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बेड़ू पाको बारा मासा नरैण काफल पाको चैता ....
ब्यूरो/ अमर उजाला, अल्मोड़ा
Updated Sat, 07 Feb 2015 11:41 PM IST
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मोहन उप्रेती लोक संस्कृति कला और विज्ञान शोध समिति के तत्वावधान में हुक्का क्लब के प्रेक्षागृह में आयोजित मोहन उप्रेती लोक संगीत संध्या में कलाकारों ने लोकगीतों और लोकनृत्य की शानदार प्रस्तुति देकर संस्कृति के विविध रंग बिखेरे।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. देव सिंह पोखरिया नेे मोहन उप्रेती के कृतित्व और व्यक्तित्व के बारे में जानकारी दी। विशिष्ट अतिथि मनोहर बृजवाल थे। प्रो. पोखरिया और बृजवाल ने भोटिया जनजाति की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए डा. शेर सिंह पांगती को वर्ष 2014 का मोहन उप्रेती लोक संस्कृति सम्मान, हिंदी साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट बटरोही को कौस्तुभ सम्मान प्रदान किया। उत्तरांचल पर्वतीय कला केंद्र, दर्पण समिति, आरोही अकादमी के कलाकारों ने लोकनृत्य, लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति दी।
कलाकारों ने बेडू पाको बारा मासा नरैण काफल पाको चैता मेरी छैला..., दूर बड़ी दूर बर्फीलो डाना.. आदि कुमाऊंनी गीत प्रस्तुत कर वाहवाही बटोरी। कलाकारों ने विभू कृष्णा के निर्देशन में ‘मां ही क्यों दोषी’ नाटक का मंचन किया। कथक नृत्यांगना डा. दीपा जोशी द्वारा बेस्ट एक्टिंग के लिए ममता वाणी को स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। इस मौके पर बृजेंद्र लाल साह को भी याद किया गया। संचालन किरन पंत ने किया। वहां ध्रुव जोशी, रवि पांडे, चंद्रकला भट्ट, राजवीर रितेश जोशी, दीपा, चारू त्रिपाठी, अखिलेश मौर्या, भूपेंद्र वल्दिया, हरिकृष्णा जोशी, अर्जुन सिंह आदि मौजूद थे।
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मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. देव सिंह पोखरिया नेे मोहन उप्रेती के कृतित्व और व्यक्तित्व के बारे में जानकारी दी। विशिष्ट अतिथि मनोहर बृजवाल थे। प्रो. पोखरिया और बृजवाल ने भोटिया जनजाति की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए डा. शेर सिंह पांगती को वर्ष 2014 का मोहन उप्रेती लोक संस्कृति सम्मान, हिंदी साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट बटरोही को कौस्तुभ सम्मान प्रदान किया। उत्तरांचल पर्वतीय कला केंद्र, दर्पण समिति, आरोही अकादमी के कलाकारों ने लोकनृत्य, लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति दी।
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कलाकारों ने बेडू पाको बारा मासा नरैण काफल पाको चैता मेरी छैला..., दूर बड़ी दूर बर्फीलो डाना.. आदि कुमाऊंनी गीत प्रस्तुत कर वाहवाही बटोरी। कलाकारों ने विभू कृष्णा के निर्देशन में ‘मां ही क्यों दोषी’ नाटक का मंचन किया। कथक नृत्यांगना डा. दीपा जोशी द्वारा बेस्ट एक्टिंग के लिए ममता वाणी को स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। इस मौके पर बृजेंद्र लाल साह को भी याद किया गया। संचालन किरन पंत ने किया। वहां ध्रुव जोशी, रवि पांडे, चंद्रकला भट्ट, राजवीर रितेश जोशी, दीपा, चारू त्रिपाठी, अखिलेश मौर्या, भूपेंद्र वल्दिया, हरिकृष्णा जोशी, अर्जुन सिंह आदि मौजूद थे।
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