीं किया जाता।..तो फिर राकेश केरोसिन किस लिए ले गया था।
2. राकेश के मृत्यु पूर्व बयान हैं कि नकाबपोश ने उसे जलाया, तो सवाल उठता है कि नकाबपोशों पर स्कूल में और किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी, राकेश ने विरोध क्यों नहीं किया, केरोसिन डालने से जलाने तक वह चीखा-चिल्लाया क्यों नहीं
3. जिस वक्त घटना हुई उस वक्त स्कूल में प्रार्थना सभा हो रही थी, सभी बच्चे प्रार्थना सभा में थे फिर राकेश प्रार्थना सभा में क्यों नहीं गया?