फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   sanskritik nagari

अब भी नहीं जागे तो कैसे बचेगी सांस्कृतिक नगरी

Fri, 08 Jul 2016 12:22 PM IST
almora news
almora news Updated Fri, 08 Jul 2016 12:22 PM IST
विज्ञापन

अल्मोड़ा नगर और आसपास के इलाकों में पिछले तीन दशकों में भूस्खलन की कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। अल्मोड़ा नगर शुरू से ही अनियोजित ढंग से बसा है। नगर की आबादी तेजी से बढ़ रही है और लगातार भवनों का निर्माण चल रहा है। भूगर्भ वैज्ञानिकों का मानना है कि मुख्य नगर में बरसात के पानी की निकासी के उचित प्रबंध नहीं होने के कारण नगर के निचले इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं होती हैं और अब भी नगर में ड्रेनेज सिस्टम नहीं बनाया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

विज्ञापन


अल्मोड़ा में बसासत 1560 से शुरू हुई। हालांकि भौगोलिक दृष्टि से अल्मोड़ा काफी सुरक्षित माना जाता है। 19वीं शताब्दी से पहले काफी कम निर्माण हुआ था। तब गिने चुने भवन थे। बाद के वर्षों में बेतरतीब निर्माण से स्थिति बिगड़ी। प्रकृति से छेड़छाड़ के बाद से ही भूस्खलन की घटनाओं का दौर शुरू हुआ। 1993 में अल्मोड़ा की इंदिरा कालोनी इलाके में अनेक मकान ध्वस्त हो गए थे। भूगर्भ वैज्ञानिकों ने इस समूचे इलाके में भवन बनाने पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था, लेकिन हाल के वर्षों में वहां दर्जनों भवन बना दिए गए। इसका नतीजा यह हुआ कि सितंबर 2010 फिर से भारी तबाही हुई और करीब 100 से अधिक मकान ध्वस्त हो गए थे।
विज्ञापन


इसके बावजूद नगरपालिका प्रशासन अथवा जिला स्तर पर किसी एजेंसी ने नियोजित निर्माण के लिए न तो कोई योजना बनाई गई और न ही इस पर नियंत्रण के लिए किसी विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। अब भी जिसकी जहां मर्जी वहां भवनों का निर्माण शुरू हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अल्मोड़ा को बचाना है तो जल निकासी के प्रबंध जरूरी : प्रो.रावत
अल्मोड़ा। वैज्ञानिक कहते हैं कि अल्मोड़ा को बचाना है तो नगर क्षेत्र में जल निकासी के ठोस प्रबंध करने जरूरी हैं। कुमाऊं विवि एसएसजे परिसर अल्मोड़ा परिसर में एनआरडीएमएस केंद्र के निदेशक  प्रो.जेएस रावत का कहना है कि नगर के पानी की निकासी के लिए पक्के नालों का  निर्माण किया जाना चाहिए। साथ ही भवनों का निर्माण पक्की चट्टानों वाले  स्थानों पर ही होना चाहिए। नालों के ऊपर कहीं भी अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नगर में भवनों के निर्माण के लिए उचित सही योजना बननी जरूरी है और भूगर्भ परीक्षण के बाद ही नियमों के अनुसार निर्माण होना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed