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Almora News: मुख्यमंत्री विवेकाधीन राहत कोष की सूची पर सवाल, पारदर्शिता की मांग

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 11:24 PM IST
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Questions raised on the list of Chief Minister's Discretionary Relief Fund, demand for transparency
रानीखेत (अल्मोड़ा)। मुख्यमंत्री विवेकाधीन राहत कोष के लाभार्थियों की सूची को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूची सार्वजनिक होने के बाद लोगों के बीच यह विषय प्रमुख चर्चा का केंद्र बना हुआ है। चौक-चौराहों से लेकर सामाजिक बैठकों तक राहत कोष के उद्देश्य, पात्रता और लाभार्थियों के चयन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि ऐसी योजनाओं में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए ताकि सहायता केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक ही पहुंचे।
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स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी हो रही है कि यदि सूची में आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों या ऐसे लोगों के नाम शामिल होने की बातें सामने आ रही हैं, जिनके परिवार के सदस्य सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत्त हैं अथवा बच्चे विदेशों में अच्छे पैकेज पर कार्यरत हैं, तो इससे लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े होते हैं।
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नागरिकों का कहना है कि जनहित की योजनाओं पर जनता का विश्वास तभी बना रह सकता है, जब सहायता वितरण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो। उनका मानना है कि यदि किसी भी स्तर पर संदेह की स्थिति उत्पन्न हुई है तो तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की चर्चाओं पर विराम लग सके और जरूरतमंदों को बिना किसी विवाद के समय पर सहायता मिलती रहे। संवाद
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लोगों की राय
मुख्यमंत्री विवेकाधीन राहत कोष का उद्देश्य गरीब, असहाय और संकटग्रस्त लोगों की मदद करना है। यदि आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों तक भी सहायता पहुंचने की चर्चाएं हैं तो सरकार को पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। - नारायण सिंह, ग्रामीण
- क्षेत्र में यह चर्चा है कि कुछ ऐसे परिवारों के नाम भी सूची में बताए जा रहे हैं, जिनके सदस्य सरकारी पेंशनधारक हैं। यदि ऐसा है तो लाभार्थियों के चयन के मानकों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि लोगों के मन में कोई संशय न रहे। - नवीन चंद्र, ग्रामीण
- कुछ ऐसे परिवारों के नाम सामने आए हैं, जिनके बच्चे विदेशों में अच्छी नौकरियां कर रहे हैं। यदि यह सही है तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे कि राहत राशि की पात्रता किस आधार पर तय की गई। - कुंदन सिंह, ग्रामीण

- कहीं-कहीं ऐसे परिवारों के नाम होने की भी चर्चा है, जिनके पास चार पहिया वाहन और पक्के दो मंजिला मकान हैं। यदि ये बातें सही हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों का अधिकार प्रभावित न हो। -सूरज अधिकारी, ग्रामीण
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