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निदेशालय में निदेशक की नियमित नियुक्ति को लेकर चौबटिया में हंगामा
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उद्यान निदेशालय के गेट पर तालाबंदी करते दीपक करगेती। संवाद
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। चौबटिया स्थित उद्यान निदेशालय में निदेशक को स्थायी तौर पर बैठाने की मांग को लेकर शनिवार को बवाल खड़ा हो गया। निदेशक रोको अभियान के तहत समाजसेवी दीपक करगेती के नेतृत्व में क्षेत्र के काश्तकारों और अन्य लोगों ने उद्यान निदेशालय गेट पर तालाबंदी कर दी और वहीं धरने पर बैठ गए। निदेशक भी कार्यालय में काम निपटाते रहे।
निदेशक के लंच के लिए बाहर निकलते ही आंदोलनकारियों की उनसे तीखी नोकझोंक हो गई। आंदोलनकारियों ने उनका वाहन नहीं जाने दिया। पुलिस ने बल प्रयोग कर आंदोलनकारियों को उठाया हालांकि फिर से वे लोग वहां बैठ गए। बाद में एसडीएम के माध्यम से मंत्री को ज्ञापन भेजा गया और निदेशक को यहीं बैठने के लिए निर्देशित करने की मांग उठाई गई।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि कई वर्षों से निदेशालय में निदेशक स्थायी रूप से नहीं बैठते। सारे कार्य देहरादून कैंप कार्यालय से निपटाए जा रहे हैं। शनिवार को निदेशक डॉ. हरमिंदर सिंह बावेजा के यहां पहुंचने की भनक लगी तो दीपक करगेती के नेतृत्व में भतरौंजखान की छात्रसंघ अध्यक्ष अंकिता पडलिया सहित कुछ काश्तकार निदेशालय पहुंच गए और गेट पर तालाबंदी कर वहां धरने पर बैठ गए। दोपहर में निदेशक बाहर निकले तो उनकी आंदोलनकारियों से वार्ता हुई। इस दौरान निदेशक बोल बैठे कि आंदोलन के नाम पर अराजकता करने वाले काश्तकार नहीं हो सकते। बातचीत ऐसी बिगड़ी की वहां निदेशक के साथ तीखी बहस हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने बल प्रयोग कर आंदोलनकारियों को हटाया।
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-पर्वतीय क्षेत्र के औद्यानिकी विकास की अवधारणा को लेकर स्थापित उद्यान निदेशालय की गत खराब हो गई है। निदेशक आठ महीने में एक बार आकर यहां पिकनिक मना रहे हैं। काश्तकारों को उद्यान विभाग से कोई लाभ नहीं मिल रहा है। यह आंदोलन भविष्य में भी जारी रहेगा। निदेशक को स्थायी रूप से निदेशालय में ही बैठना चाहिए।-दीपक करगेती, सामाजिक कार्यकर्ता।
‘चौबटिया में बैठकर नहीं हो सकता औद्यानिकी विकास’
-मेरे पास उद्यान सहित पांच अन्य विभाग हैं। चुनाव हारा हुआ एक व्यक्ति यहां आकर अराजकता कर रहा है, यह सही नहीं है। देहरादून में बैठकर पूरे प्रदेश के औद्यानिकी विकास की अवधारणा को साकार किया जा रहा है। 526 करोड़ के प्रोजेक्ट बन रहे हैं, वह रानीखेत में बैठकर तो नहीं बनाए जा सकते। फिर यहां हमारे अधिकारी हैं, काश्तकारों के हित कतई प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे।-डॉ. हरमिंदर सिंह बवेजा, उद्यान निदेशक।
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निदेशक के लंच के लिए बाहर निकलते ही आंदोलनकारियों की उनसे तीखी नोकझोंक हो गई। आंदोलनकारियों ने उनका वाहन नहीं जाने दिया। पुलिस ने बल प्रयोग कर आंदोलनकारियों को उठाया हालांकि फिर से वे लोग वहां बैठ गए। बाद में एसडीएम के माध्यम से मंत्री को ज्ञापन भेजा गया और निदेशक को यहीं बैठने के लिए निर्देशित करने की मांग उठाई गई।
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आंदोलनकारियों का आरोप है कि कई वर्षों से निदेशालय में निदेशक स्थायी रूप से नहीं बैठते। सारे कार्य देहरादून कैंप कार्यालय से निपटाए जा रहे हैं। शनिवार को निदेशक डॉ. हरमिंदर सिंह बावेजा के यहां पहुंचने की भनक लगी तो दीपक करगेती के नेतृत्व में भतरौंजखान की छात्रसंघ अध्यक्ष अंकिता पडलिया सहित कुछ काश्तकार निदेशालय पहुंच गए और गेट पर तालाबंदी कर वहां धरने पर बैठ गए। दोपहर में निदेशक बाहर निकले तो उनकी आंदोलनकारियों से वार्ता हुई। इस दौरान निदेशक बोल बैठे कि आंदोलन के नाम पर अराजकता करने वाले काश्तकार नहीं हो सकते। बातचीत ऐसी बिगड़ी की वहां निदेशक के साथ तीखी बहस हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने बल प्रयोग कर आंदोलनकारियों को हटाया।
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-पर्वतीय क्षेत्र के औद्यानिकी विकास की अवधारणा को लेकर स्थापित उद्यान निदेशालय की गत खराब हो गई है। निदेशक आठ महीने में एक बार आकर यहां पिकनिक मना रहे हैं। काश्तकारों को उद्यान विभाग से कोई लाभ नहीं मिल रहा है। यह आंदोलन भविष्य में भी जारी रहेगा। निदेशक को स्थायी रूप से निदेशालय में ही बैठना चाहिए।-दीपक करगेती, सामाजिक कार्यकर्ता।
‘चौबटिया में बैठकर नहीं हो सकता औद्यानिकी विकास’
-मेरे पास उद्यान सहित पांच अन्य विभाग हैं। चुनाव हारा हुआ एक व्यक्ति यहां आकर अराजकता कर रहा है, यह सही नहीं है। देहरादून में बैठकर पूरे प्रदेश के औद्यानिकी विकास की अवधारणा को साकार किया जा रहा है। 526 करोड़ के प्रोजेक्ट बन रहे हैं, वह रानीखेत में बैठकर तो नहीं बनाए जा सकते। फिर यहां हमारे अधिकारी हैं, काश्तकारों के हित कतई प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे।-डॉ. हरमिंदर सिंह बवेजा, उद्यान निदेशक।

उद्यान निदेशक से वार्ता करते आंदोलनकारी। संवाद- फोटो : RANIKHET

आंदोलनकारियों को समझाते पुलिस कर्मी। संवाद- फोटो : RANIKHET